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बिहार में सालों से मजबूती के साथ पैर जमाएं खड़े हैं ये ब्रिज - कुछ तो 100 साल से भी हैं पुराने, List

बिहार इन दिनों खबरों की सूर्खियों में छाया हुआ है। जी नहीं, किसी राजनीतिक या सांस्कृतिक कारण से नहीं बल्कि पिछले 17 दिनों में एक के बाद एक धराशायी हुए करीब 12 ब्रिज की वजह से। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नदियों पर बने ये ब्रिज न सिर्फ दो शहरों या गांवों को जोड़ने का काम करते थे बल्कि ग्रामीण इलाकों को शहरों से जोड़ने का एकमात्र साधन भी थे।

बारिश, नदियों के जलस्तर में वृद्धि व अन्य कई कारणों की वजह से अकेले सारण जिले में मात्र 2 दिनों में एक के बाद एक 3 ब्रिज ध्वस्त हो गये जिसमें से एक गंडकी नदी पर बना ब्रिज 15 साल पुराना था। हालांकि इन घटनाओं में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं मिली है लेकिन ब्रिज टूटने की इन घटनाओं में 15 इंजीनियरों पर राज्य सरकार की गाज जरूर गिरी और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है।

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बहरहाल, ब्रिज के टूटने की वजह चाहे जो भी हो, वह जांच का विषय है लेकिन आज हम बिहार में टूटते ब्रिज की नहीं बल्कि उन ब्रिज की बात करने वाले हैं जो सालों साल मजबूती के साथ तनकर खड़े हैं। इनमें से कुछ ब्रिज की उम्र तो 100 साल से भी ज्यादा है। हम जिन ब्रिज की बात आज करने वाले हैं उनमें एक समय भारत का सबसे लंबा रोड ब्रिज रहा पटना का गांधी सेतु से लेकर 150 साल पुराना हाजीपुर-सोनपुर को जोड़ने वाला गंडक ब्रिज भी शामिल है।

बिहार के सबसे पुराने ब्रिज, जो आज भी मजबूती के साथ खड़े हैं :

  • विक्रमशीला सेतु (भागलपुर-नौगछिया)
  • महात्मा गांधी सेतु (पटना-हाजीपुर)
  • कोइलवार ब्रिज (आरा-पटना)
  • राजेंद्र सेतु (मोकामा-सिमरिया)
  • नेहरु सेतु (डेहरी-ऑन सोन- सोन नगर)
  • जय प्रकाश सेतु (दीघा-सोनपुर)
  • श्रीकृष्ण सेतु (मुंगेर-जमालपुर)
  • बख्तियारपुर-तेजपुर ब्रिज
  • गंडक ब्रिज (हाजीपुर-सोनपुर)

इन ब्रिज के बारे में विस्तृत जानकारी देते हैं :

विक्रमशीला सेतु (भागलपुर-नौगछिया)

गंगा नदी पर बना यह ब्रिज भागलपुर और नौगछिया शहरों को जोड़ने के लिए NH 80 और NH 31 के बीच बना हुआ है। इस ब्रिज का निर्माण राजा धर्मपाल (783 से 820 AD) ने करवाया था। ब्रिज का नाम महावीर विक्रमशीला के नाम पर रखा गया था। किसी जमाने में 4.7 किमी लंबा विक्रमशीला सेतु दुनिया का सबसे लंबा ब्रिज हुआ करता था।

महात्मा गांधी सेतु (पटना-हाजीपुर)

गंगा नदी पर बना महात्मा गांधी सेतु की लंबाई लगभग 5 किमी है। यह ब्रिज पटना को हाजीपुर से जोड़ता है। मई 1982 में तत्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस ब्रिज का उद्घाटन किया था। इस ब्रिज को बनने में करीब 10 सालों का समय लग गया था। राजधानी पटना को राज्य के दूसरे हिस्सों से जोड़ने में इस ब्रिज की बहुत बड़ी भूमिका है।

कोइलवार ब्रिज (आरा-पटना)

सोन नदी पर बने इस ब्रिज को अब्दुल बरी ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण वर्ष 1856 में शुरू हुआ था और 1862 में निर्माण कार्य संपन्न हुआ था। ब्रिज का उद्घाटन अंग्रेजी हुकुमत के वायसराय लॉर्ड एल्गिन ने किया था। वर्ष 1900 तक, जब सोन ब्रिज का निर्माण नहीं हुआ, यह भारत का सबसे लंबा ब्रिज था।

