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निजामों के शहर पहुंचीं इवांका ट्रम्प ,चखेंगी बिरयानी और घूमेंगी चारमीनार

Written By: Goldi

निजामों की नगरी हैदरबाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बेटी इवांका ट्रम्प तीन दिन की ग्लोबल आंत्रप्रेन्योरशिप समिट में पहुंचीं हैं। तीन दिन के लिए भारत दौरे पर आईं इवांका हैदराबाद में GES कार्यक्रम को होस्ट करती हुई नजर आएंगी। इवांका ट्रंप के पहुंचने से पहले ही शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

इस साल GES कार्यक्रम में 10 से ज्यादा देश भाग ले रहे हैं और इसमें सभी देशों की प्रतिनिधि महिलाएं ही हैं। यहां तक कि सऊदी अरब, अफगानिस्तान और ईजराइल के प्रतिनिधि भी महिलाएं हैं। इस कार्यक्रम में कई महिला प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगी। इसके अलावा कार्यक्रम को होस्ट करने वाली डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप करीब 1,500 उद्यमियों को संबोधित करती हुई नजर आएंगी। वे 'वुमन आंत्रप्रेन्योरियल लीडरशिप' सब्जेक्ट पर स्पीच देंगी। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी भी शिरकत करेंगे। कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी इवांका से मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी के लिए हैदराबाद के फलकनुमा पैलेस में डिनर होस्ट करेंगे।

अब आप सोच रहे होंगे की ट्रेवल की साईट पर इवांका के आने का पूरा ब्यौरा क्यों दिया जा रहा है, तो जनाब हम इसक ब्यौरा इसलिए दे रहे हैं क्योंकि समिट खत्म होने के बाद इवांका हैदराबाद दर्शन पर निकलेंगी। जैसा कि, आपने ऊपर पढ़ा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इवांका को हैदराबाद के प्रतिष्ठित फलकनुमा पैलेस में डिनर होस्ट करेंगे। इसी के साथ इवांका हैदराबाद की कुछ ऐतिहासिक जगहों की सैर भी करेंगीं...हैदराबाद में घूमने लायक कई स्थान हैं, और यह पर्यटकों के साथ-साथ इतिहासकारों के बीच भी काफी लोकप्रिय है। हैदराबाद और आसपास के कुछ महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में चारमीनार, गोलकुंडा किला, सलार जंग संग्रहालय और हुसैन सागर झील शामिल है।

चारमीनार

चारमीनार

हैदराबाद की खास पहचान माने जाने वाले चारमीनार को मोहम्मद कुली कुतुब शाही ने 1591 में बनवाया था। आज इस ऐतिहासिक इमारत ने पूरे विश्व में चर्चा हासिल की है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि चार मीनार का शाब्दिक अर्थ होता है- चार टॉवर। यह भव्य इमारत प्रचीन काल की उत्कृष्ट वास्तुशिल्प का बेहतरीन नमूना है। इस टॉवर में चार चमक-दमक वाली मीनारें हैं, जो कि चार मेहराब से जुड़ी हुई हैं। मेहराब मीनार को सहारा भी देता है।PC:Creatographer

फलकनुमा महल

फलकनुमा महल

फलकनुमा महल की डिजाइन एक अंग्रेज वास्तुकार ने तैयार की थी और इसका निर्माण कार्य 1884 में शुरू हुआ था। पहले इस महल का संबंध हैदराबाद के तत्कालीन प्रधानमंत्री विकार उल उमरा से था। बाद में इस महल को निजामों को दे दिया गया। इस महल का नामकरण उर्दू के एक शब्द पर किया गया है जिसका अर्थ होता है आकाश का प्रतिबिंब। फलकनुमा महल चारमिनार से 5 किमी दूर है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।PC: Bernard Gagnon

गोलकुंडा किला

गोलकुंडा किला

गोलकुंडा किला हैदराबाद से सिर्फ 11 किमी दूर है। 15वीं शताब्दी में गोलकुंडा चकाचौंध भरी जिंदगी जी रहा था। हालांकि अब यहां सिर्फ गौरवशाली अतीत के खंडहर ही देखने को मिलते हैं। इस किले को कुतुब शाही वंश के शासकों ने बनवाया था, जिन्होंने यहां 1512 से शासन किया। किले में सबसे ज्यादा योगदान इब्राहिम कुली कुतुब शाह वली ने दिया। इस किले को उत्तरी छोर से मुगलों के आक्रमण से बचने के लिए बनाया गया था।PC: Bernard Gagnon

बिड़ला मंदिर

बिड़ला मंदिर

बिड़ला मंदिर हैदराबाद के बिड़ला तारामंडल के पास है। यह मंदिर नौबाथ पहाड़ पर बना है और हिंदूओं, खासकर भगवान वेंकटेश्वर के भक्तों के बीच काफी पूजनीय है। इस मंदिर को बनने में 10 साल का समय लगा था और यह रामकृष्ण मिशन के स्वमी रंगनाथनंद द्वारा अधिकृत था।इस मंदिर की खासियत यह है कि इसे सिर्फ सफेद संगमरमर से बना था, जिसे विशेष रूप से राजस्थान से लाया गया था। इस मंदिर की ख़ास बात ये है कि यहां कोई घंटी नहीं है।PC:ambrett

