हैदराबाद, तेलंगाना की राजधानी और दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण शहर। नवाबों के इस शहर की बात ही अलग है। हैदराबाद उन चुनिंदा शहरों में से एक है, जो एक प्रमुख पर्यटन स्थल होने के साथ-साथ ऐतिहासिक भी है। इसके साथ ही भारत की आजादी के अध्याय में भी हैदराबाद की एक अलग ही जगह है। क्या आप जानते हैं, भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था लेकिन हैदराबाद को आजादी 17 सितंबर 1948 को मिली थी।
लेकिन आज हैदराबाद भारत के हर एक हिस्से के साथ आजादी के जश्न में बराबरी की हिस्सेदारी रखता है। तभी तो स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त और उससे पहले व बाद तक हैदराबाद की कई प्रमुख जगहें तिरंगा की रोशनी से जगमगाती रहती हैं।

15 अगस्त 1947 को जब भारत आजादी के जश्न में डूबा हुआ था, उस समय हैदराबाद पर निजाम का शासन था। भारत को आजादी मिलने के 13 महीनों बाद 'ऑपरेशन पोलो' के जरिए हैदराबाद को निजाम से आजादी मिल सकी। कहा जाता है कि इस लड़ाई में कई जवानों ने अपनी जान भी गंवा दी थी।

15 अगस्त को आजादी के साथ-साथ आज भी हैदराबाद 17 सितंबर को 'हैदराबाद मुक्ति दिवस' के रूप में मनाता है।

15 अगस्त 1947 को जब भारत को आजादी मिली उस समय हैदराबाद पर निजाम मीर उस्मान अली शाह का शासन था।

निज़ाम हैदराबाद को भारत में ना मिलाकर एक स्वतंत्र देश बनाना चाहते थे। लेकिन 13 सितंबर 1948 को तत्कालिन गृहमंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल ने हैदराबाद को भारत में शामिल करवाने के लिए सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी, जिसका कोड नाम 'ऑपरेशन पोलो' था।

सैन्य कार्रवाई शुरू होने के 5 दिनों के अंदर ही निज़ाम ने भारतीय सेना के सामने अपने घुटने टेक दिये और आत्मसमर्पण कर हैदराबाद को भारत में शामिल करने के लिए राजी हो गये।

तिरंगे के रंगों वाली रोशनी से जगमगाता तेलंगाना के मुख्यमंत्री का कैम्प ऑफिस।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शानदार तरीके से सजाया गया उस्मानिया विश्वविद्यालय।



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