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ऐतिहासिक लड़ाई का गवाह, आज भी मिलते हैं नर कंकाल

माधोगढ़ किला तुंगा-आगरा मार्गसे 16 किलोमीटर दूर जयपुर व मराठा सेना के बीच यह एतिहासिक युग गवाह है।

By Goldi

माधोगढ़ किला तुंगा-आगरा मार्गसे 16 किलोमीटर दूर जयपुर व मराठा सेना के बीच यह एतिहासिक युग गवाह है। यहाँ की खूबसूरती को मापा जाना बहुत कठिन है। सुंदर आम के बागों के बीच यह किला बसा है। यह किला ठाकुर भवानी सिंह का है। आज यह किला पर्यटन स्थल बन गया है यह यहाँ दूर-दूर से विदेशी पर्यटक घूमने के लिये आते है।अब इस किले ने 5 स्टार होटल का रूप ले लिया है।

इतिहास
महाराजा सवाई प्रतापसिंह ने मराठों के खिलाफ अपने अभियान में इस किले को मुख्यालय बनाने के लिए चुना। राजपूतों और मराठों के बीच निर्णायक लड़ाई 28 जुलाई 1787 को माधोपढ़ से लगभग 1 किलोमीटर दूर टुंगा के मैदानों में लड़ी गई। लड़ाई सुबह 9 बजे शुरू हुई और सूर्यास्त के करीब एक घंटे तक चली। जयपुर और जोधपुर की संयुक्त राजपूत सेना लगभग 50,000 स्ट्रिंग थी, जबकि मराठा सेना बड़ा थी, लगभग 80,000 सैनिक थे।माधोगाग किला का पुनर्निर्माण किया गया है और इसे विरासत होटल में परिवर्तित किया है। पर्यटक अब इस होटल में राजपूत अतिथि सत्कार का अनुभव कर सकते हैं।

यहां पर आप सप्ताह के अंत में जाने की योजना बना सकते है आप अपने परिवार के साथ कही जाना चाहते है और आपको ऐतिहासिक स्थानों को देखने का मन कर रहा है तो आप माधोगढ़ जा सकते है ये आपकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा।

युद्ध तुंगा के 'मैदानों

युद्ध तुंगा के 'मैदानों

माधोगढ़ की यात्रा करते समय आप यहां स्थित कई घने जंगलों को देख सकते हैं..यहां एक बार यहाँ लड़ाई हुई थी यह युद्ध तुंगा युद्ध के लिए जाना जाता है।PC: LEKHRAJ MAHAWAR

प्राचीन बावरी

प्राचीन बावरी

माधोगढ़ में इसके अलावा एक प्राचीन बावरी भी है जो पाँच मंजिल से भी अधिक की है।PC:LEKHRAJ MAHAWAR

करें धार्मिक यात्रा

करें धार्मिक यात्रा

पुराने जमानों में किले के आसपास मंदिर हुआ करते थे..ठीक उसी प्रकार इस किले के आसपास भी नई का नाथ शिव मंदिर है..माधोगढ़ के पास यह मंदिर हिन्दुओ का धार्मिक स्थल में से एक है। हर साल एक मेला नई का नाथ शिव मंदिर के पास आयोजित किया जाता है। नई का नाथ शिव मंदिर पर हजारो की सख्या में श्रद्धालु आते है।
PC: LEKHRAJ MAHAWAR

योग और ध्यान के केंद्र माधोगढ़

योग और ध्यान के केंद्र माधोगढ़

माधोगढ़ के पास केवल धार्मिक स्थल ही नही है यहां पर एक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र भी है और एक योग और ध्यान केंद्र भी है जहां पर भी लोगो का आना जाना लगा ही रहता है ज्यादातर लोग इस जगह का दौरा करने आते है वे यहां पर अपना प्राकृतिक चिकित्सा उपचार करवाने के लिए आते हैPC: LEKHRAJ MAHAWAR

माधोगढ़ के कुछ हिस्से होटल बन गए है

माधोगढ़ के कुछ हिस्से होटल बन गए है

पूर्व मालिक ठाकुर शिव प्रताप सिंह के अधीन आज माधोगढ़ किले के कुछ हिस्सों को होटल के रूप में बदल दिया गया है...

माधोगढ़ और उसका इतिहास

माधोगढ़ और उसका इतिहास

400 साल पहले माधोगढ़ महाराज माधो सिंह के द्वारा स्थापित किया गया था। महाराजा रामसिंह द्वितीय ने माधोगढ़ के परिवार में शादी की थी। तो उनकी शादी में ठाकुर प्रताप सिंह ने एक यादगार वसीहत तैयार करवाई और यह महल उनको शादी में भेट स्वरूप दिया गया था।

ऐतिहासिक युद्ध

ऐतिहासिक युद्ध

माधोगढ़ और तुंगा युद्ध को ऐतिहासिक युद्ध के रूप में स्थान दिया गया है इस युद्ध की वजह से इस जगह की गणना ऐतिहासिक स्थानों में की गई है। मराठों से जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह और सिंधिया के बीच अंतिम लड़ाईमाधोगढ़ और तुंगा में 28 जुलाई, 1787 में हुई थी।पूरे दिन हुई लड़ाई के बाद सूर्यास्त के समय इस लड़ाई का निष्कर्ष निकला गया था।

आखिर क्यों जयपुर के लिए महत्वपूर्ण है तुंगा-माधोगढ़ युद्ध?

आखिर क्यों जयपुर के लिए महत्वपूर्ण है तुंगा-माधोगढ़ युद्ध?

तुंगा-माधोगढ़ के युद्ध में मराठों के ऊपर जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह की जीत अतीत की एक उल्लेखनीय जीत होना कहा जाता है। यह कहा जाता है कि आज भी तुंगा-माधोगढ़ के क्षेत्रों में जंग लगे हथियारों को देखा जा सकता है और वहां पर आज भी मृतक सैनिकों की (हड्डियों) में देखा जा सकता है।

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