
हिमाचल की खूबसूरती को बया करती कसौली सोलन जिले का एक बहुत ही नायाब हिल स्टेशन है, जिसे देखने की ख्वाहिश लगभग हर पर्यटक की होती है। शिमला के तकरीबन 80 किमी. की दूरी पर स्थित कसौली भारत के सबसे साफ शहरों में से एक है। इसे हिमाचल का छोटा शिमला भी कहा जाता है। कसौली का जिक्र रामायण काल में भी किया गया है। इतिहास की बात की जाए तो इसका इतिहास भी काफी गहरा है, आइए इस लेख के माध्यम से कसौली के इतिहास और पौराणिक कथा पर एक नजर डालते हैं।

पौराणिक काल में कसौली...
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब राम की वानर सेना और लंका के राक्षसों के बीच युद्ध लड़ा रहा था, तब मेघनाथ ने लक्ष्मण जी को अपने बाण से मूर्छित कर दिया था, तब हनुमान जी उनके लिए संजीवनी बूटी लेने हिमालय गए थे और उस वक्त उन्होंने पूरा पर्वत ही उठा लिया था। इस दौरान उन्होंने एक पहाड़ी पर कुछ देर के लिए अपना दाया पांव भी टिकाया था, वो स्थान कसौली में ही है, जिसे मंकी प्वॉइंट के नाम से जाना जाता है। इस स्थान की पहाड़ी देखने पर पैर के पंजे की आकार की दिखाई देती है और यहां का एक मंदिर भी है। इस पहाड़ी पर बंदरों की टोलियां भी देखने को मिलती है, जो पर्यटकों के खाने-पीने के सामान छिनने के लिए भी जाने जाते हैं। इसीलिए इस स्थान पर खाद्य सामग्री ले जाना मना है।

कसौली का इतिहास
कसौली की स्थापना 1842 ईस्वी में एक सैन्य स्टेशन के रूप में की गई थी। इसका मुख्य कारण था महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु (1839 ईस्वी)... उनकी मृत्यु के बाद अंग्रेजी हुकूमत पंजाब के साथ एक युद्ध करने की सोचने लगी, जिससे सैनिकों को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने यह स्थान चुना था। अधिकारिक तौर पर देखा जाए तो कसौली सोलन जिले का हिस्सा है, जो कभी शिमला पहाड़ी रियासत की तहसील क्षेत्र हुआ करती थी। सोलन जिले का गठन अधिकारिक तौर पर 1 सितम्बर 1972 ईस्वी को सोलन जिले का निर्माण किया गया, जिसमें कसौली एक शहर व छावनी नगर बनी। इसके पहले यह महासू जिले का एक भाग था। इस शहर पर कई रियासतों ने भी राज किया, हालांकि तब यह शिमला रियासत का हिस्सा थी।

कसौली का नाम कसौली कैसे पड़ा?
किवदंती के अनुसार, 17वीं शाताब्दी के आसपास रेवाड़ी (वर्तमान समय में हरियाणा) के कुछ राजपूत परिवार परेशानियों के चलते अपने घरों को छोड़कर हिमाचल के इलाकों में आकर बस गए, इस गांव का नाम कसुल था, जिसे बाद में धीरे-धीरे कसौली के नाम से पुकारा जाने लगा। इसके अलावा कहा जाता है कि यहां साल भर फूल खिलते हैं, जिसे कुसमावली या कुसमाली कहा जाता है, इससे ही कसौली का जन्म हुआ।

कसौली कैसे बना हिल स्टेशन?
1841 ईस्वी का समय चल रहा था और ऊपर से अगस्त का महीना... इस बीच एक सुबह एक ब्रिटिश अधिकारी हेनरी लॉरेंस व उनकी पत्नी के लिए काली सुबह हुई, उनकी बच्ची का मलेरिया से निधन हो गया, जिसे कसौली में ही दफनाया गया। दम्पती का अपनी बच्ची के लिए काफी प्रेम था, जिसके मरने के बाद उस स्थान पर एक झोपड़ी बनाने का सोचा, जिसे वे देख अपनी बच्ची को याद कर सकें। इस झोपड़ी का नाम 'सनीसाइड' रखा गया। इसी उदासी के साथ कसौली एक हिल स्टेशन के रूप में विकसित हुआ। इस उदासी को आप आज भी यहां महसूस कर सकते हैं। करीब 5000 आबादी वाला यह एक छोटा सा शहर है, जो अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। कसौली में रहने वाले पहले व्यक्ति भी हेनरी लॉरेंस ही थे, ये ब्रिटिश सेना के अधिकारी थे, जिन्होंने बाद में ब्रिटिश सेना के बच्चों के लिए यहां पर पर एक स्कूल बनाया था।

हिमाचल में कसौली से ही शुरू हुआ था 1857 का विद्रोह
भारतीय स्वतंत्रता लड़ाई में हिमाचल का भी योगदान कम नहीं है। विहंगम खूबसूरती वाला यह पहाड़ी राज्य वीर योद्धाओं व स्वंतत्रता सेनानियों की जन्मस्थली रही है। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान कसौली में अंग्रेजों की छावनी थी, जहां से ही पहली हिमाचल में स्वंतत्रता की आग शुरू हुई, जिसमें कई सिपाहियों ने अपनी आहुतियां दी। 1857 ईस्वी, 20 अप्रैल को वो दिन जब 6 भारतीय नायकों ने अंग्रेजी हुकूमत के थाने को फूंक दिया। इसके बाद कईयों को फांसी पर चढ़ा दिया गया, जिससे हिमाचल में स्वतंत्रता की ये आग और तेजी से फैल गई। इस दौरान सिर्फ 45 भारतीय नायकों ने 200 अंग्रेजी सेना को पछाड़ दिया और धनकोष लूटकर जतोग के लिए कूच कर गए।

कसौली में आज चलता अग्रेजी हुकूमत का बनाया हुआ कानून
कसौली ब्रिटिश काल से ही एक छावनी के रूप में जाना जाता है, जहां आज भी आम लोगों को परेशानियां से जुझना पड़ता है, जो अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए थे। यहां के लोगों को अपने ही घर जाने के लिए वाहनों का प्रवेश शुल्क देना पड़ता है और इसके अलावा इतने सालों से यहां रहने के बावजूद इनके पास आज भी इनके ही घर का मालिकाना हक नहीं है। ऊपर से पानी की भी काफी समस्या है, जिसकी जलापूर्ति कसौली छावनी बोर्ड द्वारा किया जाता है।
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