
भारत का इतिहास कितना पुराना है और कितना गहरा, इसका अंदाजा आज तक कोई लगा नहीं सका। यहां धर्म और इतिहास का एक ऐसा समायोजन देखने को मिलता है, जहां आकर पर्यटक भी आश्चर्य में पड़ जाते हैं। दक्षिण के मंदिरों की बात की जाए तो उनकी कारीगरी की आज भी दाद दी जाती है कि कितनी बारिकी से उन्होंने उन मंदिरों को बनवाया। कुछ ऐसे ही हमारे देश के ऐतिहासिक स्थल भी हैं, जिन्हें देखने के बाद हर पर्यटक के मुंह से बस एक ही बात निकलती कि कितनी जबरदस्त कारीगरी है? क्या वास्तुकला है? आखिर इसे कैसे बनाया गया होगा?

हुमायूं का मकबरा
कुछ ऐसा ही है हमारे देश के राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित हुमायूं का मकबरा। इसकी कारीगरी और कारीगरी में की गई बारिकियां देखने के लिए काफी-काफी दूर से लोग आते हैं। अब हुमायूं का मकबरा है तो जाहिर है कि ये मुगल शासक हुमायूं की कब्र है। लेकिन क्या आपको पता है कि यहां पर सिर्फ हुमायूं की ही कब्र नहीं बल्कि कई और कब्रें भी हैं। जी हां, यहां पर हुमायूं के अलावा उसकी बेगम हमीदा बानो, शाहजहां के ज्येष्ठ पुत्र दारा शिकोह, मुगल सम्राट जहांदर शाह, फर्रुख्शियार, रफी उल-दर्जत, रफी उद-दौलत एवं आलमगीर द्वितीय की कब्रें भी मौजूद है। इसे मुगलों का शयनागार भी कहा जाता है, यहां छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 150 कब्रें है। इनमें से कईयों के बारे में आज तक जानकारी नहीं मिल पाई है।

8 सालों में बनकर तैयार हुआ था 'हुमायूं का मकबरा'
यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल हुमायूं का मकबरा (साल 1993) 8 वर्षों में बनकर तैयार हुआ था। इसे साल 1562 ई. में हुमायूं के पुत्र महान सम्राट अकबर के संरक्षण और उनकी विधवा बेगम हमीदा बानो के आदेशानुसार बनाया गया था। इसे बनाने में लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। ये मकबरा मुगल वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसे चारबाग शैली में बनाया गया है। इसी के तर्ज पर ताजमहल भी बनाया गया है। इस शानदार इमारत को बनाने के लिए अफगानिस्तान के प्रसिद्ध वास्तुकार सैयद मुबारक इब्न मिराक घियाथुद्दीन और उसके पिता मिराक घियाथुद्दीन क विशेष रूप से बुलाया गया था, जिनकी कारीगरी आज भी इस भवन के माध्यम से देखी जा सकती है। 27.04 हेक्टेयर में बना यह भारतीय उपमहाद्वीप का पहला उद्यान-मकबरा था, जिसकी झलक आज हजारों जगहों पर देखने को मिल जाती है।

'हुमायूं का मकबरा' की बनावट
बाहर से देखने पर ये मकबरा काफी सरल दिखता है, लेकिन जैसे ही आप अंदर की ओर जाएंगे तो आपको ये मकबरा अपनी खूबसूरती से आकर्षित करता है। इसमें मुख्य कक्ष समेत 9 वर्गाकार कक्ष बने हैं। इसका प्रवेश दक्षिण की ओर एक ईवान से होता है, वहीं बाकी के अन्य प्रवेश द्वारों के ईवानों में श्वेत संगरमरमर की जाली लगी हैं। हुमायूं की समाधि ठीक नीचे आंतरिक कक्ष में बनी है, जिसका रास्ता बाहर से जाता है। इसके ठीक ऊपर दिखावटी किन्तु सुन्दर प्रतिकृति बनाई गई है, जो देखने लायक बनती है। आम पर्यटकों को इमारत के निचले हिस्से में जाने पर रोक है, आप इसे ऊपर से ही देख सकते हैं। इस इमारत को बनाने में पीट्रा ड्यूरा नामक संगरमरमर की पच्चीकारी का प्रयोग हुआ है, जो भारतीय-इस्लामिक स्थापत्यकला का महत्त्वपूर्ण अंग हैं। इसका प्रयोग बाकी के मुगल इमारतों में भी आपको देखने को मिल जाएगा, जैसे - ताजमहल, बीबी का मकबरा, जामा मस्जिद इत्यादि।

हुमायूं का मकबरा कैसे पहुंचें?
यूं तो आप सभी दिल्ली गए होंगे, हो सकता आपने हुमायूं के इस मकबरे को देखा भी हो और अगर ना देखा है तो अब जरूर देख लीजिए। मुगलों के इतिहास से रूबरू होने के लिए दिल्ली के इस मकबरे तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा दिल्ली में ही है। वहीं, मकबरे में पास में ही दिल्ली का हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन भी है। इसके अलावा आप यहां आसानी से सड़क मार्ग से भी आ सकते हैं।



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