मथुरा में वापस लौटने वाला है श्रीकृष्ण का द्वापर युग। एक बार फिर से मथुरा और बरसाना के आसपास के पहाड़ी क्षेत्र दिखाई देंगे हरे-भरे। यहां नजर आने वाले है ऐसे पेड़-पौधे व वृक्ष जिनकी छांव में किसी समय श्रीकृष्ण किया करते थे अपनी बाल-लीलाएं। एक बार फिर से बरसाना के पर्वतीय क्षेत्रों में नजर आएंगे पीलू, ढाक और कदम्ब के पेड़ जिन्हें श्रीकृष्ण का समकालीन माना जाता है।
इस बात की पुष्टि उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अधिकारियों ने की है। उत्तर प्रदेश की सरकार ने एक विशेष पहल की शुरुआत की है, जिसमें राधा रानी के जन्म स्थान बरसाना के आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों को हराभरा बनाने का काम किया जाएगा। क्या है यह परियोजना और क्या है इसका उद्देश्य? इसमें कितना होने वाला है खर्च और अधिकारियों ने इस परियोजना से जुड़ी क्या महत्वपूर्ण जानकारियां दी?

क्या है यह परियोजना और इसका उद्देश्य?
उत्तर प्रदेश सरकार ने मथुरा क्षेत्र में बरसाना गांव के आसपास की पहाड़ी इलाके, जो सुखे पड़े हुए हैं और जिन्हें बहुत ही कम आंका जाता है, के कायाकल्प की योजना बनायी है। बरसाना गांव, जिसे राधा रानी का जन्म स्थान माना जाता है, श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण जगह है। अधिकारियों का कहना है कि इसे हरियाली से भरने की योजना बनायी गयी है। इस परियोजना में न सिर्फ वृक्षारोपण बल्कि जल संचयन और बाड़ लगाकर इसे सुरक्षित बनाने जैसे कार्यों को भी शामिल किया गया है।
इस पहल की शुरुआत UP ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा की गयी है। इस बारे में परिषद के सीईओ और मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्याम बहादुर सिंह ने कहा कि किसी जमाने में बरसाना की पहाड़ियां प्राकृतिक सुन्दरता से भरी थी जिसका काफी अध्यात्मिक महत्व था। लेकिन इसे लगातार नजरंदाज किया गया और समय के साथ-साथ इसने अपना महत्व भी खो दिया। इस परियोजना का उद्देश्य न सिर्फ यहां की पारिस्थितिकि तंत्र को दोबारा विकसित करना है बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के बीच इसके अध्यात्मिक महत्व को भी दोबारा स्थापित करना है।
कैसे वापस लौटेगा श्रीकृष्ण का द्वापर युग?
UP ब्रज तीर्थ विकास परिषद की इस परियोजना के तहत बरसाना के चारों तरफ मौजूद पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसे वृक्षों को फिर से रोपा जाएगा, जिन्हें श्रीकृष्ण का समकालीन माना जाता है। इस परियोजना के तहत मथुरा क्षेत्र के इस इलाके को फिर से उसी तरह से विकसित किया जाएगा, जैसा द्वापर युग में यहां का प्राकृतिक परिवेश हुआ करता था। श्रीकृष्ण के समकालीन जिन पेड़ों को बरसाना पहाड़ी क्षेत्रों में रोपा जाएगा, उनमें शामिल है -
- कदम्ब
- पीलू
- ढाक

इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी पेड़ों की बबूल और कीकर जैसी प्रजातियों के स्थान पर कदम्ब, पीलू, ढाक और श्रीकृष्ण की समकालीन पेड़ों की प्रजातियों को यहां रोपने की अनुमति भी दे दी है। सिंह ने बताया कि ब्रज क्षेत्र में ₹206 करोड़ की लागत से पर्यटन से संबंधित 10 परियोजनाओं का प्रस्ताव प्राधिकरण ने किया है।
इसमें से 3 परियोजनाएं बरसाना, रकौली, धबला और सखी गिरी इलाके के सुन्दरीकरण पर केंद्रीत है, जिसकी अनुमति मिल चुकी है। बता दें, ये सभी जगहें अष्ट सखी क्षेत्र का हिस्सा है, जिन्हें राधी रानी की सहेलियां मानी जाती हैं और राजस्थान सीमा के पास मौजूद हैं।
कहां कितना होगा खर्च?
सिंह ने बताया कि इस परियोजना का पहला चरण रकौली पहाड़ी क्षेत्र पर केंद्रीत होगा, जिसके लिए ₹2.11 करोड़ की मंजूरी मिली है। इसमें से ₹1.30 करोड़ आवंटित भी की जा चुकी है। इस चरण में रकौली पहाड़ी क्षेत्रों में तार की सुरक्षा बाड़ का लगाना, सांस्कृतिक विकास, पारिस्थितिकि तंत्र को फिर से विकसित करना, पुराने ऐतिहासिक पेड़ों की प्रजातियों को रोपना आदि शामिल है।
इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, उनमें फैकेड लाइट लगाना, साइन बोर्ड लगाना जिसमें गोवर्धन परिक्रमा रूट का भी उल्लेख हो, यमुना नदी के घाटों का विकास, शिल्पग्राम का निर्माण, जछौड़ा गांव में पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करना, CCTV कैमरे लगाना, सार्वजनिक घोषणा सिस्टम लगाना, वृंदावन परिक्रमा मार्ग के बचे हुए हिस्से को विकसित करना आदि शामिल है। इसके साथ ही यमुना नदी में क्रुज सेवाएं भी शुरू की जाएगी।
*PTI रिपोर्ट से मिली जानकारी के आधार पर



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