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कैलाश पर्वत के अनसुलझे रहस्‍य

तिब्‍बत और भारत में फैली कैलाश पर्वतमालाओं में से एक है कैलाश पर्वत। मान्‍यता है कि भगवान शिव कैलाश पर्वत पर वास करते हैं। किवदंती है कि इस पवित्र स्‍थान पर भगवान शिव माता पार्वती और अपने वाहन नंदी के साथ गहन तपस्‍या में लीन रहते हैं।

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इसके अलावा बौद्ध और जैन धर्म को मानने वाले लोगों का कहना है कि इस स्‍थान पर इन धर्मों के प्रचारक ऋषभ को शिक्षा प्राप्‍त हुई थी। इस पर्वतमाला पर कई तरह की रहस्‍मयी क्रियाओं के बारे में बताया जाता है। सबसे खास बात है कि आज तक कैलाश पर्वत की चढ़ाई कोई नहीं कर पाया है।

दक्षिण का कश्मीर-लांबासिंगी

कहा जाता है कि कोई भी नश्‍चर वस्‍तु कैलाश पर्वत के शिखर तक नहीं पहुंच सकती है। आज तक जिसने भी भगवान के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत की चढ़ाई की उसे मृत्‍यु प्राप्‍त हुई है। चलिए भगवान शिव के इस धाम के बारे में और भी रहस्‍यमयी बातों के बारे में जानते हैं।

तेजी से बढ़ता है समय

तेजी से बढ़ता है समय

इस पवित्र पर्वत की चढ़ाई करने वाले लोगो ने दावा किया है कि इस पर चढ़ाई के दौरान बड़ी तेजी से उनके बाल और नाखून बढ़ने लगे थे। जहां सामान्‍य तौर पर बालों और नाखूनों को बढ़ने में 2 सप्‍ताह का समय लगता है वहीं कैलाश पर्वत की चढ़ाई के दौरान मात्र 12 घंटे में ही बाल और नाखून बढ़ने लगते हैं। कहा जाता है कि पर्वत की हवा के कारण उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।PC: unknown

रोज बदलती है स्थिति

रोज बदलती है स्थिति

ग्‍यारहवीं शताब्‍दी में तिब्‍बती बौद्ध भिक्षु मिलारेपा ही कैलाश पर्वत्‍ के शिखर तक पहुंचने में सफल हो पाए थे। कहा जाता है कि इसके बाद कैलाश पर्वत की स्थिति बदल गई जिसके कारण पर्वतारोही भ्रमित होते हैं।

खराब मौसम या अन्‍य किसी कारण से कभी भी ट्रैकर्स इस पर्वत पर अपनी यात्रा पूरी नहीं कर पाए हैं और कुछ लोग तो कभी वापिस ही नहीं लौटे। आजतक इस पर्वत पर किए गए सभी ट्रैक अधूरे और असफल रहे हैं।PC: unknown

दुनिया का केंद्रीय अर्ध है

दुनिया का केंद्रीय अर्ध है

रूस और अमेरिका द्वारा किए गए कई शोध और अध्‍ययन में ये बात सामने आई है कि इस पर्वत शिखर पर ही दुनिया का केंद्र है और इसे अक्ष मुंडी के नाम से जाना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि ये दुनियाभर की अनेक इमारतों से जुड़ी हुई जैो स्‍टोनहेंगे जोकि इससे 6666 किमी दूर हैं और उत्तरी ध्रुव भी यहां से 6666 दूर है एवं शिखर से दक्षिणी ध्रुव भी 13332 किमी दूर है।

वेदों में कैलाश पर्वत को ब्रह्मांड का अक्ष और विश्‍व वृक्ष कहा गया है एवं इसी बात का जिक्र रामायण में भी किया गया है।
PC: wikimedia.org

धरती और स्‍वर्ग के बीच रहस्‍यमयी संबंध

धरती और स्‍वर्ग के बीच रहस्‍यमयी संबंध

कैलाश पर्वत के परिधि के अनुसार ही चार मुख हैं। वेदों के अनुसार यह पर्वत स्‍वर्ग और धरती के बीच की कड़ी है। हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों का विश्‍वास है कि ये पर्वतमाला स्‍वर्ग का दरवाज़ा है। पांडवों के साथ-साथ द्रौपदी को भी इसी पर्वत की चढ़ाई करते समय मोक्ष की प्राप्‍ति हुई थी और इसी की चढ़ाई के दौरान उन सभी की एक-एक करके मृत्‍यु हो गई थी।pc:official site

ऊं पर्वत और स्‍वास्तिक का आकार

ऊं पर्वत और स्‍वास्तिक का आकार

सूर्य के स्थिर होने पर पर्वत पर एक परछाई बनती है जोकि धार्मिक चिह्न स्‍वास्तिक की तरह दिखाई देता है। हिंदू धर्म में इसे अत्‍यंत शुभ चिह्न माना जाता है। इसके अलावा पर्वत पर गिरती बर्फ से ऊं का आकार बनता है। ये भी एक रहस्‍य ही है।PC: Sreejithk2000

मानव निर्मित पिरामिड

मानव निर्मित पिरामिड

रूस के शोधकर्ताओं का मानना है कि कैलाश पर्वत कोई पर्वत नहीं है बल्कि यह प्रकृति की एक रहस्‍यमयी घटना है। पर्वत का पूरा शिखर कैथेडरल की आकृति बनाता है और इसके पक्ष लंबवत रहते हैं जोकि दिखने में पिरामिड जैसे लगते हैं।pc:official site

झीलों का अनोखा आकार

झीलों का अनोखा आकार

कैलाश पर्वत पर आपको दो झील मानसरोवर और राक्षस ताल मिलेंगें। मानसरोवर झील गोल आकार की है और ये सूर्य को दर्शाती है जबकि राक्षस ताल अर्धचंद्र आकार में बनी है। ये दोनों झीलें सकारात्‍मक और नकारात्‍मक ऊर्जाओं को दर्शाती हैं। खास बात ये है कि एक ही स्‍थान पर होने के बावजूद मानसरोवर झील का पानी मीठा है और राक्षस ताल का पानी नमकीन है।PC: Krish Dulal

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