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कारगिल में इन जगहों पर एक बार जरूर जाना चाहिए, मिलेगा ऐसा अनुभव जो हमेशा रहेगा याद

हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। पाकिस्तान के साथ 1999 में हुई लड़ाई में 26 जुलाई को भारतीय सेना ने अपनी विजय दर्ज की थी। इस दिन कारगिल युद्ध में मारे गये भारतीय सैनिकों के बलिदान दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

अगर इस साल का कारगिल विजय दिवस आप कारगिल में मनाने की योजना बना रहे हैं या इसके आसपास हैं तो हमारे बहादूर सैनिकों को याद करने के साथ-साथ इन शानदार जगहों पर भी एक बार जरूर घूम आएं। यकीन मानिए, यहां आपको ऐसा अनुभव मिलेगा जिसकी याद को आप जिंदगी भर संजो कर रखना पसंद करेंगे।

places to visit in kargil

1. कारगिल वार मेमोरियल

जब कारगिल विजय दिवस के खास मौके पर कारगिल में हैं, तो वार मेमोरियल को भला कैसे भूल सकते हैं। इसलिए अपने इस ट्रिप की शुरुआत कारगिल वार मेमोरियल में घूमने के साथ ही करें। यह वार मेमोरियल गुलाबी रंग के बलुआ पत्थरों से बना हुआ है।

वार मेमोरियल में हर उस सैनिक का नाम लिखा हुआ है जिसने पाकिस्तान के इरादों को नाकाम करते हुए कारगिल की लड़ाई में अपनी जान की बाजी लगा दी। इसके अलावा यहां युद्ध के दौरान ली गयी कुछ तस्वीरें और युद्ध में इस्तेमाल हुए हथियार भी रखे हुए हैं जिन्हें आप करीब से देख सकते हैं।

kargil war memorial

2. सुरु घाटी

यह लद्दाख की वह घाटी है, जो पर्यटकों को जन्नत जैसा अहसास करवाती है। इस घाटी में रहने वाले लोगों की संख्या लगभग 25,000 है, जिन्हें तिब्बती और बौद्ध समुदाय का वंशज माना जाता है। सुरु घाटी बर्फ से ढके पहाड़ों से घिरी होती है। इस जगह की सुन्दरता को देखने के लिए यहां पर्यटक भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। आमतौर पर सुरु घाटी का मौसम काफी ठंडा ही रहता है।

3. मुलबेख मठ

मुलबेख मठ कारगिल से लगभग 36 किमी की दूरी पर लेह की ओर स्थित है। यहां चट्टानों को तराशकर बनायी गयी 9 मीटर ऊंची मैत्रेय बुद्ध की मूर्ति है। माना जाता है कि यह मूर्ति 8वीं शताब्दी की है। कहा जाता है कि इस मूर्ति को तराशने का काम मिशनरी ने किया था लेकिन ये मिशनरी तिब्बती नहीं बल्कि लद्दाखी थए। मुख्य मूर्ति के पास खरोष्ठी लिपि में लिखी गयी एक प्राचीन शिलालेख भी मौजूद है।

kargil war place

4. द्रास घाटी

इसे लद्दाख का प्रवेश द्वार कहा जाता है। कारगिल की लड़ाई में द्रास घाटी में काफी अहम भूमिका निभायी थी। कारगिल युद्ध के शुरुआत में पाकिस्तानी सेना द्रास और आसपास के गांवों से गोले दागने लगी थी। बाद में भारत ने द्रास व अन्य जगहों पर कब्जा कर लिया।

द्रास घाटी को आज भी कारगिल युद्ध के स्मारक के रूप में मान्यता दी जाती है। यह घाटी जोज़िला पास से शुरू होती है, जिसकी गिनती भारत की सबसे ठंडी जगहों में होती है। सर्दियों के मौसम में यहां का औसत तापमान -12 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।

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