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» »स्पेन की बुल फाइटिंग की याद दिलाता है तमिलनाडु का खतरनाक पर्व जल्लिकट्टू

स्पेन की बुल फाइटिंग की याद दिलाता है तमिलनाडु का खतरनाक पर्व जल्लिकट्टू

Posted By: Staff

खतरों से खेलना और एडवेंचर किसे नहीं पसंद है। अपने अंदर के डर को जीतने के लिए इंसान किसी भी सीमा तक जा सकता है अब अगर हम बात इंसान बनाम जानवर कि करें तो ये मुद्दा हमेशा से ही इंसान के शारीरिक कौशल यानी फिजीकल पावर का अंतिम पैमाना रहा है। आज भी दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में आदमी की फिजीकल पावर को बड़े ही अनूठे अंदाज में परखा जाता है। अपनी मर्दानगी दिखाने के लिए व्यक्ति को लड़ना होता है एक खूंखार सांड से। तो अब यदि आपको ज़िन्दगी और मौत के बीच का ये खूनी खेल देखना है तो पोंगल से पहले तमिलनाडु आइये और जल्लिकट्टू नामक खेल का आनंद लीजिये।

जल्लिकट्टू खूंखार सांड को काबू करने का एक खेल है जिसका तमिलनाडु में बहुत क्रेज है ये खेल यहां के गाँवों में मुख्य पोंगल त्योहार से ठीक पहले मट्टू पोंगल के दौरान खेला जाता है। जहां व्यक्ति को अपने शारीरिक बल के अलावा दिमाग का परिचय देते हुए एक खतरनाक सांड को काबू करना होता है।

आपको बताते चलें कि जल्लिकट्टू शब्द की उत्पत्ति एक तमिल शब्द सल्ली कासू से हुई है जिसका मतलब होता है सिक्कों की पोटली। ज्ञात हो कि इस पर्व के दौरान सिक्कों कि पोटली को सांड की सींगों के ऊपर बांधा जाता है जो इस प्रतियोगिता का इनाम होता है। ये इनाम उसे मिलता है जो अधिक समय तक सांड को काबू कर पाता है।

मजेदार बात ये है कि इस खेल के लिए जिस सांड को तैयार किया जाता है वो एक विशेष नस्ल पुलिकुलम या जेलिकट का होता है। इस नस्ल की कास बात ये है कि ये प्रजाति बड़ी आक्रामक होती है और खतरे के दौरान अपनी प्राण रक्षा करते हुए वार करती है।

इस खेल को तीन भागों में खेल जाता है। जो क्रमशः इस प्रकार हैं वदी मनुवीरत्तु, वायली विरत्तु और वदम मंजुवीरत्तु

वदी मनुवीरत्तु - ये इस खेल का सबसे खतरनाक फॉर्म होता है। जैसे ही खूंखार सांड को छोड़ा जाता है उसी दौरान व्यक्ति को इस छूटे हुए सांड की पीठ पर बैठना होता है। ये देखा गया है कि वदी मनुवीरत्तु के दौरान लोग कई बार गम्भीर रूप से घायल होते हैं और कई बार उनकी मौत तक हो जाती है। कभी न कभी आपने दक्षिण की फिल्मों के सीन में इस दृश्य को देखा होगा।

वायली विरत्तु - खेल के इस फॉर्म में सांड को एक ओपन एरीना में छोड़ दिया जाता है। यहां जो भी व्यक्ति सांड के करीब आता है उस पर सांड आकर्मण करता है और फिर शुरुआत होती है इंसान और जानवर के बीच की जंग की।

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वदम मंजुवीरत्तु - जल्लिकट्टू के ये फॉर्म सबसे सुरक्षित माना जाता है और इसमें रिस्क भी कम होता है। इस फॉर्म में रिस्क की गुंजाईश कम रहती है। वदम मंजुवीरत्तु में सांड को एक 50 फीट लंबी रस्सी से बांधा जाता है जहां 7 से लेके 9 आदमियों का समूह सांड पर चढ़ाई कर उसे पराजित करता है। वदम मंजुवीरत्तु में समूह को 30 मिनट में सांड को काबू करना होता है।

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हालांकि जल्लिकट्टू स्पेनिश बुल फाइटिंग से काफी मिलता जुलता है परन्तु यहां स्पेन की तर्ज पर सांडों को मारा नहीं जाता है और इसे केवल एक खेल की तरह लिया जाता है। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा जानवरों और खिलाडियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है साथ ही यहां पर पूरे आयोजन के दौरान कुशल डॉक्टरों की टीम भी मौजूद रहती है। तो अब अगर आप एडवेंचर के शौक़ीन हैं और भारत में रहते हुए स्पेन वाला मजा लेना चाहते हैं तो तमिलनाडु आइये और जल्लिकट्टू का आनंद लीजिये।

