खुद की गाड़ी या किराए पर गाड़ी लेकर उत्तराखंड में काम के सिलसिले या घूमने के लिए जाने की योजना बना रहे हैं? सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपकी गाड़ी या किराए पर ली गयी गाड़ी में डस्टबिन या गार्बेज बैग जरूर हो। अगर ऐसा नहीं होता है, तो तैयार हो जाइए...आपको भरना पड़ सकता है भारी जुर्माना।
जी हां, राज्य में साफ-सफाई को बनाए रखने के लिए उत्तराखंड की सरकार ने राज्य में प्रवेश करने वाली हर गाड़ी में डस्टबिन या गार्बेज बैग का होना अनिवार्य किया है। बताया जाता है कि यह फैसला हिमालय पर्वतश्रृंखला की गोद में बसे इस राज्य में पर्यटकों द्वारा जहां-तहां कचरा फैलाने की आदत को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के परिवहन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे नियमित तौर पर राज्य के सभी एंट्री प्वाएंट्स पर जांच करें और इस नियम को लागू करवाएं। इस नियम को खासतौर पर चार धाम यात्रा की रूट के अलावा प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे देहरादून, मसूरी और नैनीताल आदि में आने वाले पर्यटकों पर भी सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
बताया जाता है कि उत्तराखंड के परिवहन विभाग ने पड़ोसी राज्यों के परिवहन कमिश्नर से इसे लागू करवाने का अनुरोध करते हुए संपर्क किया है। जिन राज्यों के परिवहन कमिश्नर से संपर्क किया गया है उनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं।

अगर हुआ नियम का उल्लंघन?
अगर किसी गाड़ी ने इस नियम का उल्लंघन कर उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करने का प्रयास किया या राज्य में कहीं भी घूमता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं, इन वाहनों का Trip Card भी जब्त कर लिया जा सकता है, जो राज्य के अंदर घूमने के लिए जरूरी होता है।
मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की रणनीति के अनुसार उत्तराखंड में प्रवेश के लिए सिर्फ उन्हीं गाड़ियों को ऑनलाइन और एंट्री प्वाएंट्स पर ट्रिप कार्ड जारी किया जाएगा जिनकी गाड़ी में डस्टबिन या गार्बेज बैग होगा। इसके साथ ही वाहन के मालिक को ट्रिप कार्ड प्राप्त करने के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फिटनेस सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस के कागजात, प्रदूषण सर्टिफिकेट आदि भी प्रस्तुत करना होगा।

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य घूमने के लिए आने वाले पर्यटकों द्वारा कचरा सड़कों या पहाड़ियों की खाई में फेंकने की आदत में कमी लाना है। इस बारे में उत्तराखंड की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उत्तराखंड एक पर्यटन राज्य है। इस राज्य को साफ-सुथरा रखना और पर्यावरण की रक्षा करने की जिम्मेदारी यहां के निवासियों के साथ-साथ यहां हर साल घूमने आने वाले लाखों पर्यटकों की भी है।



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