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उत्तराखंड के कण-कण में बसते हैं शंकर, ये हैं यहां के प्रसिद्ध शिव मंदिर

कहा जाता है कि उत्तराखंड के कण-कण में भगवान शिव का वास होता है। ऐसे में यहां भगवान शिव के हजारों मंदिर मिल जाएंगे, लेकिन आज हम आपके लिए उन चुनिंदा मंदिरों की लिस्ट लेकर आए हैं, जो उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिर है।

भगवान शिव एक ऐसे देवता हैं, जिन्हें संहार का देवता कहा जाता है, ये त्रिदेवों में से एक हैं। इनके काल भैरव अवतार को तंत्र साधना का देवता भी कहा जाता है। भगवान शिव ही एकमात्र ऐसे देवता हैं, जिन्हें शिवलिंग व मूर्ति दोनों रूपों में पूजा जाता है। भगवान अपने सौम्य व रौद्र दोनों रूपों के लिए जाने जाते हैं। इन्हें 'आदियोगी' और देवों के देव 'महादेव' के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव की शक्ति देवी व अर्धांगिनी माता पार्वती है।

आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से बात करने जा रहे हैं उत्तराखंड के उन मंदिरों की, जो न सिर्फ उत्तराखंड में बल्कि पूरे भारत में सबसे अधिक प्रचलित है। ये शिव हजारों साल पुराने हैं, जिनका वर्णन वेदों और पुराणों में मिलता है। ये सभी मंदिर अपने धार्मिक महत्व व इतिहास के लिए जाते हैं, इन छुट्टियों में अगर आप भी बाबा के धाम की यात्रा करना चाहते हैं तो देर न कीजिए, बैग पैक कर लीजिए और बाबा के धाम की ओर निकल पड़िए।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध शिव मंदिर

केदारनाथ धाम, रुद्रप्रयाग

केदारनाथ धाम, रुद्रप्रयाग

उत्‍तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसके अलावा महादेव का यह धाम चार धामों में से भी एक है। केदारधाम में भगवान शिव बैल के पीठ रूपी में संरचना में विद्यमान है। कहा जाता है कि यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा है। इस मंदिर का निर्माण कत्यूरी शैली में हुआ है, जिसे पांडवों ने बनाया था। बाद में इस मंदिर का जीर्णोद्धार आदि शंकराचार्य ने कराया। उत्तराखंड की वादियों में बसा यह मंदिर साल में सिर्फ 6 महीने के लिए ही खुलता है और बाकी के 6 महीने यहां अत्यधिक बर्फबारी होती है, जिससे यहां बर्फ की मोटी चादरें जम जाती है। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है, प्राचीन समय करीब 400 साल तक ये मंदिर बर्फ से ढका रहा। वर्तमान समय (कुछ दिन पहले ही) में मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं, जो अगले साल मई या जून के महीने में खोले जाएंगे।

टपकेश्वर महादेव मंदिर, देहरादून

टपकेश्वर महादेव मंदिर, देहरादून

देहरादून के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल टपकेश्वर महादेव मंदिर अपनी दैवीय प्रकृति के जाना जाता है। यहां 24 घंटे बाबा भोलेनाथ का अभिषेक होता रहता है। गुफा के अंदर स्थित भोलेनाथ के शिवलिंग पर पहाड़ों से रिसता हुआ बूंद-बूंद पानी लिंग पर गिरता है, जो मंदिर का मुख्य आकर्षण है। इसी कारण मंदिर का नाम टपकेश्वर पड़ा। शिवरात्रि के पर्व पर यहां विशाल मेले का भी आयोजन किया जाता है।