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

जल्लिकट्टू खूंखार सांड को काबू करने का एक खेल है जिसका तमिलनाडु में बहुत क्रेज है ये खेल यहां के गाँवों में मुख्य पोंगल से ठीक पहले मट्टू पोंगल के दौरान खेला जाता है। जहां व्यक्ति को अपने शारीरिक बल के अलावा दिमाग का परिचय देते हुए एक खतरनाक सांड को काबू करना होता है। देखिये इस त्योहार से जुडी कुछ रोचक तस्वीरें।

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

जल्लिकट्टू खूंखार सांड को काबू करने का एक खेल है जिसका तमिलनाडु में बहुत क्रेज है ये खेल यहां के गाँवों में मुख्य पोंगल से ठीक पहले मट्टू पोंगल के दौरान खेला जाता है। जहां व्यक्ति को अपने शारीरिक बल के अलावा दिमाग का परिचय देते हुए एक खतरनाक सांड को काबू करना होता है। देखिये इस त्योहार से जुडी कुछ रोचक तस्वीरें।

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

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जल्लिकट्टू खूंखार सांड को काबू करने का एक खेल है जिसका तमिलनाडु में बहुत क्रेज है ये खेल यहां के गाँवों में मुख्य पोंगल से ठीक पहले मट्टू पोंगल के दौरान खेला जाता है। जहां व्यक्ति को अपने शारीरिक बल के अलावा दिमाग का परिचय देते हुए एक खतरनाक सांड को काबू करना होता है। देखिये इस त्योहार से जुडी कुछ रोचक तस्वीरें।

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

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जल्लिकट्टू खूंखार सांड को काबू करने का एक खेल है जिसका तमिलनाडु में बहुत क्रेज है ये खेल यहां के गाँवों में मुख्य पोंगल से ठीक पहले मट्टू पोंगल के दौरान खेला जाता है। जहां व्यक्ति को अपने शारीरिक बल के अलावा दिमाग का परिचय देते हुए एक खतरनाक सांड को काबू करना होता है। देखिये इस त्योहार से जुडी कुछ रोचक तस्वीरें।

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

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जल्लिकट्टू खूंखार सांड को काबू करने का एक खेल है जिसका तमिलनाडु में बहुत क्रेज है ये खेल यहां के गाँवों में मुख्य पोंगल से ठीक पहले मट्टू पोंगल के दौरान खेला जाता है। जहां व्यक्ति को अपने शारीरिक बल के अलावा दिमाग का परिचय देते हुए एक खतरनाक सांड को काबू करना होता है। देखिये इस त्योहार से जुडी कुछ रोचक तस्वीरें।

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

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जल्लिकट्टू खूंखार सांड को काबू करने का एक खेल है जिसका तमिलनाडु में बहुत क्रेज है ये खेल यहां के गाँवों में मुख्य पोंगल से ठीक पहले मट्टू पोंगल के दौरान खेला जाता है। जहां व्यक्ति को अपने शारीरिक बल के अलावा दिमाग का परिचय देते हुए एक खतरनाक सांड को काबू करना होता है। देखिये इस त्योहार से जुडी कुछ रोचक तस्वीरें।

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

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जल्लिकट्टू खूंखार सांड को काबू करने का एक खेल है जिसका तमिलनाडु में बहुत क्रेज है ये खेल यहां के गाँवों में मुख्य पोंगल से ठीक पहले मट्टू पोंगल के दौरान खेला जाता है। जहां व्यक्ति को अपने शारीरिक बल के अलावा दिमाग का परिचय देते हुए एक खतरनाक सांड को काबू करना होता है। देखिये इस त्योहार से जुडी कुछ रोचक तस्वीरें।

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

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जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

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जल्लिकट्टू खूंखार सांड को काबू करने का एक खेल है जिसका तमिलनाडु में बहुत क्रेज है ये खेल यहां के गाँवों में मुख्य पोंगल से ठीक पहले मट्टू पोंगल के दौरान खेला जाता है। जहां व्यक्ति को अपने शारीरिक बल के अलावा दिमाग का परिचय देते हुए एक खतरनाक सांड को काबू करना होता है। देखिये इस त्योहार से जुडी कुछ रोचक तस्वीरें।

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

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जल्लिकट्टू खूंखार सांड को काबू करने का एक खेल है जिसका तमिलनाडु में बहुत क्रेज है ये खेल यहां के गाँवों में मुख्य पोंगल से ठीक पहले मट्टू पोंगल के दौरान खेला जाता है। जहां व्यक्ति को अपने शारीरिक बल के अलावा दिमाग का परिचय देते हुए एक खतरनाक सांड को काबू करना होता है। देखिये इस त्योहार से जुडी कुछ रोचक तस्वीरें।

जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

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जल्लिकट्टू खूंखार सांड को काबू करने का एक खेल है जिसका तमिलनाडु में बहुत क्रेज है ये खेल यहां के गाँवों में मुख्य पोंगल से ठीक पहले मट्टू पोंगल के दौरान खेला जाता है। जहां व्यक्ति को अपने शारीरिक बल के अलावा दिमाग का परिचय देते हुए एक खतरनाक सांड को काबू करना होता है। देखिये इस त्योहार से जुडी कुछ रोचक तस्वीरें।

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जल्लिकट्टू - जहां किया जाता है सांड को काबू

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