मथुरा की होली आज यानी 17 मार्च से शुरू हो रही है। मथुरा के होली कैलेंडर के अनुसार 17 मार्च को खेली जाएगी लड्डूमार होली। यानी लोग होली तो खेलेंगे लेकिन रंग-गुलाल की नहीं बल्कि एक दूसरे पर लड्डू मार कर। जी हां, कुछ इस अंदाज में ही श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा, वृंदावन, बरसाना या फिर नंदगांव होली की खुशियों में सराबोर हो जाता है।
मथुरा-बरसाना की होली को देखने के लिए इस समय बड़ी संख्या में देश के कोने-कोने से और विदेशों से भी लोग वहां पहुंचे हुए हैं। यह ऐसा समय होता है जब भारत की संस्कृति को करीब से देखा और समझा जा सकता है।

कहां होता है आयोजन
लड्डूमार होली का आयोजन बरसाना के श्रीजी मंदिर में किया जाता है। इस दिन हजारों की संख्या में लड्डूओं को लोगों पर फेंका जाता है। अब लड्डू जैसी नर्म मिठाई को किसी की तरफ उछाला जाएगा, फिर भला वह बिना टूटे कैसे रह सकेगा।
किसी के भी हाथ साबुत लड्डू नहीं आता है लेकिन अगर लड्डूमार होली के दौरान उछाला या फेंका गया कोई साबूत लड्डू किसी के हाथ लग जाता है तो माना जाता है कि उसकी किस्मत जाग उठेगी। मान्यताओं के अनुसार जिसे साबूत लड्डू मिलेगा, उस पर राधा रानी की कृपा बरसती है।

क्या है पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब राधा रानी के पिता बृष्भान ने होली का निमंत्रण नंदगांव में श्रीकृष्ण के पिता नंब बाबा को दिया तो उन्होंने सहर्ष इसे स्वीकार कर लिया था। इसके बाद नंद बाबा ने पुरोहितों के हाथों अपनी स्वीकृति पत्र भेजा था। इन पुरोहितों का स्वागत करने के लिए उन्हें बरसाना में खाने के लिए लड्डू परोसे गये थे।
उसी समय बरसाना की गोपियां गुलाल लेकर पुरोहितों की तरफ बढ़ी तो पुरोहितों ने गोपियों और राधा रानी की सखियों पर लड्डूओं की ही बारिश कर डाली। बस यहीं से लड्डूमार होली की शुरुआत हुई जिस परंपरा को आज भी बरसाना और नंदगांव के लोग बडे़ प्यार से निभा रहे हैं।

आज यानी रविवार को श्रीजी मंदिर में सैंकड़ों किलो लड्डूओं की बारिश होगी। इस होली की शुरुआत में सबसे पहले नंदगांव से बृष्भानु जी की लाडली राधा रानी के महल में फाग का न्योता जाता है। इसके बाद राधा रानी के महल से नंदगांव में न्यौता स्वीकार होने का संदेश भेजा जाता है। लड्डूमार होली के बाद सोमवार को नंदगांव में लट्ठमार होली होगी।



Click it and Unblock the Notifications














