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जेजुरी के सुनहरे मंदिर खंडोबा की सुनहरी यात्रा!

पुणे से लगभग 48 किलोमीटर दूर स्थित पुणे जिले में ही पड़ने वाला धार्मिक मगर जेजुरी, अपने खंडोबा मंदिर के लिए पूरे देश में सुप्रसिद्ध है। यह देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। इसे मराठी भाषा में 'खंडोबाची जेजुरी' (खंडोबा की जेजुरी) के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ की शोभा और लोगों की भक्ति भावना इस मंदिर में देखते ही बनती है। चलिए आज हम आपको सुनहरे रंग से चमकते हुए इसी मंदिर की पवित्र यात्रा पर लिए चलते हैं।

पुणे कैसे पहुँचें?

जेजुरी में स्थित खंडोबा मंदिर एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थापित है, जहाँ पहुँचने के लिए करीब दो सौ से अधिक सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं। जब आप इस पहाड़ी पर पहुँच जाते हैं तो यहाँ से आपको सम्पूर्ण जेजुरी का मनमोहक दृश्य दिखाई पड़ता है। जेजुरी मुख्यतः अपनी दीपमालाओं के लिए बहुत प्रसिद्ध है जिनका चढ़ाई करते समय मंदिर के प्रांगण से अद्भुत नज़ारा देखने को मिलता है।

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चलिए करते हैं खंडोबा मंदिर की सुनहरी यात्रा उसके कुछ सुनहरे तस्वीरों के साथ और मंदिर को और क़रीब से जानते हैं।

मंदिर के देवता

मंदिर के देवता

जेजुरी के इस प्रसिद्ध मंदिर के मुख्य देवता खंडोबा देवता हैं जिनके नाम पर इस मंदिर का नाम है। जेजुरी नगर खंडोबा भगवान के लिए ही समर्पित है। इन्हें मार्तण्ड, भैरव और मल्हारी जैसे अन्य नामों से भी पुकारा जाता है, जो भगवान शिव जी के ही अन्य रूप हैं।

Image Courtesy:Anant Rohankar

मंदिर के देवता

मंदिर के देवता

मराठी में किसी बड़े को सम्मान देते हुए नाम के बाद 'बा', 'राव' या 'राया' लगाया जाता है इसलिए इन्हें खंडोबा, खंडेराया और खंडेराव के नाम से भी पुकारा जाता है।

Image Courtesy:Ashishbagate13

मंदिर के देवता

मंदिर के देवता

खंडोबा की प्रतिमा एक घोड़े की सवारी करते हुए एक योद्धा के रूप में यहाँ विराजमान है। उनके हाथ में राक्षसों को मारने के लिए एक बड़ी खड्ग है। खंडोबा नाम, इस शस्त्र खड्ग के नाम से ही लिया गया है। कुछ लोग खंडोबा को शिव, भैरव (शिव का क्रूर रूप ), सूर्य देवता और कार्तिकेय, देवताओं के समामेलन के रूप में विश्वास करते हैं।

Image Courtesy:Upadhye Guruji

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

खंडोबा का महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई लोक गीतों और साहित्यिक कृतियों में उल्लेख है। ब्रह्माण्ड पुराण के अनुसार, राक्षसों मल्ला और मणि को भगवान ब्रह्मा से वरदान द्वारा संरक्षण प्राप्त था। इस वरदान के साथ वे अपने आपको अजेय मानने लगे और पृथ्वी पर संतों और लोगों को आतंकित करने लगे।

Image Courtesy:Ramnath Bhat

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

यह सब देख गुस्से में भगवान शिव जी ने मार्तण्ड भैरव के रूप में जिन्हें खंडोबा भी कहते हैं, नंदी की सवारी करते हुए पृथ्वी को बचाने के लिए दोनों राक्षसों को मारने का जिम्मा उठाया। कहा जाता है कि इस उत्तेजना में मार्तण्ड भैरव चमकते हुए सुनहरे सूरज की तरह लग रहे थे, पूरे शरीर पर हल्दी लगा हुआ था जिसकी वजह से उन्हें हरिद्रा भी कहा जाता है।

