
यहाँ पर्यटकों के लिए दर्शनीय स्थलों के भण्डार हैं। जहाँ नज़र उठाओ वहां आपको खूबसूरत नज़ारे ही नज़र आएंगे। हिमखंडों से घिरी आकर्षक झीलें, आसमान छोटे पर्वतों के शिखर, ठंडी हवा के झौंके और चारों हरी-भरी हरियाली यह सब लाहुल-स्पीति को पर्यटक स्थलों में नया मुकाम दिलाते हैं।


माना जाता है कि मंदिर को रात भर में देवताओं द्वारा निर्मित किया गया था, बाद में लोत्साव रिनचेन झेंपो ने यहां एक विलो वृक्ष लगाया, जिसकी पूजा यहां वाले श्रद्धालु करते हैं।
नौ मंदिरों का था परिसर
बताया जाता है कि, पहले इस जगह करीबन 9 मंदिर बने, जो एक जीर्ण दीवार के अंदर आज भी समाहित हैं। किंवदंती यह है, कि पहाड़ समय-समय पर भगवान के मनोदशा के अनुरूप रंग बदलता है; उदाहरण के लिए, क्रोध के लिए लाल या आनन्द के लिए पीला रंग।

किंवदंतियों है कि मठ के आसपास के पहाड़ों का रंग ईश्वर के मूड के आधार पर बदलता है .. लाल जब गुस्से में हों, नीले जब उन्हें दर्द होता है और पीले जब खुश होते हैं। जब इस मठ का निर्माण किया था, तब यह भिक्षुयों की शिक्षा का केंद्र बना हुआ है। लेकिन आज यह जगह सिर्फ 45 घरों का गांव रह गया है।
इस मठ को स्वर्ण मंदिर इसलिए कहा जाता है कि, क्यों कि इस मंदिर में रखे हुए भगवान की मूर्तियाँ सोने की है। यह मंदिर सर्खांग के रूप में भी जाना जाता है और यह 50 से अधिक देवी-देवताओं की सजी हुई छवियों की खूबसूरती से सुशोभित दीवारों के साथ एक उत्तम कक्ष है।

विडंबना यह है कि ज्यादातर पर्यटक स्पीती घूमने आते हैं, लेकिन इस खूबसूरत जगह को नहीं घूम पाते, यह एक बेहद ही खूबसूरत जगह है,जिसे अहर यात्री को जरुर घूमना चाहिए।
कैसे पहुंचे?
लाहुंग काजा और ताबो के बीच में स्थित है..धनकर मठ से यहां एक घंटे की ड्राइव कर आसानी से पहुंचा जा सकता है।



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