दक्षेश्‍वर महादेव मंदिर, हरिद्वार

दक्षेश्‍वर महादेव मंदिर, हरिद्वार

हरिद्वार के कनखल में स्थित दक्षेश्‍वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। कहा जाता है कि कनखल में ही भगवान शिव का ससुराल है, जहां उन्होंने अपने ससुर व राजा दक्ष का सिर धड़ से अलग किया था। यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान शिव के साथ राजा दक्ष की भी पूजा होती है। इसीलिए इस मंदिर का नाम राजा दक्ष के नाम पर रखा गया है।

विश्‍वनाथ मंदिर, उत्‍तरकाशी

विश्‍वनाथ मंदिर, उत्‍तरकाशी

उत्‍तरकाशी जिले में स्थित प्राचीन विश्वनाथ मंदिर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। इस पवित्र स्थान को पुराणों में सौम्य काशी के नाम से जाना जाता है। वहीं, प्राचीन समय में इस स्थल को विश्वनाथ नगरी के नाम से जाना जाता है। ऋषिकेश-गंगोत्री मार्ग पर स्थित इस मंदिर में एक 26 फीट ऊंची त्रिशुल है, जिसका आधारी करीब 9 फीट के बराबर है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा गणेश्वर द्वारा किया गया था।

बूढ़ाकेदार धाम, टिहरी

बूढ़ाकेदार धाम, टिहरी

टिहरी जिले में बाल गंगा एवं धर्म गंगा नदियों के संगम पर स्थित बूढ़ा केदार मंदिर महाभारत काल का बताया जाता है। इस मंदिर को पांचवें केदार के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में दर्शन करने पर चार धामों के दर्शन जितना फल मिलता है। मंदिर के शिवलिंग को लेकर कहा जाता है कि यहां का शिवलिंग स्वनिर्मित है, जिसके बारे में आज तक सटिक जानकारी नहीं लग पाई कि ये अंदर से कितना बड़ा है।

जागेश्‍वर धाम, अल्मोड़ा

जागेश्‍वर धाम, अल्मोड़ा

अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम को लेकर कहा जाता है यह विश्व का पहला मंदिर है, जहां लिंग रूप में भगवान शिव की आराधना शुरू हुई थी। इस पवित्र स्थान को शिव की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है। इस मंदिर को योगेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि यह मंदिर गुप्त साम्राज्य के शासनकाल में बनाई गई है, जिसकी झलक आज भी मंदिर में देखी जा सकती है। मंदिर परिसर में करीब 250 छोटे-बड़े मंदिर है, जो आसपास में ही है, यह मंदिर देखने में बेहद ही आकर्षक है।

गोपीनाथ धाम, चमोली

गोपीनाथ धाम, चमोली

चमोली में स्थित गोपीनाथ धाम कत्युरी शासकों द्वारा 11वीं शाताब्दी के आसपास बनाया गया है। नगरा शैली में निर्मित इस मंदिर में 24 दरवाजें हैं, जो मंदिर को रोचक बनाते हैं। कहा जाता है कि यह मंदिर केदारनाथ धाम के बाद सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इस मंदिर में एक त्रिशुल है, जिसे बल लगाने पर बलशाली से बलशाली व्यक्ति भी हिला नहीं पाता, लेकिन तर्जनी उंगली से मन एकाग्र कर उसे छुने पर त्रिशुल कम्पन करती हैं। मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां पर भगवान शिव ने कामदेव को भस्म किया था।

बाबा बागनाथ मंदिर, बागेश्‍वर

बाबा बागनाथ मंदिर, बागेश्‍वर

बागेश्वर जिले में स्थित बागनाथ मंदिर शिव को समर्पित एक हिंदू मंदिर है। यह उत्तर भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जो दक्षिणमुखी है। इस मंदिर में भगवान शिव और उनकी शक्ति पार्वती एक जलपरी के मध्य स्वयंभू रूप में विराजित हैं। इसी मंदिर के नाम पर ही इस जिले के नाम का बागेश्वर पड़ा। इस मंदिर की नक्काशी देखने लायक बनती है, जो मंदिर की खूबसूरती में चार-चांद लगाने का काम करती हैं।

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