पिछले कुछ दिनों से हैदराबाद का कांचा गाचीबोवली (Kancha Gachibowli) सुर्खियों में छाया हुआ है। इसे हैदराबाद शहर का फेफड़ा कहा जाता है। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी परिसर के पास लगभग 400 एकड़ में फैला हुआ है यह शहरी जंगल। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यहां पिछले सप्ताह IT पार्क का निर्माण करने के लिए पेड़ों की व्यापक कटाई की गयी है।
सोशल मीडिया पर भी ऐसे कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिसमें रात के अंधेरे में बुलडोजर से पेड़ों को काटते हुए और मोर, हिरण आदि कई तरह के पशु-पक्षियों की चीखें शांति को भंग करती हुई दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो कांचा गाचीबोवली का ही है। (हालांकि इन वीडियो के सत्यता की जांच नहीं की गयी है।)

क्यों हैदराबाद के लिए इतना महत्वपूर्ण माना जा रहा है कांचा गाचीबोवली का शहरी जंगल? क्या इस वन क्षेत्र में सिर्फ मोर और हिरण ही रहते हैं या दूसरी प्रजातियों के पशु-पक्षियों का भी यहां बसेरा है?
शहर के बीच में मौजूद एक शांत जंगल
हैदराबाद यूनिवर्सिटी परिसर के पास विशाल क्षेत्र में फैला हुआ यह जंगल इस शहर की इको सिस्टम का एक अभिन्न हिस्सा माना जाता है। हैदराबाद शहर, जो विकसित तो हो रहा है लेकिन इसके साथ ही तेजी से कंक्रीट के जंगल में भी तब्दील होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में कांचा गाचीबोवली, यहां के पुराने वृक्ष, प्राकृतिक घास के मैदान और हैदराबाद शहर को ठंडा रखने में बड़ी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
The Better India की मीडिया रिपोर्ट की मानें तो हैदराबाद के कांचा गाचीबोवली में लगभग 700 प्रजातियों के फूलों के पौधे होने की जानकारी कागजातों में दर्ज है, जिनमें पलाश के फूल, जमीन पर उगने वाले ऑर्किड और चमेली के जंगली फूल भी शामिल हैं। यहां सिर्फ हिरण या मोर ही नहीं बल्कि कई और तरह के पशु-पक्षियों का भी बसेरा है।

कौन से पशु-पक्षियों का है बरेसा?
बताया जाता है कि हैदराबाद के कांचा गाचीबोवली में लगभग 220 प्रजातियों के पक्षी रहते हैं, जिसमें इंडियन रोलर भी शामिल है जो तेलंगाना का राष्ट्रीय पक्षी है। वहीं कुछ खास मौसमों के दौरान कांचा गाचीबोवली में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी भी यहां आकर अपना डेरा डालते हैं।

कांचा गाचीबोवली में जो प्रमुख प्रजातियां रहती हैं -
- हैदराबाद ट्री ट्रंक मकड़ी - यह मकड़ी की विलुप्त हो रही एक प्रजाति है, जो दुनिया में और कहीं नहीं पायी जाती है।
- इंडियन रोलर - चटख नीले रंग का पक्षी, जो तेलंगाना का राष्ट्रीय पक्षी है।
- ओरिएंटल स्काईलार्क - अपनी मधुर चहचहाहट की वजह से यह पक्षी बड़ा लोकप्रिय है।
- चित्तीदार हिरण - यह हिरण की सबसे ज्यादा दिखाई देने वाली प्रजाति है।
- जंगली सुअर - यह अक्सर गहरे जंगली क्षेत्रों में दिखाई देता है।
- साही - यह बड़े शर्मीले स्वभाव के होते हैं और जहां हरी घास ज्यादा उगती है, वहीं पाए जाते हैं। खतरा महसूस होने पर अपने शरीर के कांटों को फुला कर अपना बचाव करते हैं।
- मॉनिटर लिजर्ड - विशाल आकार की छिपकली, जो जंगलों में साफ-सफाई का काम बड़े प्यार से करती है।
- कांस्य रंग वाले पेड़ों पर रहने वाले सांप - कांचा गाचीबोवली के पेड़ों पर अक्सर कांसा के रंग वाले सांप पेड़ों पर दिखाई देंगे जिनमें जहर नहीं होता है।

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कांचा गाचीबोवली की वजह से हैदराबाद में गर्मी का प्रकोप काफी हद तक कम रहता है। अध्ययन में पता चला है कि इस शहरी जंगल की वजह से हैदराबाद के शहरी क्षेत्रों का तापमान लगभग 1.4 डिग्री सेल्सियस तक कम रहता है जिससे यहां रहने वाले लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल पाती है। इसके अलावा यह क्षेत्र हवा को शुद्ध बनाने, मिट्टी का कटाव रोकने और भूजल का स्तर वापस लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।



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