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क्या वाकई श्रापित होने की वजह से ही रांची के इस किले पर 200 सालों से लगातार गिर रही है बिजली?

भारत रहस्यमयी जगहों का भंडार है। इसके हर राज्य में कई किले मौजूद है जिनका अपना अलग कोई न कोई इतिहास जरूर होता है। इनमें से कुछ किलों में घटने वाली रहस्यमयी घटनाओं पर से विज्ञान ने पर्दा उठा दिया है। लेकिन आज भी कई ऐसे किले या महल मौजूद हैं, जिनमें घटने वाली इन रहस्यमयी घटनाओं से आज तक पर्दा नहीं हट पाया है। ऐसा ही एक किला मौजूद है झारखंड की राजधानी रांची से महज 18 किमी की दूरी पर।

इस किले पर हर साल बारिश के मौसम में बिजली गिरती है। स्थिति ऐसी हो गयी है कि बिजली गिरने की वजह से किसी जमाने में 100 कमरों का आलीशान महल आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। स्थानीय लोगों का मानना है कि किले के श्रापित होने की वजह से ऐसा होता है। लेकिन क्या वाकई सिर्फ श्राप की वजह से किले पर पिछले 200 सालों से लगातार हर साल बिजली गिरती है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी है?

jagatpal singh fort ranchi

कौन सा है किला?

हम जिस रहस्यमयी किले की बात कर रहे हैं, वह रांची से लगभग 18 किमी की दूरी पर पिठौरिया गांव में स्थित है। यूं तो इस किले का इतिहास 200 सालों से कहीं ज्यादा का है, लेकिन किले में घटने वाली रहस्यमयी घटना की वजह से पिछले 200 सालों से यह किला स्थानीय लोगों में कौतूहल का विषय बना हुआ है।

इस किले को जगतपाल सिंह का किला नाम से स्थानीय लोग जानते हैं। जानकारी के अनुसार पिठौरिया गांव नागवंशी और मुंडा राजाओं का केंद्र रहा है। पिठौरिया गांव के राजा जगतपाल सिंह के पास 84 गांवों की जागीर थी जो अपनी प्रजा की भलाई के काम करने के लिए काफी लोकप्रिय थे।

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क्या है इस किले का रहस्य?

जगतपाल सिंह का किला को स्थानीय लोग बड़ा ही रहस्यमयी किला मानते हैं। यूं तो आकाशीय बिजली का गिरना एक प्राकृतिक घटना मानी जाती है, जो कभी भी कहीं भी गिर सकती है। लेकिन अगर यह घटना पिछले 200 सालों से हर साल दोहरायी जाने लगे तो निश्चित रूप से इसके पीछे का रहस्य जानने की उत्सुकता लोगों में जागने लगती है। ऐसा ही जगतपाल सिंह के किले के साथ हो रहा है। पिछले 200 सालों से हर साल नियमित रूप से इस किले पर बारिश के मौसम में बिजली जरूर गिरती है। स्थानीय लोग इसकी वजह इस किले का श्रापित होना मानते हैं।

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क्या और क्यों मिला था इस किले को श्राप?

किले को श्राप मिलने की कहानी भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी हुई है। दरअसल, अंग्रेजी हुकूमत को छोटा नागपुर इलाके की भौगोलिक स्थिति की वजह से वहां अपने पैर पसारने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। कहा जाता है कि ऐसी स्थिति में अंग्रेज अधिकारी थॉमस विल्किंसन ने राजा जगतपाल सिंह से हाथ मिलाया।

राजा जगतपाल सिंह ने भी अंग्रेजों की मदद करना शुरू कर दिया, जो अगले कई सालों तक चलता रहा। लेकिन इस बीच वर्ष 1857 के सिपाही विद्रोह का वक्त आया जब स्वतंत्रता संग्रामी ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लेकिन इस लड़ाई में पिठौरिया गांव में राजा जगतपाल सिंह अंग्रेजों की ढाल बन गये।

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देश से गद्दारी की सजा भुगत रहा किला

कहा जाता है कि राजा जगतपाल सिंह पिठौरिया गांव में क्रांतिकारियों की हर गतिविधि की जानकारी अंग्रेजों तक पहुंचा दिया करते थे। इससे नाराज होकर ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने पिठौरिया गांव पर हमला कर दिया। कई दिनों तक चली लड़ाई में ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव समेत कई दूसरे क्रांतिकारी भी गिरफ्तार हो गये।

जगतपाल सिंह की गवाही के बाद ठाकुर शाहदेव को फांसी की सजा सुनायी गयी और 16 अप्रैल 1858 को उन्हें रांची के जिला स्कूल के सामने पेड़ पर फांसी से लटका दिया गया। जानकारों का कहना है कि राजा जगतपाल सिंह की गवाही पर कई और क्रांतिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया और उन्हें भी सजा दी गयी।

क्रांतिकारी ने दिया श्राप

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब क्रांतिकारी ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को फांसी पर लटकाया जा रहा था तब उन्होंने राजा जगतपाल सिंह को श्राप दिया। उन्होंने जगतपाल सिंह को श्राप दिया कि भविष्य में कोई उनका नाम लेने वाला नहीं रहेगा। उनके 100 कमरों के आलीशान महल पर हर साल बिजली गिरेगी और ऐसा तब तक होता रहेगा जब तक किला पूरी तरह से खंडहर बनकर बर्बाद नहीं हो जाता है। कहा जाता है कि उसके बाद से आज तक हर साल इस किले पर बिजली गिरने का सिलसिला जारी है। आज यह किला वाकई में खंडहर बन चुका है।

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क्या कहता है विज्ञान?

वैज्ञानिकों का कहना है कि जगतपाल सिंह का किला जिस स्थान पर मौजूद है वह एक ऊंची पहाड़ी है और यहां बड़ी संख्या में ऊंचे पेड़ हैं। वैज्ञानिकों का तर्क है कि इस जगह पर प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क मौजूद है, जो आकाशीय बिजली को आकर्षित करते हैं और बिजली के लिए सुचालक के रूप में रास्ता उपलब्ध करवाते हैं। यहीं वजह है कि बारिश के मौसम में ही इस किले पर हर साल बिजली गिरती है। लेकिन...

स्थानीय लोगों का सवाल है कि अगर विज्ञान के तर्क को मान भी लिया जाए तो बिजली गिरने का यह सिलसिला तब क्यों नहीं था, जब यह किला आबाद हुआ करता था। आज की तुलना में तो पुराने समय में इस इलाके में पेड़-पौधे भी ज्यादा थे और लौह अयस्कों की मात्रा भी काफी ज्यादा रही होगी। क्या उस समय यह स्थान बिजली को आकर्षित नहीं करता था?

बहरहाल, स्थानीय लोगों के इन सवालों और विज्ञान के विपक्ष में दिये गये तर्कों का कोई उत्तर आज तक नहीं मिल सका है। इस किला और जगह पूरी तरह से अब वीरान पड़ी रहती है। स्थानीय लोग दिन के समय भी इस किले या आसपास के क्षेत्र में आने से डरते हैं। क्या आपके पास इस घटना का कोई सटिक उत्तर है? क्या आप भी मानते हैं कि हर साल यहां बिजली मात्र वैज्ञानिक कारणों से ही गिरती है अथवा आप इसे स्वतंत्रता संग्रामी के श्राप का असर मानते हैं?

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