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क्रिसमस स्पेशल: भारत के 30 सबसे खूबसूरत गिरिजाघर!

Posted By: Staff

हर साल की तरह ठण्ड के मौसम और क्रिसमस के त्यौहार ने दरवाज़े पर दस्तक दे दी है। जैसा कि हम पूरे साल क्रिसमस का बड़े ही बेसब्री से इंतज़ार करते हैं, ऐसे में पहले से इस छुट्टी की योजना बना लेना और अच्छा होता है। ज़रूर ही आपने इन छुट्टियों में किसी आकर्षक और मज़ेदार जगह जाने की कई सारी योजनाएं पहले से बना भी ली होंगी पर इन सबके बीच ये मत भूलियेगा कि यह त्यौहार प्रार्थना और कैरल्स गाने का भी त्यौहार है। ऐसे में अच्छा होगा अगर हम अपना थोड़ा सा ध्यान परमात्मा पर भी लगाएं, बस थोड़ा सा ही बाकि आप अपनी योजना के अनुसार सारी क्रियाओं के मज़े ले सकते हैं।

[भूतहा और त्यागा हुआ गाँव!]

ऐसे में भारत के कुछ सबसे अच्छे गिरिजाघरों(चर्चों) की यात्रा करना आपके आत्मा को भी संतुष्टि दिलाएगा और आँखों को भी। ज़ाहिर सी बात है कि आप अपनी पूरी छुट्टियां धार्मिक यात्रा करके ही नहीं बिता सकते, पर आप अपनी मज़ेदार यात्रा के थोड़े से समय में इन्हें जोड़ ज़रूर सकते हैं। जैसा कि इतिहासकारों का कहना है, ईसाई धर्म भारत में उपनिवेशवाद की भीड़ के साथ आया था, आज भारत कई अद्भुत गिरिजाघरों के वास्तुकलाओं से प्रसिद्द है।

[पत्नी द्वारा पति को समर्पित प्रेम की निशानी!]

हालाँकि, इन गिरिजाघरों को आप ऐतिहासिक धरोहर रचनाओं की तरह भी देख सकते हैं। जहाँ पुराने चर्च अपने प्राचीन गँवाई आकर्षण से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, वहीं नए चर्च आधुनिक चमक से पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं। खास तौर पर, क्रिसमस के मौके पर इन गिरिजाघरों की यह चमक ही है जब ये रंगीन और पुरे चमक के साथ लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इनमें से कुछ तो भारत के लैंडमार्क डेस्टिनेशन भी हैं।

[इतने सारे ताजमहल!]

तो चलिए आज हम ऐसे ही इतिहास,वास्तुकला और दिव्य शक्ति से भरे जगहों की सैर पर चलते हैं!

ऑल सेंट'स कैथेड्रल, इलाहबाद

ऑल सेंट'स कैथेड्रल, इलाहबाद

ऑल सेंट'स कैथेड्रल, यूरोपीय वास्तुशैलियों में से एक है। इसका निर्माण गोथिक शैली में किया गया और यह उत्तरी भारत के सबसे प्रसिद्द गिरिजाघरों में से एक है।

Image Courtesy:ptwo

सेंट पॉल'स कैथेड्रल, कोलकाता

सेंट पॉल'स कैथेड्रल, कोलकाता

सेंट पॉल'स कैथेड्रल कोलकाता के प्रमुख लैंडमार्क में से एक है। इस ब्रिटिश वास्तुकला का निर्माण इंडो-गोथिक शैली में किया गया। आज यह कोलकाता के सबसे प्रसिद्द पर्यटन आकर्षणों में से एक है।

Image Courtesy:Ankitesh Jha

कैथेड्रल चर्च ऑफ़ द रिडेम्पशन, दिल्ली

कैथेड्रल चर्च ऑफ़ द रिडेम्पशन, दिल्ली

दिल्ली में स्थित कैथेड्रल चर्च ऑफ़ द रिडेम्पशन को वाइसराय चर्च के नाम से भी जाना जाता है। यहा भारत के सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत गिरिजाघरों में से एक है।

Image Courtesy:Marshmir

कैथेड्रल ऑफ़ द सेक्रेड हार्ट, दिल्ली

कैथेड्रल ऑफ़ द सेक्रेड हार्ट, दिल्ली

कैथेड्रल ऑफ़ द सेक्रेड हार्ट चर्च, दिल्ली में स्थित सबसे प्रतिष्ठित कैथोलिक गिरिजाघरों में से एक है। हरियाली के बीच में निर्मित यह चर्च दिल्ली की सबसे पुरानी रचनाओं में से एक है।

Image Courtesy:Peter Potrowl

मोरेवियन चर्च, लेह

मोरेवियन चर्च, लेह

मोरेवियन चर्च भारत में स्थित सबसे ऊंचाई पर बना चर्च है, जो करीब 11000 की ऊंचाई पर स्थित है। यह लेह के महत्वपूर्ण आकर्षणों में से एक है।

