उत्तराखंड, महज एक नाम ही नहीं बल्कि अपने अंदर पूरी कायनात समाए हुई है। यहां का नैसर्गिक नजारा किसी को भी अपना दीवाना बना सकती है। यहां के हिल स्टेशन भारत के सबसे अच्छे व खूबसूरत हिल स्टेशनों में से एक है, जहां न सिर्फ भारतीय बल्कि विदेशी पर्यटक भी खूब आते हैं। इनमें से ही एक है यहां का कौसानी हिल स्टेशन..।
कौसानी से महात्मा गांधी का संबंध
हिमालय की तलहटी में बसा ये खूबसूरत सा गांव है तो बेहद छोटा लेकिन खूबसूरती ऐसी कि इंसान देखते रह जाए। यहां महात्मा गांधी की भी काफी यादें जुड़ी है। कहा जाता है कि कौसानी महात्मा गांधी का सबसे प्रिय स्थान था, जिसे वे 'भारत का स्विट्जरलैंड' कहा करते थे। सर्दी के मौसम में बर्फबारी से ये गांव एकदम जन्नत मालूम पड़ता है।

#Valentine'sDay पर कौसानी के लिए बना सकते हैं ट्रिप
प्रकृति की गोद में बसा कौसानी शहर की चहल-पहल से कोसों दूर है। यहां रहने वाले लोगों का पहला प्यार ही प्रकृति है, जिससे वे कभी भी छेड़छाड़ नहीं करते। अब देखा जाए तो नया साल आने वाला है और कुछ ही दिनों में #Valentine'sDay भी आने वाला है। ऐसे में आप चाहे तो अपने पार्टनर के लिए सरप्राइज भी प्लान कर सकते हैं, जहां आप दोनों बर्फबारी के बीच कुछ अच्छे मोमेंट बिता पाएंगे।
प्राचीन हिमालयी गांव है कौसानी
अगर पहाड़ी इलाकों के शौकिन हैं और वहां जाकर समय बिताना पसंद है तो कौसानी आपके लिए काफी अच्छा डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। यहां जाकर आप पहाड़ी सभ्यता, यहां के घरों और परम्परा को जान पाएंगे। पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद चख पाएंगे, जो आपकी ट्रिप को और भी मजेदार बना देती है।

कौसानी में घूमने की जगह
⦁ चाय के बगान
⦁ अनाशक्ति आश्रम (यहां गांधी जी रहा करते थे)
⦁ सुमित्रानंदन पंत संग्रहालय (पंत हिंदी साहित्य के जाने माने कवि व लेखक थे)
⦁ रुद्रधारी झरने और कई गुफाएं
कौसानी के आसपास घूमने की जगहें
⦁ बैजनाथ मंदिरों का समूह
⦁ अल्मोड़ा
⦁ बागेश्वर
⦁ लौबंज गाँव
कौसानी जाने का सही समय
कौसानी में जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से लेकर फरवरी तक का है। इस दौरान यहां की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। वहीं, मानसून के मौसम में यहां जाने से बचना चाहिए, क्योंकि बारिश के दौरान यहां के रास्ते सही नहीं होते।
कौसानी कैसे पहुंचें?
कौसानी, उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित है, जो आजादी से पहले अल्मोड़ा जिला का हिस्सा हुआ करता था। लेकिन साल 1998 में अल्मोड़ा से अलग कर बागेश्वर को एक अलग जिला बना दिया गया। यह अल्मोड़ा से करीब 50 किमी. व बागेश्वर से करीब 40 किमी. की दूरी पर स्थित है।
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