मणिपुर का 500 साल पुराना इमा कैथल मार्केट किसी भी आम मार्केट की तरह ही दिखता है। यहां आपको रोजमर्रा के सामान बड़ी आसानी से मिल जाएंगे। लेकिन इस मार्केट की कई ऐसी खासियतें हैं जो भारत के किसी भी दूसरी मार्केट में नहीं है। तो जब भी आप मणिपुर घूमने जाएं एक जरूर इमा कैथल जरूर घूम आएं।

आइए आपको इमा कैथल मार्केट की खासियतें बताते हैं
500 साल पुराना मार्केट
मणिपुर की राजधानी इम्फाल में स्थित मार्केट इमा कैथल करीब 500 साल पुराना बताया जाता है। इस मार्केट में आपको रोजमर्रा की जरूरत के सभी सामान आसानी से मिल जाएंगे। 3 मंजिला इमारत में फैले इस मार्केट में करीब 500 से ज्यादा स्टॉल हैं।

सिर्फ इतनी ज्यादा संख्या में स्टॉल होना ही इस मार्केट की एकमात्र खासियत नहीं है, बल्कि इस मार्केट की कई और भी खासियतें हैं। माना जाता है कि इस मार्केट का निर्माण 16वीं सदी में कांगलीपाक साम्राज्य के शासनकाल में हुआ। उस समय यह एक खुला मार्केट हुआ करता था जहां सिर्फ फसलों की खरीद-बिक्री होती थी।
दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट
इमा कैथल मार्केट ना सिर्फ मणिपुर या भारत बल्कि विश्व का सबसे बड़ा मार्केट माना जाता है। स्थानीय भाषा में इमा कैथल का अर्थ मां का बाजार होता है। यहां खरीदारी करने महिलाएं व पुरुष सभी आते हैं। शहर के बीचों-बीच स्थित यह मार्केट खरीदारी के लिहाज से काफी सस्ता भी माना जाता है।

साल 2003 में राज्य सरकार ने इमा कैथल की जगह विशाल शॉपिंग मॉल बनाने की घोषणा की थी लेकिन इसका महिलाओं ने अगले कई हफ्तों तक पुरजोर विरोध किया। इसके बाद राज्य सरकार को अपना निर्णय वापस ले लेना पड़ा।
सिर्फ शादीशुदा महिलाओं को है सामान बेचने की अनुमति
इमा कैथल में सामान खरीदने तो महिला-पुरुष दोनों आ सकते हैं लेकिन यहां सामानों को बेचने की अनुमति सिर्फ महिलाओं को दी जाती है। हैरानी की बात है कि यहां केवल वहीं महिलाएं अपनी दुकान चला सकती हैं जिनकी शादी हो चुकी है। माना जाता है कि वर्ष 1533 में पड़ोसी राज्य वर्मा और चीन के बीच युद्ध जैसे हालात उत्पन्न हो गये थे।

उस समय मणिपुर के पुरुषों को सेना में भर्ती होना पड़ा था। जानकारों का कहना है कि यहां महिलाओं ने सबसे पहले मछली, सब्जियां और अन्य सामान बेचने की शुरुआत की। इसके बाद से यह मार्केट सिर्फ महिलाओं द्वारा ही चलाया जाने लगा।



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