1 जुलाई से अमरनाथ धाम की यात्रा शुरू होने वाली है। साल में बस कुछ दिनों के लिए गर्मी के मौसम में खुलने वाली अमरनाथ गुफा की यात्रा इस साल 62 दिनों तक चलेगी। इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन 17 अप्रैल से शुरू हो चुका है। रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों मोड में हो सकता है।

चलिए आपको अमरनाथ यात्रा के रजिस्ट्रेशन व अन्य जानकारी देते हैं :
यात्रा का रुट
अमरनाथ यात्रा के दो परंपरागत रुट हैं। पहला रुट जम्मु से पहलगाम, चंदनवाड़ी, पिस्सु टॉप, शेषनाग, पंचतरानी होकर अमरनाथ की पवित्र गुफा तक जाता है। वहीं दूसरा रुट जम्मु से उधमपुर, कुद, पटनीटॉप, रामबाण, बनीहाल, काजीगंद, अनंतनाग, श्रीनगर, सोनमर्ग, बालटाल से होकर पवित्र अमरनाथ की गुफा तक है।

बालटाल से अमरनाथ जी की गुफा तक की दूरी 14 किमी है जिसे श्रद्धालु पैदल, खच्चर पर और कुछ भक्त दंडी काटते हुए भी तय करते हैं। अमरनाथ यात्रा के रजिस्ट्रेशन के लिए आपको 100 से 220 रुपये तक का फीस देना पड़ सकता है। हेलिकॉप्टर सेवा के लिए आपको 13000 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं।
कौन कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन

अमरनाथ धाम की यात्रा के लिए 13 साल से लेकर 75 साल का कोई भी व्यक्ति रजिस्ट्रेशन करवा सकता है। अमरनाथ धाम की चढ़ाई को सबसे दुर्गम धार्मिक यात्रा के तौर पर माना जाता है। इसलिए अमरनाथ धाम की यात्रा के लिए व्यक्ति का शारीरिक रूप से फिट होना बेहद जरूरी है। कोई भी गर्भवती महिला इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं करवा सकती है।
ऑनलाइन-ऑफलाइन मोड में रजिस्ट्रेशन
अमरनाथ धाम की यात्रा 1 जुलाई से 31 अगस्त 2023 तक चलेगी। यानी कुल 62 दिनों तक यह यात्रा चलेगी। इसके लिए आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों मोड से ही रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। अमरनाथ धाम की यात्रा का आयोजन श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड द्वारा किया जाता है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए jksasb.nic.in पर जाना होगा।

यहां ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद आपके मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा। उसे वेरिफाई करने के बाद आवेदन पत्र को आगे भेज दिया जाएगा। इसके बाद आपसे ऑनलाइन फीस जमा देने के लिए कहा जाएगा जिसके बाद आप यात्रा परमिट डाउनलोड कर सकते हैं। ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए आपको बैंक में जाना होगा।
अमरनाथ नहीं है ज्योतिर्लिंग
भगवान शिव का धाम होने की वजह से अमरनाथ को लोग अक्सर ज्योतिर्लिंग समझने की गलती करते हैं। लेकिन आपको बता दें, अमरनाथ ज्योतिर्लिंग नहीं है। क्योंकि किसी भी ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव अपने किसी भक्त को दर्शन देने या किसी भक्त की इच्छा से प्रकट हुए थे। ज्योतिर्लिंग में महादेव स्थायी रूप से निवास करते हैं।

लेकिन अमरनाथ में ऐसा नहीं है। अमरनाथ में भगवान शिव देवी पार्वती को जीवन और अनंत की कथा सुनाने आए थे। इस वजह से भगवान वहां स्थायी नहीं है। अमरनाथ में भगवान शिव का लिंग बर्फ की बूंदों से कुछ दिनों के लिए तैयार होता है और फिर यह पिघलकर गायब हो जाता है।



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