Search
  • Follow NativePlanet
Share
» » चलिए लें चलें आपको चूहों को समर्पित करणी माता के मंदिर

चलिए लें चलें आपको चूहों को समर्पित करणी माता के मंदिर

By Goldi Chauhan

हम अपने लेखो से आपको भारत के विभिन्न-विभिन्न मंदिरों के बारे में आपको बताते रहते हैं। तो आज मैं अपने इस आर्टिकल से आपको भारत के एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहीं हूँ,जहां मन्दिर के प्रमुख देवता से ज्यादा महत्त्व वहां रहने वाले चूहों को दिया जाता है। अब इसे आस्था कहें या अंध विश्वास लेकिन इस मंदिर में प्रशाद तभी शुद्ध माना जाता है जब वहां मौजूद चूहें उसे जूठा कर दें। तो चलिए हम आपको ले चलते हैं चूहे वाले मंदिर की सैर पर...

Karni Mata mandir

Photo Courtesy: Noledam

मूषक मंदिर, या चूहों का ये मंदिर राजस्थान के बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर जोधपुर रोड पर गांव देशनोक की सीमा में स्थित है। इस मंदिर को करणी माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म में इस मंदिर का शुमार देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में है। संगमरमर से बने इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है।करणी माता बीकानेर राजघराने की कुलदेवी है। कहते है की उनके ही आशीर्वाद से बीकानेर और जोधपुर रियासत की स्थापना हुई थी। करणी माता के वर्तमान मंदिर का निर्माण बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने बीसवी शताब्दी के शुरुआत में करवाया था। इस मंदिर में चूहों के अलावा, संगमरमर के मुख्य द्वार पर की गई उत्कृष्ट कारीगरी, मुख्य द्वार पर लगे चांदी के बड़े बड़े किवाड़, माता के सोने के छत्र और चूहों के प्रसाद के लिए रखी चांदी की बहुत बड़ी परात भी मुख्य आकर्षण है।

चूहों की बहुतायत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पैदल चलने के लिए अपना अगला कदम उठाकर नहीं, बल्कि जमीन पर घसीटते हुए करणी मां की मूर्ति के सामने पहुंचते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर पाते हैं। यहां का मुख्य मंदिर चूहों से भरा पड़ा है। वे श्रद्धालुओं के शरीर पर कूद-फांद करते हैं, लेकिन किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते। चील, गिद्ध और दूसरे जानवरों से इन चूहों की रक्षा के लिए मंदिर में खुले स्थानों पर बारीक जाली लगी हुई है। इन चूहों की उपस्थिति की वजह से ही श्री करणी देवी का यह मंदिर चूहों वाले मंदिर के नाम से भी विख्यात है।

करणी माता मंदिर में रहने वाले चूहे माँ की संतान माने जाते है करनी माता की कथा के अनुसार एक बार करणी माता का सौतेला पुत्र ( उसकी बहन गुलाब और उसके पति का पुत्र ) लक्ष्मण, कोलायत में स्तिथ कपिल सरोवर में पानी पीने की कोशिश में डूब कर मर गया। जब करणी माता को यह पता चला तो उन्होंने, मृत्यु के देवता याम को उसे पुनः जीवित करने की प्राथना की। पहले तो यम राज़ ने मन किया पर बाद में उन्होंने विवश होकर उसे चूहे के रूप में पुनर्जीवित कर दिया। यहाँ के लोगों की ऐसी धारणा है की यदि कोई श्रद्धालु यहाँ सफ़ेद चूहा देख ले तो वो बहुत भाग्यशाली होता है । साथ ही ये भी माना जाता है की यहाँ मौजूद चूहे अगर किसी श्रद्धालु के पैर में चढ़ जाएं तो उस व्यक्ति की मनोकामना बहुत जल्द पूरी होती है । इन चूहों को चढ़ावे के रूप में प्रसाद चढ़ाया जाता है ।

कैसै पहुंचे-
मां करणी मंदिर तक पहुंचने के लिए बीकानेर से बस, जीप व टैक्सियां आसानी से मिल जाएँगी। यह मंदिर बीकानेर-जोधपुर रेल मार्ग पर स्थित देशनोक रेलवे स्टेशन के पास ही स्थित है। यहाँ वर्ष में दो बार नवरात्रों पर चैत्र व आश्विन माह में विशाल मेला आयोजित होता है। इस दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी संख्या में पहुंचकर मनौतियां मनाते हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए मंदिर के पास धर्मशालाएं भी हैं जहां वो कम पैसे में पूरी सुविधा के साथ रह सकते हैं।

More News

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+