लद्दाख की मरखा वैली ट्रेकिंग को बेस्ट और सबसे लोकप्रिय ट्रेकिंग में गिना जाता है। पूरी ट्रेकिंग का रास्ता ऊंचे पहाड़ों के बीच घाटी और वहां बसे बहुत ही सुन्दर गांवों से होकर गुजरता है। इस ट्रेकिंग के दौरान सिर्फ लद्दाख की बंजर खुबसूरती और पहाड़ियों से ही नहीं बल्कि स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिन्दगी को और भी करीब से देखने का मौका प्रदान करती है।

मरखा घाटी हेमिस नेशनल पार्क का हिस्सा है, जो यहां पाए जाने वाले हिम तेंदुओं का घर है। स्थानीय ग्रामीण भी पर्यटकों का तहे दिल से स्वागत करते हैं।
भारत का सबसे ग्रामीण क्षेत्र
मरखा वैली हेमिस नेशनल पार्क के अंदर स्थित है, जो भारत का सबसे बड़ा नेशनल पार्क है। यह भारत का सबसे अधिक ग्रामीण इलाका भी है। मरखा वैली की ट्रेकिंग पर आने वाले पर्यटकों को गांव के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जो यहां की शानदार सुन्दरता के साथ ही बर्फ से ढंकी चोटियों, हरियाली, ऊंचाई पर मौजूद रेगिस्तान से होकर गुजरती बलखाती मरखा नदी की खुबसूरती को अनुभव करने का भी मौका देती है।
चौंकाते हैं यहां के नजारे

मरखा वैली की अधिकांश ट्रेकिंग उबड़-खाबड़ जमीन से होकर ही करनी पड़ती है। कभी-कभी कंग यत्से और स्तोक कंगड़ी की ऊंची लेकिन बंजर चोटियां भी दिखाई देती हैं। इसी बीच रेगिस्तान में पानी की तरह आपको चौंकाते हुए अगर कहीं गहरी हरियाली और आपका स्वागत करते स्थानीय लोग दिख जाएं तो चौंक मत जाइएगा। लद्दाख की मरखा वैली की ट्रेकिंग ऐसी है, जो हर एडवेंचरप्रेमी को आकर्षित करती है और यहां के नजारें, कभी बंजर जमीन तो कभी गहरी हरियाली लोगों को चौंकाते हैं।
Tea House ट्रेक

जी हां, आपने सही पढ़ा। Tree नहीं बल्कि मरखा वैली ट्रेकिंग में आपको Tea हाउस ट्रेकिंग का मौका मिलेगा। दरअसल, ट्रेकिंग के दौरान रास्ते में कई छोटे-छोटे गांव मिलेंगे। स्थानीय लोग अपने गांवों व घरों में सैलानियों का बड़े ही प्यार के साथ स्वागत भी करते हैं। इसलिए इस ट्रेकिंग पर आने वाले पर्यटकों को स्थानीय होमस्टे और टीहाउस में रहने का मौका भी मिलता है। इन गांवों में कुछ पल रुककर आप परंपरागत लद्दाखी दिनचर्या को अनुभव कर सकते हैं।
लेपर्ड को कहें Hello-Hii

मरखा वैली हेमिस नेशनल पार्क के अंदर मौजूद है। इसलिए संभावना है कि ट्रेकिंग के रास्ते में आपका कुछ जंगली जानवरों से सामना भी हो जाए। रास्ते में आइबेक्स, ब्लू शिप और मर्मोट्स जैसे जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का मौका मिल सकता है। अगर आपकी किस्मत अच्छी हुई तो संभव है कि कोई स्नो लेपर्ड भी रास्ते में आपको Hello कहने के लिए आ जाए। हालांकि स्नो लेपर्ड काफी शर्मिले जानवर होते हैं। इसलिए इंसानों से वे अपनी दूरी बनाकर ही रहते हैं। लेकिन ऐसे किसी शर्मिले जंगली पशु को उसके अपने प्राकृतिक परिवेश में देखना भी काफी रोमांचक होगा...है न।
मरखा वैली ट्रेक की Itinerary

मरखा वैली ट्रेक लगभग 120 किमी लंबा रास्ता है। याद रखें, यह ट्रेकिंग है जिसे उबड़-खाबड़ पहाड़ियों और रास्तों से होकर पूरा करना पड़ता है। इसलिए समतल जमीन के मुकाबले इसे पूरा करने में ज्यादा लंबा वक्त लग सकता है। सामान्य तौर पर इस ट्रेक को पूरा करने में करीब 8-10 दिनों का समय लग सकता है। इस ट्रेक की शुरुआत बहुत ही सुन्दर गांव चिलिंग से शुरू होती है और लेह में जाकर खत्म होती है। रास्ते में कई मुश्किल पड़ाव भी आते हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मुश्किल पड़ाव नीमालिंग, कोंगमारु ला, चोक्दो और शांग सुम्दो है। इस ट्रेक को पूरा करने के लिए आपका मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत होना अनिवार्य है।
इस ट्रेक के लिए पैकिंग करते समय ध्यान रखें कि सिर्फ वहीं सामान आपके पास हो, जिनकी यहां बहुत ज्यादा जरूरत पड़ने वाली है। जैसे गर्म कपड़े, आरामदायक हाइकिंग बुट्स, रुकने के लिए टेंट, रियूजेबल पानी के बोतल, पानी को साफ बनाने वाली दवाईयां और सबसे ज्यादा जरूरी है परमीट। लद्दाख एक संवेदनशील ज़ोन है, इसलिए यहां ट्रेकिंग के लिए परमिट की जरूरत होती है।



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