रामोजी फिल्म सिटी

रामोजी फिल्म सिटी

रामोजी फिल्म सिटी हैदराबाद के बाहरी क्षेत्र मे स्थित है। यहां सिर्फ फिल्म और सीरियल्स की शूटिंग ही नहीं होती है, बल्कि यह पिकनिक मनाने, थीम आधारित पार्टी, कार्पोरेट इवेंट, भव्य विवाह, ऐडवेंचर कैंप, कांफ्रेंस और हनीमून के लिए भी आदर्श स्थान है। रामोजी फिल्म सिटी में विश्व का सबसे बड़ा स्टूडियो है और यह गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस में भी दर्ज है। रामोजी फिल्म सिटी फिल्म निर्माण की सभी नवीन तकनीकों और उपकरणों से लैस है।PC:Vinayaraj

हुसैन सागर झील

हुसैन सागर झील

हैदराबाद के भूगोल और इतिहास में हुसैन सागर झील का विशेष महत्व है। इस मानव निर्मित झील को हजरत हुसैन शाह वली ने 1562 में बनवाया था। यह झील मूसी नदी की एक सहायक नदी पर बनी है। इस झील को बनाने का मूल उद्देश्य शहर को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था। इस झील की खासियत यह है कि यहां वर्ष भर पानी रहता है और साथ ही यह हैदराबाद और सिकंदराबाद को जोड़ने का भी काम करती है। झील के चारों ओर प्रसिद्ध नेकलेस रोड है जो रात में किसी हार में लगे हीरे की तरह चमचमाता है।PC: Sankarshansen

 उसमान सागर झील

उसमान सागर झील

उसमान सागर झील, स्थानीय लोगों द्वारा उसमान सागर झील को गांदीपेट कहा जाता है। हुसैन सागर की तरह ही यह भी एक मानवनिर्मित झील है। इसे मूसी नदी पर बनाए जा रहे एक बांध के निर्माण के दौरान बनवाया गया था। इस झील को 1920 में बनवाया गया था और तब से लेकर आज तक यह हैदराबाद और आसपास के गांवों को पीने का पानी मुहैय्या कराता रहा है।PC:Sankarshansen

निजाम संग्रहालय

निजाम संग्रहालय

हैदराबाद आने वाले पर्यटकों की सूचि में निजाम संग्रहालय का नाम जरूर होता है। यह संग्रहालय निजाम के महल का हिस्सा है और यहां पेटिंग, ज्वेलरी, गिफ्ट, हथियार और प्रचीन कार सहित ऐतिहासिक महत्व की कई चीजें रखी गई हैं। यहां प्रदर्शनी के लिए रखी गई ज्यादातर चीजें मूल रूप से निजामों को मिले उपहार हैं। साथ ही कालांतर में उनके द्वारा एकत्रित की गई निशानियों को भी यहां रखा गया है।
PC: Randhirreddy

चौमहला महल

चौमहला महल

चौमहला महल का संबंध हैदराबाद के निजाम से है और यह आसिफ जाही का आधिकारिक निवास स्थान था। इस महल का नाम फारसी शब्द चहार और महालात पर पड़ा है, जिसका अर्थ होता है चार महलें। यह महल ईरान के शाह महलों की तर्ज पर बनाया गया है। इसका निर्माण कार्य 18वीं शताब्दी में शुरू हुआ था और इसे बनाने में करीब 10 साल का समय लगा। इसी लिए इस महल के वास्तुशिल्प और डिजाइन में कई शैली का प्रभाव नजर आता है।PC:Master purav

हयात बख्शी बेगम मस्जिद

हयात बख्शी बेगम मस्जिद

हयात बख्शी बेगम मस्जिद को हयात बख्शी मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। हैदराबाद के मुसलमानों में इस मस्जिद का विशेष धार्मिक महत्व है। इस मस्जिद के निर्माण का काम गोलकुंडा के पांचवें सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह के शासन काल में शुरू किया गया था और यह 1672 में बनकर तैयार हुआ था। कुतुब शाही परिवार के अन्य निर्माणों की तरह ही इस मस्जिद का निर्माण भी कुतुब शाही शैली में कया गया है।PC: J.M.Garg

दुर्गम चेरुवू

दुर्गम चेरुवू

हैदराबाद के पास रंगरेड्डी जिले में स्थित दुर्गम चेरुवू एक ताजे पानी का झील है। इसी गुप्त झील भी कहते हैं, क्योंकि यह जुबली हिल्स और माधापुर क्षेत्र में काफी छुपा हुआ है। हैदराबाद के लोगों में इस झील का ऐतिहासिक महत्व है क्योंकि कुतुब शाही वंश के दौरान गोलकुंडा किले के आसपास रहने वाले लोगों को इस झील के जरिए पीने का पानी उपलब्ध होता था। साथ ही किसान झील के पानी का इस्तेमाल सिंचाई के उद्देश्य से करते थे।PC:Nishantshah

