कोलकाता में हुगली (गंगा) नदी के नीचे से होकर मेट्रो गुजरेगी जिसका ट्रायल रन भी शुरू हो चुका है। जब मेट्रो हुगली नदी के नीचे सुरंग के बीचो-बीच पहुंचेगी उस समय यह जमीन से करीब 36 फीट नीचे रहेगी। जमीन के नीचे इतनी गहराई में यात्रियों को ऑक्सीजन की आपूर्ति कैसे की जाएगी!

यात्रियों को कहां से मिलेगी ऑक्सीजन
हुगली नदी के नीचे से गुजरते समय जब मेट्रो सुरंग के बीचो-बीच से गुजरेगी उस समय यह जमीन से करीब 36 फीट नीचे होगी। उतनी गहराई में यात्रियों को ऑक्सीजन की आपूर्ति कैसे होगी, यह सवाल कई लोगों के मन में घूम रही है। मेट्रो प्रबंधन से इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार 3 विशालाकार पंखों की मदद से नदी के नीचे गहराई में मेट्रो के सुरंग के नीचे हवा की कोई कमी नहीं होगी। ये पंखे ना सिर्फ अंदर की गर्म हवा को खींचकर बाहर निकाल देंगे बल्कि बाहर से ठंडी हवा भी सुरंग के अंदर पहुंचेगी।

3 तरह के पंखों का होगा इस्तेमाल
नदी के नीचे मेट्रो की सुरंग में 3 तरह के फैन्स का इस्तेमाल होगा। इसमें पहला फैन ओटीईएफ (ओवर ट्रैक एग्जॉस्ट फैन), दूसरा फैन यूपीएस और तीसरा फैन टीडीएफ (टनेल वेंटिलेशन फैन) है। तीनों तरह के पंखे लोअर कंक्रस लेवेल यानी टिकट काउंटर और प्लेटफार्म के बीच मशीन रुम में रहेंगे। तीनों पंखे लगातार काम करेंगे जो सुरंग के अंदर लगातार शुद्ध हवा का संचार करने के साथ-साथ प्लेटफार्म की गर्म हवा को बाहर निकाल देंगे।
नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी
कोलकाता मेट्रो रेल प्रबंधन (केएमआरसीएल) के अधिकारियों ने बताया, "जब कोई मेट्रो सुरंग से होकर गुजरती है तो वह विपरित दिशा से आने वाली हवा को भी अपने साथ बाहर लेकर निकल जाती है। प्लेटफार्म पर भी भीड़ ज्यादा होने पर वहां ऑक्सीजन कम होने लगती है और गर्मी बढ़ जाती है।" हावड़ा मैदान मेट्रो स्टेशन हावड़ा रेलवे स्टेशन का सबसे नजदीकि मेट्रो स्टेशन होगा।

इसलिए उम्मीद की जा रही है कि हर रोज सैंकड़ों यात्री मेट्रो से गंगा नदी को पार कर कोलकाता महानगर में आएंगे। अधिक यात्रियों की मौजूदगी से मेट्रो स्टेशन के प्लेटफार्म पर गर्मी बढ़ जाएगी। ऐसी स्थिति में पहले दो तरह के पंखों का इस्तेमाल किया जाएगा। इमरजेंसी की स्थिति में तीसरे पंखे का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। केएमआरसीएल के अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों को ऑक्सीजन की कमी कभी महसूस नहीं होगी।



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