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खजुराहो नृत्य महोत्सव : ऐसा नृत्य जिसे देखने स्वर्ग से आ जाएं खुद भगवान इंद्र

Posted By: Staff

भारत कला और संस्कृति से समृद्ध देश है, जहां की विविधता और विशेषता का लोहा दुनिया मानती है। भारत में जहां आपको एक से बढ़कर एक खूबसूरत नज़ारे, भोजन, प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलेगी तो वहीँ दूसरी तरफ यहां के अलग अलग नृत्य, संगीत भी आपका मन मोह लेंगे। अगर बात नृत्य या डांस कि हो तो आपको बताते चलें कि आज भारत के क्लासिकल डांस को देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी हाथों हाथ लिया जा रहा है।

Photos : काम के सुख में डूबी खुजराहो की बेहद खूबसूरत मूर्तियां

एक दौर था जब दरबार सजते थे और उनमें नृत्य का आयोजन किया जाता था जिनको देखने के लिए दूर देश से राजा महाराजा आयोजन स्थल पर आते थे। तो यदि अब आपको वही बरसों पुराना नृत्य देखना है या दूसरे शब्दों में कहा जाये कि यदि आप क्लासिकल डांसिंग के शौक़ीन हैं तो मध्य प्रदेश के खजुराहो आइये।

जहाँ हर साल की ही तरह खजुराहो नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। आपको बताते चलें कि ये नृत्य महोत्सव 20 फरवरी से 26 फरवरी तक चलेगा। गौरतलब है कि इस महोत्सव में देश के उन चुनिंदा नर्तकियों को आमंत्रित किया जाता है जो अपने क्षेत्र में महारथ रखते हैं। तो अब देर किस बात की आज ही खजुराहो आने के का प्लान करिये और आकर देखिये ये बेमिसाल नृत्य और अद्भुत और अपने में ख़ास वास्तुकला लिए हुए यहां के मंदिरों को। साथ ही यहां के मंदिरों को देखिये और जानिये क्या होती है असल काम क्रीड़ा।

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मंदिर परिसर

मंदिर परिसर

नृत्य महोत्सव के लिए भला मंदिर परिसर से बेहतर कौन सी जगह होगी यहाँ आपको प्रेम में लिप्त मूर्तियां, गीत, संगीत एक बेहद अलग नैसर्गिक सुख की अनुभूति कराएगा।

देविया सुंदरियां

देविया सुंदरियां

खजुराहो मंदिर परिसर का निर्माण 950 से 1050 के बीच चंदेला राजवंश के राजाओं के द्वारा करवाया गया था।

जहां होता है नए और पुराने का संगम

जहां होता है नए और पुराने का संगम

खजुराहो नृत्य महोत्सव का मुख्य उद्देश्य नृत्य और संगीत के माध्यम से भारत के इतिहास को जीवित रखना है।

इतिहास के पन्ने पलटना

इतिहास के पन्ने पलटना

एक सप्ताह तक चलने वाले इस नृत्य महोत्सव में आप एक साथ कई नृत्यों का मज़ा ले पाएंगे। इस दौरान आपको यहां ओड़िशी, कथक, भरतनाट्यम और कुच्चीपुड़ी जैसे नृत्य देखने को मिलेंगे।

पोज और परफेक्शन

पोज और परफेक्शन

किसी ज़माने में खजुराहो मंदिर परिसर में 85 से अधिक मंदिर थे जिनमें से आज केवल 22 ही शेष बचे हैं।

नृत्य और भक्ति

नृत्य और भक्ति

खजुराहो की मूर्तियों में काम और प्रेम को इस तरीके से दर्शाया गया है कि ये किसी भी व्यक्ति का ध्यान अपनी ओर खींच सकती हैं। इस बारे में कई मान्यताएं हैं कि इन मूर्तियों को इतना उत्तेजक क्यों बनाया गया है। एक मान्यता के अनुसार चंदेला राजवंश की तंत्र विद्या पर गहरी आस्था थी जिसके अनुसार काम के मार्ग पर चलते हुए व्यक्ति आसानी से मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।