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मध्य प्रदेश को मिला नया टाइगर रिजर्व, माधव नेशनल पार्क बना राज्य में बाघों का 8वां आशियाना

मध्य प्रदेश को एक नया टाइगर रिजर्व मिल गया है। इसके साथ ही राज्य में कुल टाइगर रिजर्व की संख्या बढ़कर अब हो चुकी है 8। हाल ही में नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (NTCA) ने माधव नेशनल पार्क को मध्य प्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व बनाने पर अपनी सहमति दे दी है। मिली जानकारी के अनुसार पिछले रविवार को ही इस नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व बनाने पर NTCA ने अपनी सहमति जतायी है।

माधव नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित है। इस बाबत मीडिया से बात करते हुए मध्य प्रदेश के अतिरिक्त वन, वन्य जीव मुख्य चीफ कंजरवेटर एल. कृष्णमुर्ति ने बताया कि NTCA की तकनीकी कमेटी ने माधव नेशनल पार्क को बतौर टाइगर रिजर्व मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि कमेटी ने नेशनल पार्क में एक नर बाघ और एक मादा बाघिन को भी छोड़ने की मंजूरी दी है, ताकि इस टाइगर रिजर्व में बाघों की जनसंख्या को बढ़ाया जा सकें।

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बाघों की स्थिति

मिली जानकारी के अनुसार 'स्टेटस ऑफ टाइगर्स : को-प्रिडेटर्स एंड प्रे इन इंडिया- 2022' की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल बाघों की संख्या करीब 785 है, जो देश में सबसे अधिक है। इसके बाद बाघों की सर्वाधिक संख्या कर्नाटक में है जहां 563 बाघ और उत्तराखंड में है, जहां के जंगलों में 560 बाघों का बसेरा है। माधव नेशनल पार्क से पहले मध्य प्रदेश में 7 टाइगर रिजर्व पहले से मौजूद हैं, जिनके नाम निम्न हैं -

  1. कान्हा नेशनल पार्क
  2. सतपुरा के जंगल
  3. बांधवगढ़ नेशनल पार्क
  4. पेंच नेशनल पार्क
  5. संजय डुबरी नेशनल पार्क
  6. पन्ना नेशनल पार्क
  7. वीरांगना दुर्गावती नेशनल पार्क

इसके अलावा कुनो नेशनल पार्क भी मौजूद है, जहां बाघ नहीं बल्कि चीता का राज चलता है। यह भारत का एकमात्र नेशनल पार्क है, जिसे चीता के रहने के लिए तैयार किया गया है।

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माधव नेशनल पार्क की खासियतें

मध्य प्रदेश का माधव नेशनल पार्क 1,751 वर्ग किमी में फैला विशाल क्षेत्र है। इसका कोर एरिया 375 वर्ग किमी और बफर एरिया 1,276 वर्ग किमी है। Times of India की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व बनाने की कोशिशों में राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से NTCA के पास इस नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित करने का प्रस्ताव भेजा गया था।

क्या है इसका इतिहास

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार किसी जमाने में यह नेशनल पार्क मुगलों और ग्वालियर के महाराजा का शाही शिकार अभयारण्य हुआ करता था। वर्ष 1958 में जब मध्य प्रदेश राज्य की स्थापना हुई, उसी समय इस नेशनल पार्क को भी बनाया गया था। इस नेशनल पार्क का इतिहास मुगल बादशाह अकबर से भी जुड़ा हुआ है। पहले इसे शिवपुरी नेशनल पार्क कहा जाता था, लेकिन...

वर्ष 1958 में ग्वालियर के तत्कालिन महाराज और वर्तमान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधव राव सिंधिया के नाम पर इस नेशनल पार्क का नाम माधव नेशनल पार्क कर दिया गया। हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक इस नेशनल पार्क में मुख्य रूप से हाथियों और दूसरे वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक निवास में देखने के लिए आते रहते हैं।

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