गंगटोक, जिसे लैंड आँफ मोनास्ट्री के नाम से भी जाना जाता है और सिक्किम का सबसे बड़ा शहर है। बौद्ध धर्म के लोगों के लिए बहुत ही खास जगह है। बड़े-बडे पहाड़, बर्फ से ठकी चोटियां और स्पार्कलिंग ऑर्किड लोगों को अपनी ओर खींचती है।
इसकी ताजा हवा, वन, पहाड़, घाटियां और बर्फ से ढकी चोटियां आपके मन को बहुत ही राहत पहुचाएगी। गंगटोक देश के सबसे अच्छे ट्रेकिंग स्पाट के लिए प्रसिद्ध है। गंगटोक को भारत के सुन्दर शहरों में से एक माना जाता है और प्रकृति के वरदान से भरी यह जादुई जगह हिमालय पर्वत क्षेत्र में स्थित है।

Photo Courtesy: Amitra Kar
गंगटोक का इतिहास
गंगटोक, तिब्बत और ब्रिटिश के लोगों बहुत ही खास ट्रेड सेंटर है। थुटोब नामग्याल ने 1894 में इसे सिक्कीम की राजधानी बनाया, तो ब्रिटिस शासन के अंदर एक मोनार्च थे। जब भारत आज़ाद हुआ तो सिक्किम वालों ने खुदको अलग मोनार्क में रखने का फैसला लिया।
1975 की लड़ाई और विवाद के बाद, सिक्किम को एक इंडियन स्टेट बनाया गया, जिसकी राजधानी गैंगटोक को घोषित किया गया। इस शहर को ट्रेड रिलेशन के क्षेत्र में बहुत बड़ा नुकशान झेलना पड़ा, जब नाथुला पास को बंद कर दिया गया था। फिर जब 2006 में नाथुला पास वापस से खुला तब गंगटोक अपने कार्य में वापस से आई।

Photo Courtesy: Sudeep Bajpai
गंगटोक की संस्कृति
इस शहर में बहुत तरह के भाषा या धर्म के लोग मिलेंगे। बौद्ध, चीनी , तिब्बतियों के साथ हिंदुओं की उपस्थिति गंगटोक का एक रंगीन माहौल देता है और हर त्योहार एक ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। लोसम और लोसर यहां के फेमस त्योंहारों में आता है। गंगटोक की इकोनोमी टूरिस्ट पर निर्भर करता है। यहां पर टूरिस्ट के लिए राफ्टिंग और ट्रेकिंग का भी इंतज़ाम होता है।
गंगटोक में करने के लिए कार्य
गंगटेक में बहुत सारे गोंपास, स्तूपा, पार्क और गार्डन हैं। यहां पर घूमने के लिए फेमस प्लेस है- हनुमान टोक, नाथुला पास, Tsomgo लेक इत्यादि। अगर आप गंगटोक या इसके आस-पास के जगह को देखना चाहते हैं और खुद से करने का आपको मन नहीं है तो आप गंगटोक होलीडे पैकेज भी ले सकते हैं। आपको वहां शौपिंग करने के लिए भी बहुत सुंदर-सुंदर चीज़े भी मिलेंगी, जिसे आप खुद भी रख सकते हैं और अपने परिवार वालों को गिफ्ट भी कर सकते हैं।
कैसे जाएं गंगटोक
गंगटोक को इंडिया के बहुत से पार्ट के हाईवे से कनेक्ट किया गया है। जीप से जाना सबसे आसान तरीका होता है। सिलीगुड़ी से लगभग 5 घंटे का रास्ता है। सबसे आसान है जलपाईगुड़ी या दार्जिलिंग से गंगटोक जाना। सिलीगुड़ी सबसे पास का एयरपोर्ट है और एयरपोर्ट से आपको टैक्सी मिलेगी गंगटोक जाने के लिए।



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