बारिश का मौसम और मनाली घूमने का प्लान! मन में उत्साह भी रहता है और डर भी। लेकिन क्या वाकई में आपको मॉनसून में मनाली जाना चाहिए या नहीं। इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं कि बारिश के मौसम में मनाली की आबो-हवा एक दम अलग होती है। ऐसे में आप कहां-कहां घूमने का प्लान बना सकते हैं कहां नहीं जाना चाहिए, ये सब हम आपको बतायेंगे।
लेकिन हां मनाली आने से पहले सोशल मीडिया पर दौड़ रहे पुराने वीडियो कतई मत देखें, नहीं तो आप पहले ही भयभीत हो जायेंगे।

वीडियो की बात हम इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि हाल ही में सोशल मीडिया पर मनाली के पिछले साल की बाढ़ के वीडयो वायरल हो रही हैं। वीडियो देख लोगों को लग रहा है, कि इस वक्त मनाली जाना खतरे से खाली नहीं। लेकिन अगर आप यहां के मौसम की पूरी जानकारी लेकर निकलते हैं तो यकीन मानिये आपकी ट्रिप बेहतरीन हो सकती है। अब सावधानी तो हर जगह रखनी होती है।
तो चलिए शुरुआत करते हैं माल रोड से। यहां की माल रोड के पहले तक सुबह से ही वाहनों का तांता लगने लगता है। वीकेंड पर तो इतनी ज्यादा भीड़ हो जाती है कि कार पार्क करने की जगह तक नहीं मिलती है। हालांकि माल रोड के सेंटर प्वाइंट तक वाहन ले जाना प्रतिबंधित है। यहीं से हिडंबा मंदिर के लिए रास्ता जाता है।

बारिश में मलाली से कुल्लू का रास्ता
मॉनसून में आप मनाली पहुंचे और बारिश नहीं हो रही है तो मतलब आप बहुत लकी हैं, लेकिन अगर बारिश हो रही है, तो कुल्लू जाने वाले रास्ते में आपके सामने लैंड स्लाइड का खतरा हमेशा बना रहेगा, इसलिए स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस और चेतावनी एक बार जरूर पढ़ लें। सुंदरनगर से मनाली और मनाली से कुल्लू के रास्ते में जाते वक्त रोड के साथ-साथ ब्यास नदी बहती है। गर्मी और जाड़े में यह नदी बेहद खूबसूरत होती है, लेकिन बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने के कारण नदी की खूबसूरती पूरी तरह जलमग्न हो जाती है।
गर्मी और जाड़े में जो पानी एकदम ट्रांसपेरेंट दिखता है, वहीं बारिश में बहाव अधिक होने के कारण नदी में पहाड़ से मिट्टी भी बह कर आती है जिससे पानी का रंग मटमैला हो जाता है। आप अपनी गाड़ी रोक कर सड़क के किनारे फोटो खिंचवा सकते हैं या सेल्फी ले सकते हैं, लेकिन भूल कर भी पानी की ओर मत जाइयेगा।
क्योंकि नदी का बहाव घटता बढ़ता रहता है, ऐसे में जरा सी चूक आपको नदी में धकेल सकती है। बेहतर होगा पानी में जाने से बचें, भले ही पानी केवल घुटनों तक ही क्यों न हो। और हां, अगर आप यह सोच कर पानी में उतरते हैं कि बगल में पत्थर है, उसका सहारा ले लेंगे, तो इस भूल में मत रहियेगा कि पत्थर आपको बचा लेगा, दरअसल पत्थर पर लैंड स्लाइड का खतरा अधिक बना रहता है।
सड़क खूबसूरत लेकिन किनारे नहीं
हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रयास ही हैं, जिसकी वजह से मनाली की सड़कें इस वक्त बेहतरीन सड़कों में से एक हैं। सड़क अच्छी है, इसका मतलब यह नहीं कि कनारे अच्छे हों, किनारे बैरिकेडिंग है, तो उसे क्रॉस करने की गलती कभी मत करें और हां, जिन मोड़ या रास्तों पर चेतावनी के साइनबोर्ड लगे हैं, वहां तो कतई मत रुकिये।

पैरा ग्लाइडिंग का सुनहरा अवसर, लेकिन सावधानी जरूरी
मनाली से कुल्लू जाने वाली रोड पर एक जगह पड़ती है, जिसका नाम डोभी है। यह जगह पैरा ग्लाइडिंग के लिय मशहूर है। बारिश के मौसम में पैरा ग्लाइडिंग कर सकते हैं या नहीं, यह निर्भर करता है मौसम पर। अगर भारी बारिश की चेतावनी है, तो स्थानीय प्रशासन इस पर रोक लगा देता है।
वाहन की स्पीड का रखें खास ध्यान
पहाड़ों पर ड्राइव करते वक्त साइन बोर्ड को जरूर पढ़ते चलें। मनाली में कई जगह आपको स्पीड लिमिट 20 तक दिखेगी। रास्ता भले ही खाली हो, लेकिन अगर 20 की लिमिट लिखी है तो भी उसे फॉलो करें, क्योंकि ये साइनबोर्ड कुछ सोच कर ही लगाये गये हैं।

मनाली में रिवर राफ्टिंग
जुलाई में नदी में पानी का बहाव बहुत तेज़ होता है, इसलिए आम तौर पर इसे बंद कर दिया जाता है। इसलिए अगर आप रिवर राफ्टिंग की तैयारी से मनाली जा रहे हैं, तो फिलहाल वो आइडिया ड्रॉप कर दीजिये। सभी रिवर राफ्टिंग का स्टार्टिंग प्वाइंट एक ही होता है, एंड प्वाइंट अलग-अलग होता है। आपको रिवर राफ्टिंग के तमाम काउंटर यहां आसानी से मिल जायेंगे। इसलिए पहले रिवर राफ्टिंग की बुकिंग करके मत जायें। क्योंकि वहां पहुंचने के बाद अगर सब बंद हुआ तो आपके पैसे वापस नहीं होंगे।
कनोई वॉटरफॉल का नज़ारा
यहां के फेमस कनोई वॉटरफॉल में गर्मियों के मौसम में बहुत भीड़ रहती है, हालांकि बारिश के मौसम में लोग पानी के बहाव के डर से यहां कम आते हैं। लेकिन अगर आप यहां जा रहे हैं, तो ध्यान रहे लाइन बना कर चलें, जल्दबाजी में या इधर-उधर का रास्ता पकड़ने से आपको चोट लग सकती है।



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