सरयू नदी के किनारे भगवान श्रीराम की गगनचुंबी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बात की घोषणा करते हुए कहा कि आकार में यह प्रतिमा गुजरात में स्थापित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से भी अधिक ऊंची होगी। इस तरह सरयू नदी के किनारे स्थापित होने वाली मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति होने वाली है।

ये तो हो गयी अयोध्या में स्थापित होने वाली श्रीराम की प्रतिमा की बात। क्या आप जानते हैं भारत में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अतिरिक्त और भी कई मूर्तियां हैं, जिनकी ऊंचाई ही उनकी लोकप्रियता की प्रमुख वजह है। आइए आपको भारत की सबसे ऊंची प्रतिमाओं और उनकी ऊंचाई के बारे में बताते हैं :-
1. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, गुजरात
यह दुनिया की अब तक की सबसे ऊंची मूर्ति है। गुजरात के केवड़िया में स्थित इस मूर्ति की ऊंचाई 182 मीटर (597 फूट) है। यह लौह पुरुष सरदार बल्लभभाई पटेल की मूर्ति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को किया था। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को तैयार करने में करीब 3000 करोड़ रूपए की लागत आयी थी।

2. स्टैच्यू ऑफ बिलीफ, राजस्थान
यह दुनिया में भगवान शिव की सबसे ऊंची प्रतिमा है। यह मूर्ति राजस्थान के नाथद्वारा में स्थित है। स्टैच्यू ऑफ बिलीफ की ऊंचाई 112 मीटर (369 फीट है)। साल 2020 में इस प्रतिमा का अनावरण किया गया था। स्टील से बनी इस मूर्ति के ऊपर कांसे की प्लेटिंग की गयी है। मिली जानकारी के अनुसार इस मूर्ति का प्लेटफार्म समेत कुल वजन 30,000 टन है। प्रतिमा को बनाने में 5 सालों का समय लग गया और लगभग 80 करोड़ रूपए की लागत आयी।
3. स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी, तेलंगाना
11वीं सदी के हिंदू संत और दार्शनिक रामानुज की मूर्ति को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के पास रेड्डी जिले में लगाया गया है। यह प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। पंचधातु (सोना, चांदी, तांबा, पीतल और जस्ता) से बनी इस मूर्ति की ऊंचाई 66 मीटर (216 फीट) है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मूर्ति को बनाने में लगभग 1000 करोड़ रूपए की लागत आयी है।

4. वैष्णो देवी मूर्ति, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के वृंदावन में मां वैष्णो देवी की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित की गयी है। इस मूर्ति में माता वैष्णो देवी के लाल रंग की साड़ी में शेर पर बैठी हुई मुद्रा में दिखाया गया है। प्रतिमा को तैयार करने में लगभग 3 सालों का समय लग गया था। इस प्रतिमा की ऊंचाई 43 मीटर (141 फीट) है।
5. मुरुदेश्वरा मंदिर, कर्नाटक
यह मूर्ति दुनिया में भगवान शिव की बैठी हुई मुद्रा में दूसरी सबसे ऊंची मूर्ति है। उत्तर कर्नाटक के भटकल तालुक में स्थापित यह मूर्ति तीन तरफ से अरब सागर से घिरे कंदुक पर्वत पर स्थापित की गयी है। इस प्रतिमा की ऊंचाई 37.4 मीटर (123 फीट) है। मूर्ति को इस प्रकार से तैयार किया गया है कि सुबह के समय जब सूर्य की पहली किरण मूर्ति पर पड़ती है तो यह चमकने लगती है।

6. परितला अंजनेय, आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश के परितला गांव में भगवान हनुमान की मूर्ति स्थापित की गयी है। दावा किया जाता है कि यह दुनिया भर में भगवान हनुमान की सबसे ऊंची मूर्तियों में से एक है। इस प्रतिमा को वर्ष 2003 में स्थापित किया गया था। इस मूर्ति की ऊंचाई 41 मीटर (135 फीट) है। परितला अंजनेय मंदिर विजयवाड़ा से लगभग 30 किमी की दूरी पर मौजूद है।
7. स्टैच्यू ऑफ वननेस, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में तीर्थस्थल ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की मूर्ति को पिछले साल 16 सितंबर को स्थापित किया गया है। अष्टधातु से तैयार की गयी इस प्रतिमा की ऊंचाई 108 फीट है। राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसका अनावरण किया था। इस प्रतिमा को एकात्मता की प्रतिमा का नाम दिया गया है और यह पूरी दुनिया में शांति का संदेश देती है। प्रतिमा में आदि शंकराचार्य का बाल स्वरूप दिखाया गया है। एकात्म धाम के तौर पर इस पूरी जगह को विकसित करने में करीब 2100 करोड़ रूपए की लागत आयी है।

8. तिरुवल्लुवर प्रतिमा, तमिलनाडु
तमिल कवि व दार्शनिक वल्लुवर की पत्थर से तराशी गयी मूर्ति कोरोमंडल तट पर कन्याकुमारी शहर के पास एक छोटे से द्वीप पर स्थित है। इस जगह पर बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर का संगम होता है। वर्ष 2000 में इस प्रतिमा का अनावरण तमिलनाडु के तत्कालिन मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने किया था। इस मूर्ति की ऊंचाई 40.5 मीटर (133 फीट) है।
9. तथागत त्साल, सिक्किम
सिक्किम के रावंगला के पास मौजूद बुद्ध पार्क में भगवान बुद्ध की 60 टन वजनी प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा में स्थापित है। इस प्रतिमा को साल 2006 से 2013 के बीच तैयार किया गया था। 40 मीटर (130 फीट) ऊंची भगवान बुद्ध की इस प्रतिमा का अनावरण 14वें दलाई लामा द्वारा किया गया था।
10. हनुमान प्रतिमा, हिमाचल प्रदेश
शिमला के जाखु हिल पर भगवान हनुमान की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। खड़ी मुद्रा में तैयार की गयी यह प्रतिमा शिमला के प्रमुख टूरिस्ट प्वाएंट्स में से एक है, जहां लोग भगवान हनुमान की मूर्ति के साथ-साथ बर्फ से ढके पहाड़ की ऊंची चोटियों का लुत्फ उठाने आते हैं।

बताया जाता है कि भगवान श्रीराम की यह मूर्ति 823 फुट (251 मीटर) ऊंची होगी जो पंचधातु से निर्मित होगी। इसे बनाने के लिए लगभग 3 हजार टन धातुओं का इस्तेमाल किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली से सटे हरियाणा के मानेसर में यह प्रतिमा बनाने का काम मूर्तिकार नरेश कुमावत करने वाले हैं। उनका कहना है कि भगवान श्रीराम की प्रतिमा बनाने में कम से कम 3 सालों का समय लग जाएगा।
उन्होंने प्रतिमा की 10 फुट की डमी बनाकर मुख्यमंत्री को दिखाया है, जो उन्हें पसंद भी आया है। मूर्ति बनाने का निर्देश मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। 80 प्रतिशत तांबे की इस प्रतिमा को बनाने में करीब 3000 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।



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