अगले सप्ताह देश आजादी के 77 साल पूरे होने का जश्न मनाने वाला है। 15 अगस्त को छुट्टी है और अगर थोड़ा सा मैनेज किया जा सकें तो इस छुट्टी को आप एक लॉन्ग वीकेंड भी बना सकते हैं। लॉन्ग वीकेंड पर घर में बैठे रहना किसे पसंद है भला। तो क्यों न आसपास में ही कहीं घूम आया जाए। अगर आप बैंगलोर में रहते हैं तो आसपास की कई जगहों जैसे नंदी हिल्स, होसुर या हम्पी आदि तो जरूर घूमे होंगे।
इस बार पड़ोसी राज्य तमिलनाडु के एक ऐतिहासिक शहर से घूम आएं। ज्यादा दूर नहीं होने की वजह से आपको बैंगलोर से यहां पहुंचने में भी कोई खास परेशानी नहीं होगी और लास्ट मोमेंट प्लान बनाने के लिए भी यह शहर बिल्कुल परफेक्ट है। हम बात कर रहे हैं वेल्लोर की। उत्तर भारत से बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए अक्सर वेल्लोर जाते रहते हैं। क्यों न इस बार मन को ताजगी से भरने और थकान उतारने के लिए वेल्लोर की एक लॉन्ग वीकेंड ट्रिप का प्लान बनाया जाए।

कैसे बनेगा लॉन्ग वीकेंड
आप सोच रहे होंगे कि 15 अगस्त तो गुरुवार को है, फिर भला यह लॉन्ग वीकेंड कैसे हुआ। अरे जनाब, हमने पहले ही आपसे कहा है कि 15 अगस्त की छुट्टी को लॉन्ग वीकेंड बनाने के लिए आपको थोड़ा सा मैनेज करने की जरूरत होगी। अगर आप 16 अगस्त को ऑफिस से छुट्टी ले लेते हैं, तो यह एक लॉन्ग वीकेंड बन सकता है।
- 15 अगस्त (गुरुवार) - छुट्टी।
- 16 अगस्त (शुक्रवार) - छुट्टी लेना होगा।
- 17 अगस्त (शनिवार) - सप्ताहांत।
- 18 अगस्त (रविवार) - सप्ताहांत।
चलिए अब बताते हैं वेल्लोर की वो ऐतिहासिक जगहें जहां आप घूम सकते हैं -
वेल्लोर फोर्ट

इतिहासकारों का मानना है कि वेल्लोर किले का निर्माण 15वीं शताब्दी में चन्ना बोम्मी नायक और थिम्मा रेड्डी नायक के शासनकाल में हुआ था। यह किला दक्षिण भारत में सैन्य वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है। यह भारत के सबसे अनोखे किलों में गिना जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं वेल्लोर का किला अपने समयकाल का सबसे विशाल किला था।
कहा जाता है किले के मुख्य द्वार पर जो खाई बनी हुई है किसी जमाने में उस खाई में 10,000 मगरमच्छ तैरा करते थे, जो इस किले की सुरक्षा को सुनिश्चित करते थे। वेल्लोर किला सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक और सप्ताह के 7 दिन पर्यटकों के लिए खुला रहता है।
श्रीपुरम गोल्डेन टेम्पल

वेल्लोर के तिरुमलाईकोडी में स्थित श्रीपुरम गोल्डन टेम्पल एक शानदार धार्मिक स्थान है। इस मंदिर का उद्घाटन वर्ष 2007 में किया गया था। यह मंदिर लक्ष्मी नारायणी या देवी महालक्ष्मी को समर्पित है। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां सुबह और शाम को जलने वाले 'सहस्र दीपम' यानी 1000 दीये हैं। मंदिर में देवी के दर्शन करने के साथ-साथ श्रद्धालु मंदिर से सटे पार्क में कुछ समय रुककर ठंडी और ताजी हवा का भी आनंद उठा सकते हैं।
यह मंदिर साल के 365 दिन ही खुले रहते हैं। मंदिर में आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का समय सुबह 8 से रात को 8 बजे तक है। वहीं सुबह 4 से 8 बजे के बीच का समय अभिषेक और शाम को 6 से 7 बजे का समय आरती सेवा का होता है। दिव्य दर्शन सेवा के लिए ₹100 का शुल्क देना पड़ता है जो हर शनिवार और रविवार को होता है। पार्क में एंट्री निःशुल्क है।
मर्गबंदीश्वरा या विरिंजीपुरम मंदिर

वेल्लोर शहर से 14 किमी की दूरी पर बना है मर्गबंदीश्वरा या विरिंजीपुरम मंदिर। यह मंदिर पलार नदी के तट पर बना हुआ है। इतिहासकारों के मुताबिक चोल साम्राज्य के दौरान ही इस मंदिर का निर्माण किया गया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। वेल्लोर या सिर्फ आसपास के गांवों के लोग ही नहीं बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में शिवभक्त इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आते रहते हैं।
अभी सावन का महीना भी चल रहा है। अगर आप भी बेंगलुरु से वेल्लोर जाने का प्लान बनाते हैं, तो इस मंदिर में भगवान शिव के दर्शन जरूर कर लें। भगवान शिव के अलावा इस मंदिर में मरगदंभिकई, गणपति और भगवान ब्रह्मा एक बच्चे के रूप में यहां स्थापित हैं।

टीपू और हैदर महल
वेल्लोर किले के अंदर ये दोनों महल मस्ट विजीट की लिस्ट में आते हैं। कहा जाता है कि 16वीं सदी में विजयनगर के राजा ने इन दोनों महलों का निर्माण करवाया था। इन दोनों महलों का नाम 18वीं सदी में मैसूर पर शासन करने वाले टीपू सुल्तान और हैदर अली के नाम पर रखा गया है। हालांकि दशकों पुराने इन दोनों महलों पर पर्यावरण और मौसम की मार का असर साफ-साफ दिखाई देता है लेकिन अब इन दोनों महलों के रखरखाव की जिम्मेदारी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया कर रही है।



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