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चंदेरी पर बनी है फिल्म सुई धागा, आप भी जान लीजिये आखिर क्यों इतना प्रसिद्ध है चंदेरी

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बीते कई दिनों से मध्य प्रदेश स्थित चंदेरी सुर्ख़ियों में छाया हुआ है, कारण है अनुष्का शर्मा और वरुण धवन। जी हां, ये दोनों जल्द ही एक ऐसी फिल्म में नजर आने वाले हैं जो चंदेरी से जुड़ी हुई है और फिल्म का नाम है "सुई-धागा'। जैसा की सभी जानते हैं कि मध्य प्रदेश स्थित चंदेरी अपनी बुन्देलखण्डी शैली में बनी हस्तनिर्मित साड़ियों के लिये काफी मशहूर है।

खास बात यह है कि, फिल्म में दोनों कलाकार भी इसी चीज से जुड़े आयेंगे, जहां अनुष्का फिल्म में एक कढ़ाईवाली है और वरुण धवन जोकि एक सिलाई वाले दर्जी है दोनो के बीच एक प्यारी से प्रेम कहानी दिखाई गई है। खैर हम यहां आपको फिल्म की डिटेल्स नहीं दे रहे, बल्कि चंदेरी के बारे में कुछ दिलचस्प बतायेंगे और जानेंगे चंदेरी को

कहां है चंदेरी?

कहां है चंदेरी?

मालवा और बुंदेलखंड की सीमाओं से लगा हुआ चंदेरी हरे भरे जंगलों और सुन्दर झीलों से घिरा हुआ है तथा विंध्य की पहाड़ियों पर स्थित है।Pc:LRBurdak

महाभारत से है सम्बंधित

महाभारत से है सम्बंधित

इस ऐतिहासिक नगर का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। 11वीं शताब्दी में यह नगर एक महत्त्वपूर्ण सैनिक केंद्र था और प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी यहीं से होकर गुजरते थे। कहा जाता है कि,चंदेरी फैब्रिक की खोज शिशुपाल (भगवान श्रीकृष्ण की बुआ के बेटे) ने की थी।Pc: Kriteesh

चंदेरी साड़ियाँ

चंदेरी साड़ियाँ

बनारसी,सिल्क और चिकन की साड़ियों की तरह चंदेरी साड़ियां भी अपनी अनूठी प्रिंट और डिजाइन के चलते लोगों के बीच खासा प्रसिद्ध हैं, आमजन ही नहीं बल्कि चंदेरी साड़ियों से प्रभावित होकर बॉलीवुड कलाकार भी चंदेरी साड़ियां खरीदने जा चुके हैं। कहा जाता है कि, दूसरी शताब्दी से ही यह बुनकरों का केंद्र रहा है। विंध्यांचल का यह इलाका बुनकरी के लिए तब से ही जाना जाता रहा है। चंदेरी साड़ियाँ, तीन तरह के मशहूर एवं शुद्ध फैब्रिक प्योर सिल्क, चंदेरी कॉटन और सिल्क कॉटन से निर्मित की जाती हैं।

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बूढ़ी चन्देरी

बूढ़ी चन्देरी

ओल्ड चन्देरी सिटी को बूढ़ी नाम से जाना जाता है। 9वीं और 10वीं शताब्दी में बने जैन मंदिर यहां के मुख्य आकर्षण हैं। जिन्हें देखने हेतु हर साल बड़ी संख्या में जैन धर्म के अनुयायी आते हैं।Pc: Baburnama

चंदेरी पुरातात्विक संग्रहालय

चंदेरी पुरातात्विक संग्रहालय

चंदेरी पुरातात्विक संग्रहालय का निर्माण चंदेरी के इतिहास और संस्कृति को जीवित रखने के लिए किया गया है। इस संग्रहालय के द्वार आम जनता के लिए 3 अप्रैल,1999 को खोले गए। इस संग्रहालय में पाए जाने वाले स्थापत्य स्मारक और मूर्तियाँ चंदेरी और इसके आसपास के स्थानों से लाए गए हैं तथा स्थानीय लोगों द्वारा किये गए संग्रह से एकत्रित किये गए हैं।

कोशक महल

कोशक महल

इस महल को 1445 ई. में मालवा के महमूद खिलजी ने बनवाया था। यह महल चार बराबर हिस्सों में बंटा हुआ है। कहा जाता है कि सुल्तान इस महल को सात खंडों में बनवाना चाहते थे, लेकिन मात्र तीन खंड ही बनवा सके। महल के हर खंड में बालकनी, खिड़कियाँ और छत पर की गई शानदार नक्काशियाँ हैं।Pc: Prasoon Kaushik

चंदेरी किला

चंदेरी किला

चंदेरी किला चंदेरी का सबसे प्रसिद्ध स्मारक है। 11 वीं शताब्दी में राजा कीर्ति पाल द्वारा निर्मित यह किला पहाड़ी पर स्थित है, जोकि करीबन 71 मीटर ऊँचा है जोकि 5 किमी लम्बी दीवार से घिरा हुआ है। इस किले पर कई बार आक्रमण किये गए और अनेक बार इसका पुन: निर्माण किया गया।इस किले में तीन प्रवेश द्वार हैं। सबसे ऊपर के द्वार को हवापुर दरवाज़ा कहा जाता है और सबसे नीचे के द्वार को खूनी दरवाज़ा कहा जाता है। किले के दक्षिण पश्चिम में एक रोचक दरवाज़ा है जिसे कट्टी-घट्टी कहा जाता है।Pc:LRBurdak

ईसागढ़

ईसागढ़

चंदेरी से 45 किमी की दूरीपर स्थित यह जगह अपने अपने खूबसूरत मन्दिरों के चलते पर्यटकों के बीच विख्यात है, ईसागढ़ में दसवीं शताब्दी की शैली के मंदिर निर्मित है जिनमे एक क्षतिग्रस्त बौद्ध मठ भी देखा जा सकता है।

कैसे जाएं चंदेरी

कैसे जाएं चंदेरी

वायुमार्ग
ग्वालियर चंदेरी का निकटतम एयरपोर्ट है। जो लगभग 227 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध रहती हैं।

रेलमार्ग
अशोक नगर, ललितपुर चंदेरी का निकटतम रेलवे स्टेशन है। यहाँ से बसों और टैक्सियों की सुविधा है।

सड़क मार्ग
राज्य के अधिकांश हिस्सों से सड़क मार्ग द्वारा चंदेरी पहुँच सकते हैं। झाँसी, ग्वालियर, टीकमगढ़ आदि शहरों से नियमित बस एवं टैक्सी की सुविधा रहती है।

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