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सौर तूफान से लाल हुआ लद्दाख, हानले से जारी फोटो सोशल मीडिया पर मचा रही धूम

शनिवार की देर रात लद्दाख के एक हिस्से में अचानक आसमान गहरे लाल रंग का चमकने लगा। जी नहीं, रात के अंधेरे में आसमान आग के गोले बरसाने की तैयारी नहीं कर रहा था बल्कि यह सौर तूफान के कारण ऐसा नजर आ रहा था। लगभग 20 सालों के बाद दुनिया के सबसे शक्तिशाली सौर तूफानों में एक सौर तूफान पृथ्वी से टकराया था।

उसके प्रभाव के कारण ही भारत में लद्दाख से लेकर तस्मानिया और ब्रिटेन तक में आसमान में अलग-अलग रंगों की छटा देखने को मिली। हालांकि इस सौर तूफान के कारण कई सैटेलाइट्स और पावर ग्रिड्स को नुकसान पहुंचने की जानकारी भी मिली है।

ladakh hanle dark night reserve

अमेरिकी वैज्ञानिक संस्था 'नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन' (NOAA) से मिली जानकारी के अनुसार एक सप्ताह तक इस सौर तूफान का असर बना रहेगा। सौर तूफान अथवा कोरोनल मास इजेक्शन सूर्य के क्षेत्र से होता है जिसके कारण कई उच्च ऊर्जा वाली सौर ज्वालाएं उत्पन्न हो रही हैं। इसमें से कुछ ज्वालाएं 800 किमी प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी से टकरा रही हैं।

मिली जानकारी के अनुसार शनिवार की देर रात से ऑस्ट्रिया, जर्मनी, स्लोवाकिया, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क और पोलैंड में स्काईवॉचर्स ने उत्तरी गोलार्ध के उच्च अक्षांशों में आसमान में शानदार ऑरोरा (Aurora) यानी उत्तरी रोशनी को जगमगाते हुए देखा है। यहीं ऑरोरा भारत में लद्दाख के हानले डार्क स्काई रिजर्व में भी लाल रंग में जगमगाता दिखाई दिया है। लोग इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर खूब शेयर कर रहे हैं।

रात के 1 बजे से जगमगा रहा था आसमान

लद्दाख के हानले डार्क स्काई रिजर्व के वैज्ञानिकों ने शनिवार की देर रात को लगभग 1 बजे आकाश में लाल रंग की चमक देखी जो सुबह तक जारी रही। हानले डार्क स्काई रिजर्व की एक इंजीनियर स्टैनजिन नोर्ला ने मीडिया से हुई बातचीत में कहा कि हम नियमित दूरबीन अवलोकन कर रहे थे, जब हमने ऑल स्काई कैमरे पर ऑरोरा गतिविधि देखी। हम भाग्यशाली थे।

aurora ladakh hanle dark night reserve ladakh

उन्होंने बताया कि आसमान में एक कोने पर हल्की लाल रंग की चमक दिखाई दे रही थी और यह घटना हानले डार्क स्काई रिजर्व के डीएसएलआर कैमरे में अच्छी तरह से कैद भी हुई। बताया जाता है कि आसमान में लाल रंग की यह चमक शनिवार (11 मई) की रात को 1 बजे से 3.30 बजे तक छाई रही। आसमान पहले लाल और कुछ देर बाद गुलाबी रंग का हो गया था।

यह घटना स्थिर ऑरोरा चाप कहलाया

हानले में भारतीय खलोलीय वेधशाला के एक इंजीनियर दोरजे अंगचुक ने इस घटना को स्थिर ऑरोरा चाप (Stable Auroral Arc) के रूप में वर्णित किया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उत्तरी या दक्षिणी ध्रुवों में जो ऑरोरा देखा जाता है वह गतिशील घटनाएं हैं। वह बदलता रहता है, लेकिन लद्दाख में जो देखा गया वह स्थिर था। इसे स्थिर ऑरोरा लाल चाप कहा जाता है।

लाल रंग की यह चमक कुछ घंटों तक लद्दाख के आकाश में स्थिर बनी रही। एक अन्य वैज्ञानिक ने हानले में हुई इस घटना को दुर्लभ करार दिया क्योंकि यह सुदूर दक्षिण में स्थित है। बताया जाता है कि पिछले 2 दशकों ऐसी कोई खगोलिय घटना नहीं घटी थी। इससे पहले साल 2003 में भीषण भू-चुम्बकीय तूफान की वजह से स्वीडन में बिजली गुल हो गयी थी और दक्षिण अफ्रीका में बिजली के ट्रांसफार्मरों को भी नुकसान पहुंचा था।

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