Image Courtesy:Ashishbagate13

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

जब भगवान मार्तण्ड ने दोनों राक्षसों को मर दिया, तब मरने के दौरान मणि ने पश्चाताप के रूप में उन्हें अपना सफ़ेद घोडा प्रदान किया और उनसे वरदान माँगा। वरदान यह था कि वह खंडोबा के हर मंदिर में स्थापित होगा जिससे कि मानव जाति की भलाई हो। खंडोबा ने ख़ुशी ख़ुशी यह वरदान दे दिया।

Image Courtesy:PratibhaS Pawar

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

इसके उलट मल्ला ने वरदान माँगा कि मानव जाति का विनाश हो। जिससे भगवान ने गुस्से में आकर उसका सर धड़ से अलग कर दिया और मंदिर की सीढ़ियों पर छोड़ दिया ताकि मंदिर में प्रवेश करने वाले भक्तों द्वारा वह कुचला जा सके।

Image Courtesy:Redtigerxyz

मंदिर की वास्तुकला

मंदिर की वास्तुकला

पूरा मंदिर मुख्य रूप से पत्थर का निर्मित है। मंदिर को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है। पहला भाग मंडप कहलाता है, जहाँ श्रद्धालु एकत्रित होकर पूजा भजन इत्यादि में भाग लेते हैं जबकि दूसरा भाग गर्भगृह है, जहाँ खंडोबा की चित्ताकर्षक प्रतिमा विद्यमान है।

Image Courtesy:Kiranbhote

मंदिर की वास्तुकला

मंदिर की वास्तुकला

मंदिर के हर कदम पर हल्दी का छिड़काव किया गया है। मंदिर में हर जगह हल्दी के छिड़काव से पूरा मंदिर सुनहरा दिखाई देता है जिसकी वजह से इसे मराठी में सोन्याची जेजुरी कहते हैं।

Image Courtesy:Ashishbagate13

मंदिर की वास्तुकला

मंदिर की वास्तुकला

हेमाड़पंथी शैली में बने इस मंदिर में 10/12 फीट आकार का पीतल से बना कछुआ भी स्थापित है। मंदिर में ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कई हथियार रखे गए हैं। दशहरे के दिन यहाँ तलवारों को ज़्यादा समय तक उठाने की प्रतिस्पर्द्धा भी प्रसिद्ध है।

Image Courtesy:Ranepictography

खंडोबा मंदिर

खंडोबा मंदिर

भक्तों के अनुसार माना जाता है कि खंडोबा बच्चे के जन्म और विवाह में बाधाओं को दूर करते हैं। इनकी पूजा सारे रीती रिवाज़ों के साथ पूरी सख्ती से निभाई जाती हैं। मणि दानव की प्रतिमा के समक्ष बकरी की बलि भी दी जाती है।

Image Courtesy:Ashishbagate13

खंडोबा मंदिर

खंडोबा मंदिर

हर साल मल्ला और मणि पर उनकी जीत का जश्न मनाने के लिए एक छह दिवसीय मेला भी यहाँ आयोजित किया जाता है। इस मेले को मार्गशीर्ष के हिंदू महीने में मनाते हैं। अंतिम दिन को चंपा षष्टी कहा जाता है और इस दिन भक्तगण भगवान जी के लिए व्रत रखते हैं।

Image Courtesy:PratibhaS Pawar

जेजुरी पहुँचें कैसे?

जेजुरी पहुँचें कैसे?

पुणे से जेजुरी लगभग 48 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और सोलापुर से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर।

सड़क यात्रा द्वारा: पुणे से और महाराष्ट्र के कई अन्य प्रमुख शहरों से जेजुरी तक के लिए कई बस सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

Image Courtesy:Amar03

जेजुरी पहुँचें कैसे?

जेजुरी पहुँचें कैसे?

रेल यात्रा द्वारा: जेजुरी रेलवे स्टेशन यहाँ का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन जहाँ तक के लिए पुणे और महाराष्ट्र के मुख्य शहरों से कई लोकल ट्रेनें चलती हैं।

Image Courtesy:Ashishbagate13

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