आपने कभी क्रेटर सरोवर के बारे में सुना है, वो भी भारत में? अब आप सोच रहे होंगे कि यह क्रेटर क्या होता है? तो चलिए हम आपको बताए चलते हैं क्रेटर सरोवर की ओर। क्रेटर मतलब होता है किसी उल्का पिंड या किसी आकाशीय पिंड द्वारा ज़मीन पर होने वाला गढ्ढा। आपने ऐसे विशाल गढ्ढे कई फिल्मों में देखे होंगे, जो किसी आकाशीय पिंड द्वारा गठित होते हैं। उसी तरह महाराष्ट्र का लोनार क्रेटर सरोवर भी एक यूनीक भौगोलिक धरोहर है, जो महाराष्ट्र के बुलधाना में स्थित है।

लोनार क्रेटर सरोवर
Image Courtesy: V4vjk
लोनार सरोवर में कई सालों तक कई वैज्ञानिक अनुसंधान भी हुए हैं। इस भौगोलिक धरोहर का व्याख्यान ऐतिहासिक लेखों, जैसे आइन-ए-अकबरी, स्कंद प्राण आदि में भी किया गया है।
लोनार सरोवर को क्या चीज़ें यूनीक बनाती हैं?
- सबसे पहला तो यह कि इस सरोवर का गठन उल्कापिंड या आकाशीय पिंड द्वारा हुआ है।
- दूसरा यह कि इसका पानी अम्लीय और क्षारीय दोनो ही हैं। सरोवर के पानी में आपको नमक के टुकड़े भी नज़र आएँगे। साधारण भाषा में इसका पानी सोडे की तरह है। अगर आप इसके पानी को बोतल में भरकर हिलाएँगे तो आप इसमें अम्ल की वजह से उत्पन्न होने वाले बुलबुलों को भी देख पाएँगे।
- यह आपको जितना सुनने में दिलचस्प लग रहा है, उतना ही देखने में भी है। आइन-ए-अकबरी में इस बात का भी उल्लेख है कि, इसमें कुछ ऐसे कच्चे माल भी पाए जाते हैं जिनसे साबुन और काँच बनाए जा सकते हैं।

लोनार क्रेटर सरोवर
Image Courtesy: Vivek Ganesan
इस पानी के अम्लीय होने की वजह से इस सरोवर ने कई परिस्थितिविज्ञानशास्री और
भूवैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। यह सरोवर चारों ओर से हरियाली से घिरा हुआ है और दो नदियों पूर्णा और पेंगंगा के प्रवाह से भरा हुआ है।
बारिश के अलावा इन दो नदियों से ही इस सरोवर में पानी आता है। यहाँ की यात्रा कर आप यहाँ के सुरम्य दृश्य को देख आश्चर्यचकित रह जाएँगे। कहा जाता है कि इस क्रेटर सरोवर का गठन यहाँ हज़ारों साल पहले ही हुआ था और कई दशकों से यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

लोनार क्रेटर सरोवर के किनारे स्थित खंडहर
Image Courtesy: Robert Gill
लोनार सरोवर के आसपास अन्य आकर्षण
लोनार सरोवर खुद ही एक पौराणिक धरोहर है और कई सालों से यहाँ का मुख्य केंद्र भी है। इसके साथ ही एक छोटा लोनार या अंबर सरोवर भी है जो इसके पास ही स्थित है। जब उल्का पिंड गिर कर इस क्रेटर सरोवर का गठन कर रहा था तब एक अन्य उल्का पिंड ने इससे थोड़ी ही दूर पर गिरकर इस छोटे लोनार सरोवर का गठन किया।

कमलजा मंदिर
Image Courtesy: V4vjk
लोनार की पौराणिक कथा
कथानुसार, लोनारसुर नाम का दैत्य यहाँ रहा करता था। वह यहाँ रहने वाले निवासियों को बहुत परेशान किया करता था। तो, उन निवासियों को बचाने के लिए भगवान विष्णु दैत्य सूडान के रूप में आए और लोनारसुर को मार दिया। इस सरोवर के समीप ही स्थित चालुक्यों का मंदिर जिसे दैत्य सूडान मंदिर कहा जाता है, इसके निकट ही स्थित प्रमुख धरोहर है।

गोमुख मंदिर
Image Courtesy: Date.amod
लोनार का इतिहास
बुलधाना का लोनार क्षेत्र पुराने ज़माने में एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र हुआ करता था। यह अशोका से लेकर चालुक्यों के साम्राज्य, मुगल काल से लेकर ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा रहा है। इस सरोवर के किनारे ही स्थापित कई मंदिर इसके इतिहास को बखूबी दर्शाते हैं।
गोमुख मंदिर, कमलजा मंदिर और दैत्य सूडान मंदिर इस सरोवर के किनारे स्थापित प्रमुख मंदिर हैं। हालाँकि यहाँ कई अन्य मंदिर भी हैं पर उनमें से ज़्यादातर खंडहर के रूप में ही बचे हैं।

लोनार क्रेटर सरोवर
Image Courtesy: Akshay Charegaonkar
इस लोनार क्रेटर सरोवर की खूबसूरती और विशिष्टता की यात्रा करना आपके लिए सबसे शानदार अनुभव होगा। इसके सुंदर दृश्य और इसकी बनावट देख आप इसकी तारीफ करते नहीं थकेंगे। अपनी इन विशेषताओं के साथ लोनार क्रेटर सरोवर महाराष्ट्र का सबसे शानदार और यूनीक पर्यटक स्थल है।
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