गंडक ब्रिज (हाजीपुर-सोनपुर)

गंडक नदी पर हाजीपुर और सोनपुर के बीच बने इस ब्रिज का निर्माण 1873 में ब्रिटिश काल में करवाया गया था। कहा जाता है कि पिछले 25 सालों से इस ब्रिज का रखरखाव नहीं हो पाया है, इसके बावजूद यह ब्रिज आज भी बड़ी ही मजबूती के साथ खड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भले ही नये पुल ढह जाएं लेकिन रखरखाव न होने के बावजूद यह ब्रिज सालों साल मजबूती के साथ खड़ा रहेगा।

वर्तमान समय में इस ब्रिज पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक जरूर है लेकिन अन्य वाहनों का भारी दबाव यह ब्रिज सालोंसाल झेल रखा है। खासतौर पर हर साल सोनपुर में लगने वाला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला हरिहर क्षेत्र मेला के समय यह तीर्थ यात्रियों व वाहनों की भीड़ का दबाव झेल लेता है।

राजेंद्र सेतु (मोकामा-सिमरिया)

यह पहला ब्रिज था, जिसने उत्तर और दक्षिण बिहार का मिलन करवाया था। पटना जिले के मोकामा और बेगुसराय जिले के सिमरिया के बीच रेल-कम-रोड ब्रिज का शिलान्यास भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने और इसका उद्घाटन पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु व बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिन्हा ने किया था। लगभग 2 किमी लंबा 6 लेन वाले इस रेल-कम-रोड ब्रिज का उद्घाटन वर्ष 1959 में किया गया था।

नेहरु सेतु (डेहरी-ऑन सोन- सोन नगर)

इस ब्रिज को पहले अपर सोन ब्रिज के नाम से भी जाना जाता था। किसी समय यह केरल के वेम्बनाड रेल ब्रिज के बाद भारत का दूसरा सबसे लंबा रेल ब्रिज था। इस ब्रिज का निर्माण 1963-65 के बीच हुआ था। हालांकि बाद में इस ब्रिज से होकर सिर्फ मालगाड़ियां ही आवाजाही करती थी।

जय प्रकाश सेतु (दीघा-सोनपुर)

पटना के दीघा घाट से सोनपुर के पहलेजा घाट के बीच गंगा नदी पर बने इस ब्रिज को स्थानीय लोग दीघा ब्रिज के नाम से भी जानते हैं। अगस्त 2015 में इस ब्रिज का निर्माण पूरा हुआ था। राजेंद्र सेतु के बाद बिहार के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से को आपस में जोड़ने का प्रमुख काम यह ब्रिज करती है।

इस ब्रिज के बन जाने से पटना से हाजीपुर या मुजफ्फरपुर की तरफ आने वाली गाड़ियों को महात्मा गांधी सेतु पर लगने वाली घंटों के जाम में फंसने की जरूरत नहीं होती है। वे इस ब्रिज से होकर सोनपुर होकर सीधे हाजीपुर के रास्ते मुजफ्फरपुर तक पहुंच सकते हैं।

श्रीकृष्ण सेतु (मुंगेर-जमालपुर)

इस ब्रिज को मुंगेर गंगा ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है। यह एक रेल-कम-रोड ब्रिज है जिसकी लंबाई लगभग 3.19 किमी है। यह ब्रिज बिहार के बेगुसराय और खगड़िया जिले को रेलवे डिविजनल मुख्यालय मुंगेर से जोड़ने का काम करता है। साल 2002 में इस ब्रिज के निर्माण की शुरुआत तत्कालिन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की थी।

बख्तियारपुर-ताजपुर ब्रिज

पटना जिले के बख्तियारपुर और समस्तीपुर जिले के ताजपुर को जोड़ने वाला गंगा नदी पर बना यह ब्रिज भी उत्तर और दक्षिण बिहार को सड़क मार्ग से जोड़ने का काम करता है। इस ब्रिज के निर्माण का शिलान्यास साल 2011 में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने किया था। कहा जाता है कि यह ब्रिज महात्मा गांधी सेतु के जाम को कम करने और राजधानी पटना के ट्रैफिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने में काफी कारगर साबित होता है।

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