
पर्यटन और मध्यप्रदेश अब एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। इतिहास से लेकर वन्य जीवों के वासस्थली के रूप में प्रसिद्द, मध्यप्रदेश पर्यटन अपनी झोली में कई सारी ऐसी विरासतों को लिए हुए जो वैश्विक धरोहर में भी शामिल हैं। ओरछा के किले से लेकर साँची का स्तूप आपको पर्यटन की ऐसी दुनिया में ले जाता जहाँ हर उम्र के लोगों के लिए कुछ न कुछ उत्साह भरा है। मध्य प्रदेश के इन्हीं ख़ज़ानों के भण्डार में सम्मिलित है, प्राचीन शहर मांडू।
मध्यप्रदेश के ख़ज़ानों में बेशकीमती मोती की तरह चमकता प्राचीन शहर मांडू। इसके साथ ही साथ राजा-रानी के प्रेम का साक्षात् साक्षी, सुल्तानों के समय में शादियाबाद के नाम से जाना जाता था, जिसका मतलब है 'खुशियों का शहर'। वास्तव में यह नाम इस जगह को सार्थक करता है। मध्य प्रदेश के हर भरे घने जंगल, नर्मदा का सुरम्य तट, यह सब मिलकर मांडू को मालवा का स्वर्ग बनाते हैं।
महान कवि अबुल फज़ल को मांडू का मायाजाल भ्रमित करता था। मांडू के लिए उनहोंने कहा है कि यह पर्स पत्थर की देन है। मुख्य रूप से यहाँ चार वंशों ने राज कर अपनी नींव मज़बूत की है, परमार काल, सुल्तान काल, मुग़ल काल और पवार काल। मांडू को मुख्य तौर पर परिवार शासकों ने बसाया था, जिनमें से हर्ष, मुंज, सिंधु और राजा भोज इस वंश के महत्वपूर्ण शासक रहें हैं।
तो चलिए हम आपको लिए चलते हैं मध्यप्रदेश के इसी चमकते हुए मोती की सैर पर!

मांडू की गाथा!
मांडू मध्यप्रदेश का एक ऐसा पर्यटनस्थल है, जो रानी रूपमती और बादशाह बाज़ बहादुर के अमर प्रेम का साक्षी है।
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मांडू की गाथा!
यहाँ के खंडहर व इमारतें हमें इतिहास के उस झरोखे के दर्शन कराते हैं, जिसमें हम मांडू के शासकों की विशाल समृद्ध विरासत व शानो-शौकत से रूबरू होते हैं।
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मांडू की गाथा!
कहने को लोग मांडू को खंडहरों का गाँव भी कहते हैं परंतु इन खंडहरों के पत्थर भी बोलते हैं और सुनाते हैं हमें इतिहास की अमर गाथा।
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मांडू की गाथा!
हरियाली की खूबसूरत चादर ओढ़ा मांडू विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष तौर पर एक सुंदर पर्यटनस्थल रहा है।
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मांडू की गाथा!
यहाँ के शानदार व विशाल दरवाज़े मांडू प्रवेश के साथ ही इस तरह हमारा स्वागत करते हैं, मानों हम किसी समृद्ध शासक के नगर में प्रवेश कर रहे हों।
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मांडू की गाथा!
मांडू में प्रवेश के घुमावदार रास्तों के साथ ही मांडू के बारे में जानने की तथा इसकी खूबसूरत इमारतों को देखने का उत्साह और भी बढ़ जायेगा।
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मांडू की गाथा!
मांडू को 'मांडवगढ़' के नाम से भी जाना जाता है। यह विन्ध्याचल की पहाड़ियों पर लगभग 2,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है।
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मांडू की गाथा!
पहाड़ों व चट्टानों के इस इलाके में ऐतिहासिक महत्व की कई पुरानी इमारतें आज भी समय की कसौटी पर खरी उतरती हैं। मालवा के राजपूत परमार शासक बाहरी आक्रमण से अपनी रक्षा के लिए मांडू को एक महफ़ूज़ जगह मानते थे।
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मांडू के कीमती आकर्षण
जैसा कि मांडू मध्य प्रदेश के ख़ज़ाने में बेशकीमती मोती की तरह है, इसी मोती की चमक बढ़ाने के लिए यहाँ कई सारे पर्यटक केंद्र मौजूद हैं जिनका इतिहास आज तक लोगों को उत्साहित करता है।
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मांडू के कीमती आकर्षण
रानी रूपमती का महल, हिंडोला महल, जहाज़ महल, जामा मस्जिद, अशरफी महल आदि स्थान प्रमुख हैं।
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मांडू के कीमती आकर्षण
इसी के साथ ही मांडू को 'मांडवगढ़ जैन तीर्थ' के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ भगवान सुपार्श्वनाथ की पद्मासन मुद्रा में विराजित श्वेत वर्णी सुंदर प्राचीन प्रतिमा है। इस प्रतिमा की स्थापना सन् 1472 में की गई थी। मांडवगढ़ में कई अन्य पुराने ऐतिहासिक महत्व के जैन मंदिर भी है, जिसके कारण यह जैन धर्मावलंबियों के लिए एक तीर्थ स्थान है।
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स्वागत करते दरवाज़े
मांडू में लगभग 12 प्रवेश द्वार हैं, जो मांडू में 45 किलोमीटर के दायरे में मुंडेर के समान निर्मित है। इन दरवाज़ों में 'दिल्ली दरवाज़ा' प्रमुख है,जो मांडू का प्रवेश द्वार है। इसका निर्माण सन् 1405 से 1407 के मध्य में हुआ था। यह खड़ी ढाल के रूप में घुमावदार मार्ग पर बनाया गया है, जहाँ पहुँचने पर हाथियों की गति धीमी हो जाती थी।
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स्वागत करते दरवाज़े
इस दरवाज़े में प्रवेश करते ही अन्य दरवाज़ों की शुरुआत के साथ ही मांडू दर्शन आरंभ हो जाता है। मांडू के प्रमुख दरवाज़ों में आलमगीर दरवाज़ा, भंगी दरवाज़ा, रामपोल दरवाज़ा, जहाँगीर दरवाज़ा, तारापुर दरवाज़ा आदि अनेक दरवाज़े हैं।
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जहाज़ महल
जहाज़ महल का निर्माण 1469 से 1500 ईसवीं के मध्य हुआ था।
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जहाज़ महल
