Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »भारत का अंतिम गांव माणा...यहीं से पांडव गये थे स्वर्ग

भारत का अंतिम गांव माणा...यहीं से पांडव गये थे स्वर्ग

By Goldi

आज मै आपको अपने लेख के जरिये अवगत कराने जा रहीं हूं...भारत के अंतिम गांव माणा से।जोकि बद्रीनाथ से तीन किमी की दूरी पर स्थित है। जोकि उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है और बद्रीनाथ से 3 किमी ऊंचाई पर बसा हुआ है।

माणा समुद्र तल से लगभग 10,000 फुट की ऊंचाई पर बसा हुआ है। यह गांव भारत और तिब्बत की सीमासे लगा हुआ है। माणा गांव अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ कई अन्य कारणों की वजह से भी मशहूर है।

गांव माणा में रडंपा जाति के लोग रहते हैं। इस गांव की आबादी बहुत ही कम है यहां पर केवल 60 ही घर है। यहां पर बने घर लकड़ी के बने हुए हैं।

माणा गाँव से लगे कई ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल हैं। गाँव से कुछ ऊपर चढ़ाई पर चढ़ें तो पहले नज़र आती है गणेश गुफा और उसके बाद व्यास गुफा। गणेश गुफा के बारे में कहा जाता है कि,जब गणेश जी वेदों की रचना कर रहे थे, तो

सरस्वती नदी अपने पूरे वेग से बह रही थी और बहुत शोर कर रही थी। आज भी भीम पुल के पास यह नदी बहुत ज्यादा शोर करती है। गणेश जी ने सरस्वती जी से कहा कि शोर कम करें, मेरे कार्य में व्यवधान पड़ रहा है, लेकिन सरस्वती जी नहीं मानीं। इस बात से नाराज होकर गणेश जी ने इन्हें श्राप दिया कि आज के बाद इससे आगे तुम किसी को नहीं दिखोगी।

इस कारण सरस्वती नदी यहीं पर दिखती है, इससे कुछ दूरी पर यह नदी अलकनंदा में समाहित हो जाती है। नदी यहां से नीचे जाती तो दिखती है, लेकिन नदी का संगम कहीं नहीं दिखता।इस बारे में भी कई मिथक हैं, जिनमें से एक यह है कि महाबली भीम ने नाराज होकर गदा से भूमि पर प्रहार किया, जिससे यह नदी पाताल लोक चली गई।

साथ ही माणा गांव के बारे में कहा जाता है कि, जब पांडव स्वर्ग को जा रहे थे तो उन्होंने इस स्थान पर सरस्वती नदी से जाने के लिए रास्ता मांगा, लेकिन सरस्वती ने उनकी बात को अनसुना कर दिया और मार्ग नहीं दिया। ऐसे में महाबली भीम ने दो बड़ी शिलाएं उठाकर इसके ऊपर रख दीं, जिससे इस पुल का निर्माण हुआ। पांडव तो आगे चले गए और आज तक यह पुल मौजूद है।

गांव के अन्तिम छोर पर व्यास गुफा के पास एक बहुत ही सुंदर बोर्ड लगा है। 'भारत की आखिरी चाय की दुकान' जी हां, इस बोर्ड पर यही लिखा हुआ है। इसे देखकर हर सैलानी और तीर्थयात्री इस दुकान में चाय पीने के लिए जरूर रुकता है। इस दुकान में आपको साधारण चाय से लेकर माणा में पी जाने वाली नमकीन गरम चाय, वन तुलसी की चाय आदि भी मिल जायेगी।

नीलकंठ चोटी

नीलकंठ चोटी

नीलकंठ चोटी समुद्री स्तर से 6597 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।इस चोटी को गढ़वाल की रानी के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है।इस चोटी से यहां आने वाले पर्यटक बद्रीनाथ को देख सकते हैं।

PC: wikimedia.org

तप्त कुंड

तप्त कुंड

तप्त कुंड एक ऐसा कुंड है,जिसमे बारह महीनों सिर्फ गर्म पानी निकलता है। माना जाता है कि, कुंड के पानी में जो भी एक भी स्नान कर लेता है उसकी सभी त्वचा बीमारियाँ दूर हो जाती हैं। इस कुंड पर हमेशा ही यहां आने वाले पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है।

PC: wikimedia.org

माता मूर्ति मंदिर

माता मूर्ति मंदिर

माता मूर्ति मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। कहा जाता है कि, इसी जगह माता मूर्ति ने भगवान विष्णु से उनके बेटे के रूप में जनम लेने के लिए विनती की थी, जिसके बाद विष्णु भगवान ने नर -नारायण के रूप में जनम लेकर माता मूर्ति की इच्छा पूरी की थी।

वसुधारा

वसुधारा

इसी रास्ते से आगे बढ़ें तो पाँच किमी. का पैदल सफर तय कर पर्यटक पहुँचते हैं वसुधारा. लगभग 400 फीट ऊँचाई से गिरता इस जल-प्रपात का पानी मोतियों की बौछार करता हुआ-सा प्रतीत होता है। ऐसा कहा जाता है किइस पानी की बूँदें पापियों के तन पर नहीं पड़तीं। यह झरना इतना ऊँचा है कि पर्वत के मूल से पर्वत शिखर तक पूरा प्रपात एक नज़र में नहीं देखा जा सकता।

PC: wikimedia.org

ट्रेकिंग

ट्रेकिंग

एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए माणा गांव परफेक्ट है, यहां आने वाले पर्यटक यहां ट्रेकिंग का भरपूर लुत्फ उठा सकते है।यहां ट्रेकिंग के लिए कई रूत्शैं जैसे-माणा से वशुधारा,माणा से माणा पास,माणा से चरणपादुका।

PC: wikimedia.org

व्यास गुफा

व्यास गुफा

बताया जाता है कि, यह वही गुफा है जिसमे ऋषि व्यास जी ने चार वेदों की रचना की थी।

तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Nativeplanet sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Nativeplanet website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more