लद्दाख में होने वाला है सबसे अनोखा मैराथन। लद्दाख के हिमालय ग्लेशियर में होने वाले पर्यावरण परिवर्तन को केंद्र कर इस मैराथन का आयोजन भारत की सबसे अधिक ऊंचाई पर मौजूद झील, पैंगॉन्ग लेक के किनारे किया जाएगा। बता दें, साल के इस समय लद्दाख का पैंगॉन्ग लेक पूरी तरह से जमा होगा है।
समुद्रतल से लगभग 4350 मीटर की ऊंचाई पर एक जमे हुए झील के किनारे मैराथन दौड़ना निश्चित रूप से अपने-आप में बेहद मुश्किल चुनौती होने वाला है। इस मैराथन का आयोजन एडवेंचर स्पोर्स्ट फाउंडेशन ऑफ लद्दाख (ASFL) के साथ मिलकर लद्दाख प्रशासन और टूरिज्म विभाग करने वाली है।

फ्रोजेन पैंगॉन्ग लेक मैराथन का यह दूसरा संस्करण होगा, जिसका आयोजन 20 फरवरी को किया जाएगा। इससे पहले नॉर्वे का आइसबग फ्रोजेन लेक मैराथन भी काफी लोकप्रिय हो चुका है। इस साल पैंगॉन्ग फ्रोजेन लेक मैराथन में करीब 50 धावक हिस्सा लेंगे। सर्दियों के मौसम में मैराथन में दौड़ना ही अपने आप में काफी रोमांचक होता है लेकिन यह दौड़ किसी फ्रोजेन लेक के किनारे हो, तो रोमांच कई गुणा ज्यादा बढ़ जाती है...है न।
खास बात है कि इस मैराथन का नाम आधिकारिक तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया की सबसे अधिक ऊंचाई पर फ्रोजेन लेक हाफ मैराथन के तौर पर भी दर्ज हो चुका है। इससे बदलते पर्यावरण पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के साथ-साथ छांगथांग में सर्दियों के मौसम में पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। इस साल जमी हुई पैंगॉन्ग लेक में फुल और हाफ दोनों मैराथन का आयोजन किया जाएगा।

धावकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल टीम यहां लगातार तैनात रहेगी। इसके साथ ही हर 5 किमी के विश्राम स्थल पर हॉट वाटर प्वाएंट बनाएं जाएंगे। पूरी मैराथन के दौरान धावकों के साथ एक एंबुलेंस लगातार चलेगी।
जमी हुई पैंगॉन्ग लेक में आयोजित होने वाले इस मैराथन में हिस्सा लेने वाले सभी धावकों से हेड टॉर्च, गर्म जैकेट, रेनकोट जैसी वस्तुओं को अपने साथ रखने की सलाह दी गयी है, ताकि दुनिया की सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित इस लेक में होने वाले मैराथन के दौरान आने वाली चुनौतियों का सामना किया जा सकें। बता दें, इस मैराथन के दौरान प्लास्टिक के बोतलों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और न ही किसी भी तरह की ऐसी वस्तु का इस्तेमाल किया जाएगा जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।



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