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वैशाली जाएं तो आसपास के इन दर्शनीय स्थानों पर जरूर घूमें, दिखेगा भारत का समृद्ध इतिहास

बिहार का एक छोटा सा गांव वैशाली जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां विश्व का सबसे पहला गणतंत्र स्थापित किया गया था। भगवान महावीर की जन्मस्थली होने की वजह से जैन धर्मावलंबियों के लिए वैशाली एक प्रमुख तीर्थ स्थान है।

vaishali

भगवान बुद्ध की यह कर्मभूमी भी रही है। राजधानी पटना से कुछ दूरी पर ही स्थित वैशाली में आकर आपको भारत के समृद्ध इतिहास की झलक मिलेगी।

आइए आपको वैशाली के समृद्ध इतिहास के बारे में बताते हैं

विश्व का पहला गणतंत्र

vaishali

वैशाली का नाम महाभारत काल के महान राजा विशाल के नाम पर पड़ा है। वैशाली के बारे में माना जाता है कि यहां विश्व का पहला गणतंत्र स्थापित हुआ था। वैशाली पर लिच्छवी वंश के राजाओं ने शासन किया था जिनका साम्राज्य नेपाल की तराई तक फैला हुआ था। वैशाली पर मगध के राजा अजातशत्रु ने अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया जिसके बाद वैशाली ने धीरे-धीरे अपनी महिमा खो दी।

भगवान बुद्ध ने दिया था आखिरी प्रवचन

वैशाली को बौद्ध धर्म में काफी ज्यादा महत्व मिला हुआ है। कहा जाता है कि यहां भगवान बुद्ध का तीन बार आगमन हुआ था। इसलिए यह गौतम बुद्ध की कर्मभूमि है। इतना ही नहीं, नगरवधु आम्रपाली की सुन्दरता के लिए वैशाली आस-पास के सभी राज्यों में काफी प्रसिद्ध भी रहा है। लेकिन आम्रपाली ने भगवान बुद्ध की शरण में जाकर बौद्ध भिक्षु बनने का निर्णय लिया और उसे स्वयं भगवान बुद्ध ने उपदेश प्रदान किया।

shanti stupa vaishali

भगवान बुद्ध ने वैशाली में ही निर्वाण की घोषणा की थी। वैशाली के पास जैन धर्म के आखिरी तीर्थंकर महावीर का जन्म कुंडुपुर में पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला के घर हुआ था। त्रिशला वैशाली के राजा चेतक की बहन थी। भगवान महावीर ने काफी साहस दिखाया और अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद वैशाली में एक अशोक के पेड़ के नीचे महज 2 दिनों के उपवास के बाद जीवन त्याग दिया।

वैशाली के आसपास के दर्शनीय स्थल

विश्व शांति स्तूप

shanti stupa

वैशाली में स्थित विश्व शांति स्तूप का निर्माण जापान के बौद्ध समुदाय द्वारा करवाया गया है। गोल घुमावदार गुम्बद, सीढ़ियां और सीढ़ियों के दोनों ओर सुनहरे रंग के शेर मानो शांति स्तूप की रखवाली कर रहे हैं। सीढ़ियों के ठीक सामने ध्यानमग्न मुद्रा में भगवान बुद्ध की प्रतिमा दिखायी देती है।

अभिषेक पुष्करणी तालाब

abhishek pushkarini lake

करीब ढाई हजार साल पहले प्राचीन वैशाली गणराज्य द्वारा बनवाया गया सरोवर है। मान्यता है कि वैशाली गणराज्य में जब भी कोई नया राजा या शासक निर्वाचित होता था, उसका अभिषेक इसी तालाब के पानी से करवाया जाता था। इस तालाब में अब बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। तो अगर आप वैशाली जाते हैं तो अभिषेक पुष्करणी तालाब में बोटिंग और तालाब में खीले कमल के फूलों को देखना बिल्कुल मत भूले।

अशोक स्तंभ

Ashoka Stambha

आमतौर पर भारत में जितनी जगहों में अशोक स्तंभ मिले हैं, उन्हें खंडित कर म्यूजियम में सुरक्षित रखा गया है। लेकिन वैशाली में आपको खुले आसमान के नीचे सिर उठाए सीधा तनकर खड़ा अशोक स्तंभ देखने को मिलेगा। इस स्तंभ का निर्माण सम्राठ अशोक ने वैशाली में महात्मा बुद्ध के अंतिम उपदेश की याद में करवाया था।

इस स्तंभ का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने अशोक स्तंभ के चारों तरह चहारदिवारी बनाकर इसे सुरक्षित किया है। इस स्तंभ के पास ही एक कुंड है जिसे स्थानीय लोग राम कुंड के नाम से पुकारते हैं।

बौद्ध स्तूप

budha stupa

भगवान बुद्ध की मृत्यु के बाद कुशीनगर के मल्ल शासक, जो भगवान बुद्ध के रिश्तेदार थे, ने उनके नश्वर शरीर का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया था। उनके पार्थिव शरीर के अस्थि अवशेष (राख) को 8 भागों में बांटा गया था जिसमें से एक भाग को वैशाली में लिच्छवियों को मिला था।

भगवान बुद्ध के शरीर की राख के एक हिस्से को वैशाली में बौद्ध स्तूप में सुरक्षित रखा गया, जिसके बारे में 1958 में खुदाई के बाद पता चला। यह स्तूप मिट्टी से निर्मित एक छोटा सा स्तूप था। बाद में मौर्य, शुंग और कुषाण काल में इसका परिवर्तन कर इसे लगभग 12 मिटर के व्यास तक बढ़ाया गया है।

कैसे पहुंचे वैशाली

वैशाली पहुंचने के सबसे अच्छा रास्ता मुजफ्फरपुर या हाजीपुर से प्राइवेट गाड़ी लेकर जाना है। इसके अलावा राजधानी पटना से आपको वैशाली तक जाने के लिए बस मिल जाएगी। ट्रेन से आने पर वैशाली का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हाजीपुर है जो वैशाली से 35 किमी की दूरी पर है। भारत के सभी बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, गोरखपुर से हाजीपुर तक की सीधी ट्रेन सेवाएं उपलब्ध है। अगर आप विमान से आते हैं तो आपको पटना आना पड़ेगा। पटना एयरपोर्ट से वैशाली के लिए आपको भाड़े पर गाड़ियां मिल जाएंगी।

FAQs
वैशाली जिले से होकर कौन सी नदी बहती है?

वैशाली जिले से होकर बुढ़ी गंडक नदी बहती है। हाजीपुर के समीप यह गंगा नदी में जाकर मिलती है।

वैशाली में क्या खास है?

इतिहास में वैशाली का उल्लेख कई बार किया गया है। वैशाली में दुनिया का पहला गणराज्य स्थापित हुआ था। वैशाली धार्मिक कारणों से भी काफी लोकप्रिय रही है। इसका संबंध जैन और बौद्ध धर्मों से रहा है।

वैशाली की स्थापना किसने की थी?

वैशाली की स्थापना लिच्छवी वंश द्वारा की गयी थी। यह दुनिया का पहला गणराज्य था।

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