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कोलकाता का परफेक्ट वीकेंड डेस्टिनेशन-विष्णुपुर

विष्णुपुर भारत के पश्चिम बंगाल प्रदेश का एक एक प्रसिद्ध शहर है। मल्ल राजाओं के नाम पर इसे 'मल्लभूमि' भी कहा जाता था।

By Goldi

कभी भारत की राजधानी रह चुका कोलकाता आज भारत के महानगरों में से एक है..साथ ही पश्चिम बंगाल की राजधानी है। यूं तो कोलकाता में घूमने को काफी कुछ है..लेकिन आज हम आपको अपने आर्टिकल के जरिये कोलकाता से पांच घंटे की दूरी पर स्थित खूबसूरत वीकेंड डेस्टिनेशन विष्णुपुर से रुबरु करायेंगे।

विष्णुपुर भारत के पश्चिम बंगाल प्रदेश का एक एक प्रसिद्ध शहर है। मल्ल राजाओं के नाम पर इसे 'मल्लभूमि' भी कहा जाता था। यहां लगभग एक हजार वर्षों तक इन राजाओं का शासन रहा। वैष्णव धर्म के अनुयायी इन मल्ल राजाओं ने 17वीं व 18वीं सदी में जो मशहूर टेराकोटा मंदिर बनवाए थे, वे आज भी शान से सिर उठाए खड़े हैं। यहां के मंदिर बंगाल की वास्तुकला की जीती-जागती मिसाल हैं।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से कोई दो सौ किमी दूर बसा यह शहर राज्य के प्रमुख पर्यटनस्थलों में शामिल है। खासकर मेले के दौरान तो यहां काफी भीड़ जुटती है। मल्ल राजा वीर हंबीर और उनके उत्तराधिकारियों- राजा रघुनाथ सिंघा व वीर सिंघा ने विष्णुपुर को तत्कालीन बंगाल का प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।

विष्णुपुर शहर टेराकोटा के मंदिरों, बालूचरी साड़ियों व पीतल की सजावटी वस्तुओं के अलावा हर साल दिसंबर के आखिरी सप्ताह में लगने वाले मेले के लिए भी मशहूर है। यह मेला कला व संस्कृति का अनोखा संगम है। यहां दूर-दूर से अपना हुनर दिखाने कलाकार आते हैं तो उनकी कला के पारखी पर्यटक भी आते हैं। साल के आखिरी सप्ताह के दौरान पूरा शहर उत्सव के रंगों में रंग जाता है।

कैसे जाएँ

कैसे जाएँ

विष्णुपुरा कोलकाता से चार से पांच घंटे की ड्राइव कर आसानी से पहुंचा जा सकता है। शहर में प्रवेश करते ही आपको एक बड़ा सा दरवाजा नजर आएगा..जिसे देखते ही आप उस पुराने राजा महाराजायों के जमाने में चले जायेंगें ।

रूट 1- कोलकाता-हरिपाल-बेन्गाई-कोतुलपुर-विष्णुपुर...इस रूट से जाने पर विष्णुपुर पहुँचने में करीब चार घंटे का समय लगेगा..इस रूट से कोलकाता से विष्णुपुर की दूरी करीबन 140 किमी है।

रूट 2-
कोलकता-धनियखली-जमलापुर-इंदस -विष्णुपुर...इस रूट से जाने पर विष्णुपुर पहुँचने में करीब चार घंटे 15 मिनट का समय लगेगा...इस रूट से कोलकाता से विष्णुपुर की दूरी करीबन 180 किमी है।

विष्णुपुरा

विष्णुपुरा

बांकुड़ा के एक शहर बिष्णुपुर का इतिहास, 4 वीं शताब्दी वंश की ओर हमे ले जाता है..इसके अलावा इस शहर की स्थापना का श्रेय मल्ला राजायों को दिया जाता है। यहां वैष्णवई मल्ला राजाओं द्वारा निर्मित स्थित टेरोकोटा मंदिर इस बात साक्ष्य है कि,कभी मल्ला राजायों का शासन था। विष्णुपुरा कोलकाता से पांच घंटे की ड्राइव कर आसानी से पहुंचा जा सकता है। शहर में प्रवेश करते ही आपको एक बड़ा सा दरवाजा नजर आएगा..जिसे देखते ही आप उस पुराने राजा महाराजायों के जमाने में चले जायेंगें ।

