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स्वतंत्रता दिवस देख आएं मुंबई का ग्वालिया टैंक मैदान, जहां हुआ था 'भारत छोड़ो आंदोलन' का जन्म

भारत के हर कोने में आजादी के लिए कहीं नर्म दल तो कहीं गर्म दल द्वारा चलाये गये विभिन्न आंदोलनों की निशानियां मिलेंगी। हालांकि देश को स्वाधीनता दिलाने के लिए हर एक स्वतंत्रता संग्रामी के बलिदान का अपना महत्व है लेकिन कुछ ऐसे आंदोलन भी हुए जिन्होंने भारत में अंग्रेजों के पैर उखाड़ने में बड़ी भूमिका निभायी। इनमें से ही एक आंदोलन रहा 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement)।

इसे अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है। इस आंदोलन की शुरुआत मुंबई (तत्कालीन बम्बई) से हुई थी। 'भारत छोड़ो आंदोलन' को भारत की आजादी के लिए शुरू की गयी अंतिम लड़ाई कहा जाता है। महात्मा गांधी ने इस आंदोलन की नींव रखी थी, जिसने पूरे अखंड भारतवर्ष को एकजुट किया था और ब्रिटिश हुकूमत को भारतीय स्वतंत्रता संग्रामियों के सामने घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था।

august kranti maidan

क्यों शुरू हुआ था 'भारत छोड़ो आंदोलन'

वर्ष 1942 की बात है, जब दूसरा विश्वयुद्ध लड़ा जा रहा था। भारत की मदद से अंग्रेजों ने भी यह युद्ध लड़ा और बदले में उन्होंने भारत को आजादी देने का वादा किया था। लेकिन अंग्रेज तो अंग्रेज ठहरे, वे भला अपना वादा कब निभाने वाले थे। उन्होंने भारत को आजाद करने से इंकार कर दिया।

बस फिर क्या था, 4 अगस्त 1942 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस समिति के बम्बई सत्र में इस आंदोलन का प्रस्ताव रखा गया जिसे पारित भी किया गया। हालांकि तथ्यों के अनुसार इस प्रस्ताव का भी कुछ लोगों ने विरोध किया था। लेकिन अधिकांश लोगों ने इस आंदोलन के पक्ष में ही अपना मत दिया था।

ग्वालिया पार्क में हुआ था इस आंदोलन का जन्म

8 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वालिया मैदान में महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ 'करो या मरो' का नारा देते हुए भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की थी। ग्वालिया नाम दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है - गऊ और वाला। दरअसल, कहा जाता है कि यह मैदान एक विशाल तालाब को भरकर बनाया गया था। इस तालाब पर ही गाएं पानी पीने के लिए आया करती थी।

लेकिन जब इसे भरकर मैदान बना दिया गया तो इसका नाम ग्वालिया टैंक मैदान रखा गया। 8 अगस्त 1942 को इस मैदान में जिस सभा का आयोजन किया गया था, उसे महात्मा गांधी ने संबोधित किया था। उन्हें सुनने के लिए 40,000 लोग जमा भी हुए थे। 9 अगस्त को मैदान में जवाहरलाल नेहरु अपनी बात रखने वाले थे। महात्मा गांधी शाम को शिवाजी पार्क में एक सभा को संबोधित करने वाले थे लेकिन 9 अगस्त को उन्हें और पंडित नेहरु समेत अन्य कई प्रमुख क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया।

august kranti maidan mumbai

नामी क्रांतिकारियों के गिरफ्तार होने के बाद मोर्चा युवाओं ने संभाला और कहा जाता है कि ग्वालिया मैदान में सबसे पहले अरुणा असफ अली नामक एक युवक ने तिरंगा फहराकर इस अभियान की शुरुआत की।

अंग्रेजी हुकुमत के ताबूत का आखिरी कील

दूसरे विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजों की हालत काफी खराब हो गयी थी। जब पूरे भारत में अहसयोग आंदोलन के साथ भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई तो इस धक्के से अंग्रेज उबर नहीं सकें। इसलिए कहा जाता है कि 'भारत छोड़ो आंदोलन' ने अंग्रेजी हुकूमत की ताबूत में आखिरी कील ठोक दिया था। इस आंदोलन के बाद ही ग्वालिया टैंक मैदान को अगस्त क्रांति मैदान के नाम से भी जाना जाने लगा।

BMC ने किया सुन्दरीकरण

वर्ष 2022 में बृहन्मुंबई नगरनिगम (BMC) ने करीब 32 करोड़ रुपए की लागत से ग्वालिया टैंक मैदान या अगस्त क्रांति मैदान का सुन्दरीकरण किया। इसी साल भारत ने आजादी के 75 सालों का जश्न मनाया और भारत छोड़ो आंदोलन ने भी अपने 80 साल पूरे किये थे। इस परियोजना में मैदान में मेमोरियल वाल, 2 किमी लंबा फ्रीडम ट्रेल - जिसकी शुरुआत मैदान के बाहर से हुआ और गिरगांव चौपाटी पर खत्म होता है।

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