मक्का मस्जिद

मक्का मस्जिद

मक्का मस्जिद हैदराबाद का न सिर्फ सबसे पुराना मस्जिद है, बल्कि यह देश का सबसे बड़ा मस्जिद भी है। मुस्लिमों के बीच इसका विशेष धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ इसका ऐतिहासिक महत्व भी है और यह राज्य सरकार द्वारा संरक्षित एक धरोहर स्थल भी है। चूंकि मक्का मस्जिद चारमीनार और चौमहला महल जैसी ऐतिहासिक इमारत के पास है, इससे एक पर्यटन स्थल के रूप में इन्होंने काफी चर्चा हासिल की है। मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने 16वीं शताब्दी में इस मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू किया था।PC: Iamriyaaz

 शिल्परमम

शिल्परमम

माधापुर में हाईटेक सिटी के पास स्थित शिल्परमम एक जाना माना कला और शिल्प का गांव है। हैदराबाद से 20 किमी दूर बसा यह गांव पूरी तरह से कला और शिल्प को समर्पित है, जिससे यह न सिर्फ आंध्र प्रदेश में बल्कि पूरे देश में जाना जाता है। इस गांव को बसाने का उद्देश्य भारत की परंपरागत शिल्प को संरक्षण प्रदान करना था। इस बात को ध्यान में रखते हुए शिल्परमम में पूरे साल उत्सवों का आयोजन किया जाता है।

स्पेनिश मस्जिद

स्पेनिश मस्जिद

हैदराबाद का स्पेनिश मस्जिद अपने तरह का एकमात्र मस्जिद है। स्थानीय लोग इसे एवान-ए-बेगमपेट और मस्जिद इकबाल उद दौला भी कहते हैं। एक बार पैगाह नवाब इकबाल उद दौला स्पेन यात्रा पर गए थे। वहां के कोरडोबा स्थित कैथिडरल मस्जिद के वास्तुशिल्प से वह काफी प्रभावित हो गए। स्पेन से वापस आने पर उन्होंने 1906 में स्पेनिस मस्जिद बनवाने का काम शुरू किया। इसे पूरी तरह से कैथिडरल मस्जिद की तर्ज पर ही बनवाया गया था।PC: Nikkul

तारामती

तारामती

बारादारी तारामती बारादारी एक सराय था, जिसे गोलकुंडा के सातवें सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह ने बनावाया था। यह सराय इब्राहिम कुली कुतुब शाह द्वारा बनवाए गए इब्राहिम बाग के परिसर में स्थित था। बारादारी को मूसी नदी के किनारे बनाया गया था, ताकि शहर के इस हिस्से में आने वाले पर्यटक यहां आराम कर सके। पौराणिक कथाओं की माने तो बारादारी को तारामती और उनकी बहन प्रेमामती के सम्मान में बनवाया गया था।

 लज़ीज खानो का शहर हैदराबाद

लज़ीज खानो का शहर हैदराबाद

जब आप हैदराबाद की सैर पर निकलेंगे तो किसी न किसी कोने से आपको यहाँ के स्वादिष्ट खाने की खूसबू ज़रूर आएगी। हैदराबाद की बिरयानी का नाम सुनते ही आपके मुँह में पानी ज़रूर आ जाएगे। बहुत सारे लोग तो र्सिफ यहाँ की टेस्टी बिरयानी खाने के लिए ही जाते हैं। यहाँ के खाने कई तरह के खूसबूदार मसाले और केसर से बनते हैं, जो इन्हें और भी टेस्टी बना देते हैं। यहाँ की बिरयानी को हॅाडी में रखकर बनाया जाता है। हैदराबादी बिरयानी 5-6 तरह से बनाई जाती है। यहाँ के खाने में तेज़ लाल मिर्च, नारियल और इमली का यूज बहुत किया जाता है।PC:Dheerajk88

लाड मार्केट

लाड मार्केट

हैदराबाद घूमने के अलावा लाड मार्केट से फैंसी चूड़ियों की शॉपिंग भी की जा सकती है। यह मार्केट बेहतरीन डिजाइन और रंग बिरंगी जूड़ियों के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। यह काफी पुराना बाजार है और इसका अस्तित्व कुतुब शाही के समय से मिलता है। यह बाजार शहर के बेहद भीड़-भाड़ वाले स्थान पर बना है, जिससे यहां हमेशा गहमागहमी बनी रहती है।यह बाजार चारमीनार और चौमहला महल जैसी ऐतिहासिक इमारतों के पास स्थित है, इसलिए इस बाजार में जाने से बच पाना असान नहीं है। हर साल यहां शादी की शॉपिंग के लिए बड़ी संख्या में जोड़े आते हैं। इन चूड़ियों में अमेरिकी हीरा जड़ा रहता है। अगर आप हैदराबाद जा रहे हैं तो लाड बाजार में शॉपिंग करने जरूर जाएं।
PC:Debajyoti Das

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