मध्य प्रदेश के कई गांवों का नाम बदल दिया गया है। एक नहीं...दो नहीं...5 नहीं बल्कि पूरे 11 गांवों को अब जाना जाएगा नए नाम से। हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस बात की घोषणा की है। बताया जाता है कि मध्य प्रदेश के इन 11 गांवों का नाम जनता की मांग के आधार पर ही बदलने का फैसला लिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट में किये गये दावों के अनुसार स्थानीय निवासियों ने कई गांवों के नाम को लेकर असंतोष जाहिर किया था। दावा किया जा रहा था कि इन नामों का संबंध अल्पसंख्यक समुदाय से है। इसलिए इन गांवों का नाम बदलने की मांग की जा रही थी।

क्यों बदला गया गांवों का नाम?
Times of India की रिपोर्ट में स्थानीय निवासियों के हवाले से दावा किया गया है कि जिन 11 गांवों का नाम बदला गया है उनका संबंध मुस्लिम धरोहर से है, जिसका नाम वे बदलना चाहते थे। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि इन गांवों का नाम बदलना सिर्फ स्थानीय निवासियों की इच्छा का ही नतीजा है।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि स्थानीय निवासी इन गांवों के नाम से खुश नहीं थे और इन लोगों का ध्यान रखना उनकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री का कहना है कि अगर 'मोहम्मदपुर मछनई' गांव में कोई भी 'मोहम्मद' नहीं है, तो फिर ऐसा कोई नाम क्यों रखा जाए। अगर यहां कोई मुस्लिम निवासी रहता तो वे इस नाम को रख सकते थे। पर इन गांवों में अगर ऐसा नहीं है तो नाम को बदल दिया जाएगा।
कौन-कौन से गांवों का बदला गया नाम?
| पुराना नाम | नया नाम |
| उन्छोड | उन्चावड |
| मोहम्मदपुर मछनई | मोहनपुर |
| धबला हुसैनपुर | धबला राम |
| शेखपुर बोंगी | अवधपुरी |
| खजुरी अलाहदाद | खजुरी राम |
| हाजीपुर | हीरापुर |
| रीचडी मुरादाबाद | रीचडी |
| मोहम्मदपुर पवदिया | रामपुर पवदिया |
| घट्टी मुख्तियारपुर | घट्टी |
| खलीलपुर | रामपुर |
| निपानिया हिसामुद्दीन | निपानिया देव |

क्या है नया नाम रखने के पीछे का तर्क?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय लोगों ने 11 गांवों का नाम मुस्लिम धरोहर के नाम पर था, जिसका नाम वे बदलना चाहते थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन सभी गांवों का नाम बदलकर भारत की समृद्ध संस्कृति और देवी-देवताओं के नाम के आधार पर रखा गया है। भारत में 33 करोड़ देवी-देवता हैं, जिनके नाम से प्रभावित होकर ही इन गांवों का नाम रखा गया है।
ऐसा पहली बार नहीं है, जब मध्य प्रदेश में किसी स्थान या गांव का नाम बदला गया है। कुछ समय पहले ही मुख्यमंत्री ने उज्जैन जिले के 3 गांवों का नाम बदला था। इनमें से गजनीखेडी पंचायत बना चामुंडा माता गांव, जहांगीरपुर का नाम बदलकर हुआ था जगदीशपुर और मौलाना गांव का नाम बदलकर किया गया था विक्रम नगर।



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