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 क्या देखा जा सकता है बिष्णुपुरा में

क्या देखा जा सकता है बिष्णुपुरा में

विष्णुपुरा में स्थित ऐतिहासिक इमारते यहां की गौरवगाथ ,हार और संस्कृती का गुणगान करती हुई नजर आती है। यहां स्थित सभी इमारते आपको एक अलग ही दुनिया में लेकर जाती हैं..जिसकी कल्पना करना भी मुमकिन नहीं है।

pc:Amartyabag

दलमद्ल तोप

दलमद्ल तोप

यहां स्थित करीबन 3.8 मीटर रखी तोप मल्ला राजायों की मराठाओं पर विजयी का सबूत दिखाती है।

PC: Amartyabag

टेरोकोटा मंदिर

टेरोकोटा मंदिर

पश्चिम बंगाल में हरी-भरी घासों के बीच लाल रंग के इन टेराकोटा के मंदिरों का निर्माण 17वीं और 18वीं सदी में किया गया था। ये मंदिर न सिर्फ़ एक सुंदर धरोहर हैं, बल्कि इनका इतिहास भी काफ़ी पवित्र है। विष्णुपुर का ये मंदिर भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है। इन मंदिरों को गंगा नदी डेल्टा की जलोढ़ मिट्टी से बनाया गया है। इनकी संरचनाओं पर बेहतरीन नर्तकों और प्रकृति से संबंधित चित्रों की चित्रकारी की गई है।

PC:Biswarup Ganguly

 मदनमोहन मन्दिर

मदनमोहन मन्दिर

मदनमोहन मन्दिर क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध मन्दिर है और इसे 16वी शताब्दी में राजा दुर्जन सिंह देव ने अपने पारिवारिक आराध्य भगवान कृष्ण और राधा के सम्मान में बनवाया था। आप मन्दिर के पवित्र रथ शैली वास्तुकला तथा इसकी दीवार पर अंकित रामायण और महाभारत जैसे हिन्दू धार्मिक पुस्तकों की कहानियों के सम्मिश्रण की सराहना अवश्य करेंगें।

PC:Ajit Kumar Majhi

रसमंचा

रसमंचा

रसमंचा बिष्णुपुर का सबसे पुराना ईंटों से बना मन्दिर है और इसमें भगवान कृष्ण की प्रतिमा और ग्रन्थ पाये जाते हैं। यहाँ पर रश महोत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है और पक्की मिट्टी से बने सामान और घोड़े खरीदने का अच्छा मौका रहता है।

लाल बांध

लाल बांध

विष्णुपुरा में स्थित इस झील को भूतिया झील कहा जाता है,इस कृत्रिम झील का निमार्ण महान मल्ला राजा रघुनाथ सिंह ने अपनी फारसी प्रेमी लालाबाई को उपहार के रूप में देने के लिए बनवाई थी, जो एक मशहूर शास्त्रीय नर्तकी थी।
लेकिन लाल बाई को राजा की हिन्दू पत्नी ने मार दिया था, जिसके बाद वह अपने पुत्र के साथ इस कुएं में कूद गयी...आसपास के लोगो का मानना है कि, आज भी इस झील में लाल बाई के सिसकने की आवाज को सुना जा सकता है।

शॉपिंग

शॉपिंग

टेराकोटा विष्णुपुर की पहचान है। यहां इससे बने बर्तनों के अलावा सजावट की चीजें भी मिलती हैं। मेले में तो एक सिरे से यही दुकानें नजर आती हैं। इसके अलावा पीतल के बने सामान भी यहां खूब बनते व बिकते हैं। इन चीजों के अलावा यहां बनी बालूचरी साड़ियां देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर हैं। इन साड़ियों पर महाभारत व रामायण के दृश्यों के अलावा कई अन्य दृश्य कढ़ाई के जरिए उकेरे जाते हैं। बालूचरी साड़ियां किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इन साड़ियों ने अपनी अलग पहचान कायम की है।

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