यह महल जहाज़ की आकृति में दो कृत्रिम तालाबों कपूर तालाब व मुंज तालाब दो तालाबों के मध्य में बना हुआ है।
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जहाज़ महल
लगभग 120 मीटर लंबे इस खूबसूरत महल को दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानों तालाब के बीच में कोई सुंदर जहाज़ तैर रहा हो।
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जहाज़ महल
संभवत: इसका निर्माण श्रृंगारप्रेमी सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने विशेष तौर पर अंत:पुर (महिलाओं के लिए बनाए गए महल) के रूप में किया था।
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हिंडोला महल
हिंडोला महल मांडू के खूबसूरत महलों में से एक है। हिंडोला का अर्थ होता 'झूला'।
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हिंडोला महल
महल की दीवारें कुछ झुकी होने के कारण यह महल हवा में झुलते हिंडोले के समान प्रतीत होता है। अत: इसलिए इसे हिंडोला महल के नाम से जाना जाता है।
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हिंडोला महल
हिंडोला महल का निर्माण ग्यासुद्दीन खिलजी ने 1469 से 1500 ईसवीं के मध्य सभा भवन के रूप में किया था।
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हिंडोला महल
यहाँ के सुंदर कॉलम इसे और भी खूबसूरती प्रदान करते हैं। इस महल के पश्चिम में कई छोटे-बड़े सुंदर महल है। इसके समीप ही चंपा बावड़ी है।
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जामा मस्जिद
मांडू के मुख्य आकर्षणों में से एक है जामा मस्जिद या जामी मस्जिद।
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जामा मस्जिद
इस विशाल मस्जिद का निर्माण कार्य होशंगशाह के शासनकाल में आरंभ किया गया था तथा महमूद प्रथम के शासनकाल में यह मस्जिद बनकर तैयार हुई।
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जामा मस्जिद
इस मस्जिद की गिनती मांडू की नायाब व शानदार इमारतों में की जाती है।
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जामा मस्जिद
यह भी कहा जाता है कि जामा मस्जिद डेमास्कस (सीरिया देश की राजधानी) की एक प्रसिद्ध मस्जिद का प्रतिरूप है।
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अशरफी महल
जामा मस्जिद के सामने ही अशरफी महल है। अशरफी का अर्थ होता है 'सोने के सिक्के'।
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अशरफी महल
इस महल का निर्माण होशंगशाह खिलजी के उत्तराधिकारी मोहम्मद खिलजी ने इस्लामिक मदरसे के रूप में किया था।
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अशरफी महल
यहाँ विद्धार्थियों के रहने के लिए कई कमरों का निर्माण भी किया गया था।
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होशंगशाह की कब्र
होशंगशाह की कब्र, जो कि भारत में मार्बल से बनाई हुई ऐसी पहली कब्र है, जिसमें आपको अफगानी शिल्पकला का बेहतरीन नमूना देखने को मिलता है।
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होशंगशाह की कब्र
यहाँ के गुंबज, बरामदों तथा मार्बल की जाली आदि की खूबसूरती बेजोड़ है।
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रानी रूपमती का महल
रानी रूपमती के महल को देखे बगैर मांडू दर्शन अधूरा सा है।
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रानी रूपमती का महल
365 मीटर ऊँची खड़ी चट्टान पर स्थित इस महल का निर्माण बाज़बहादुर ने रानी रूपमती के लिए कराया था।
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रानी रूपमती का महल
इसी के साथ ही सैनिकों द्वारा मांडू की सुरक्षा व्यवस्था पर नज़र रखने के लिए एक बेहतर स्थान के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता था।
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बाज़ बहादुर का महल
बाज़ बहादुर के महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में किया गया था।
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बाज़ बहादुर का महल
इस महल में विशाल आँगन व हॉल बने हुए हैं। यहाँ से हमें मांडू का सुंदर नज़ारा देखने को मिलता है।
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बाज़ बहादुर का महल
नीलकंठ महल, हाथी महल, दरिया खान की मजार, दाई का महल, दाई की छोटी बहन का महल, मलिक मघत की मस्जिद और जाली महल भी यहाँ दर्शनीय स्थलों में से हैं।
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मांडू
यहाँ ईको पॉइंट पर पर्यटकों की भीड़ लगी ही रहती है। लोहानी गुफाएँ और उनके सामने स्थित सनसेट पॉइंट भी पर्यटकों को खींचता है।
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मांडू पहुँचें कैसे?
मांडू मध्यप्रदेश के धार शहर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इंदौर से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर।
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मांडू पहुँचें कैसे?
मध्यप्रदेश के कई मुख्य शहरों जैसे, भोपाल, उज्जैन,रतलाम,धार आदि से यहाँ तक के लिए कई बस सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यहाँ का नज़दीकी रेलवे स्टेशन इंदौर और रतलाम है।
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मांडू जाने का सही समय
जुलाई से मार्च के महीने मांडू जाने के लिए बेहतर समय है। बेहतर होगा कि आप बरसात के मौसम में मांडू जाएँ क्योंकि इस मौसम में मांडू की खूबसूरती चरम पर होती है।
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