Image Courtesy:Ranzen

बासिलिका ऑफ़ होली चर्च, हूगली

बासिलिका ऑफ़ होली चर्च, हूगली

पश्चिम बंगाल में सन् 1660 में बना बासिलिका ऑफ़ होली चर्च, भारत के सबसे प्राचीन गिरिजाघरों में से एक है। इस चर्च का निर्माण भी पुर्तगालियों द्वारा हूगली नदी के तट पर किया गया।

Image Courtesy:Biswarup Ganguly

क्राइस्ट चर्च, शिमला

क्राइस्ट चर्च, शिमला

क्राइस्ट चर्च हिमाचल प्रदेश राज्य के सबसे प्रसिद्द पर्यटक स्थल शिमला शहर के बीचोबीच स्थित है। कहा जाता है कि यह चर्च उत्तर भारत का दूसरा सबसे पुराना गिरिजाघर है। इसका निर्माण सन् 1857 में गोथिक शैली में किया गया था।

Image Courtesy:Samir Azad

सेंट थॉमस कैथेड्रल, मुम्बई

सेंट थॉमस कैथेड्रल, मुम्बई

सेंट थॉमस कैथेड्रल भारत के सबसे पुराने गिरिजाघरों में से एक है। यह एक ब्रिटिश रचना है, जो मुम्बई के सबसे ऐतिहासिक जगहों में से एक है।

Image Courtesy:Aw1805

बासिलिका ऑफ़ बोम जीसस, गोवा

बासिलिका ऑफ़ बोम जीसस, गोवा

बासिलिका ऑफ़ बोम जीसस, यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल की सूचि में शामिल इमारत है, जहाँ सेंट फ्रांसिस ज़ेवियर के पार्थिव शरीर के कुछ अवशेष अब भी रखे हुए हैं। यह चर्च ओल्ड गोवा की यात्रा में सबसे मुख्य आकर्षणों में से एक है।

Image Courtesy:Bikashrd

से कैथेड्रल चर्च, गोवा

से कैथेड्रल चर्च, गोवा

भारत की सबसे बड़ी रचनाओं में से एक, से कैथेड्रल चर्च अलेक्सांद्रिया की कैथरीन को समर्पित है। इस रचना का निर्माण पुर्तगालियों द्वारा मुग़लों पर जीत पाने की ख़ुशी में बनवाया गया था। सन् 1562 में चर्च का निर्माण शुरू किया गया जो सन् 1619 में बन कर पूरा हुआ। चर्च का मुख्य आकर्षण है, यहाँ लटकी सुनहरे रंग की घंटी(बेल्ल) जो दुनिया के सबसे खूबसूरत घंटियों में से एक है।

Image Courtesy:Mihir Vaidya

 सेंट ऐनी चर्च, गोवा

सेंट ऐनी चर्च, गोवा

गोवा का सेंट ऐनी चर्च अपनी खूबसूरत और आकर्षक वास्तुशैली के लिए जाना जाता है। इसे भारतीय बारोक शैली का सबसे बेहतरीन उदहारण माना जाता है।

Image Courtesy:Naizal Dias

मेडक कैथेड्रल, तेलंगाना

मेडक कैथेड्रल, तेलंगाना

मेडक कैथेड्रल भारत के सबसे शानदार गिरिजाघरों में से एक है। कहा जाता है कि इस चर्च का निर्माण मोज़ेक टाइलों से किया गया जिन्हें ब्रिटेन से मंगवाया जाता था वो भी 6 अलग-अलग रंगों में।

Image Courtesy:Myrtleship

आवर लेडी ऑफ़ द इमैक्युलेट कॉन्सेप्शन चर्च, गोवा

आवर लेडी ऑफ़ द इमैक्युलेट कॉन्सेप्शन चर्च, गोवा

गोवा के सबसे पहले चर्च के तौर पर जाना जाने वाला,आवर लेडी ऑफ़ द इमैक्युलेट कॉन्सेप्शन चर्च भारत की ऐतिहासिक रचनाओं में से एक है। इसकी एक अलग तरह की वास्तुशैली इसे और भी आकर्षित बनाती है।

Image Courtesy:Josephdesousa

सेंट फिलोमेना'स चर्च, मैसूर

सेंट फिलोमेना'स चर्च, मैसूर

कर्नाटक के मैसूर शहर में स्थित सेंट फिलोमेना'स चर्च, जिसे सेंट जोसफ'स चर्च के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे बड़े चर्चों में से एक है। सेंट फिलोमेना'स चर्च का निर्माण मैसूर में सन् 1936 में किया गया था।

Image Courtesy:Rahul Zota

सान थोमे बासिलिका, चेन्नई

सान थोमे बासिलिका, चेन्नई

सबसे पहले सान थोमे बासिलिका को पुर्तगालियों द्वारा निर्मित किया गया। बाद में ब्रिटिश राज के समय इसका पुनर्निर्माण करके इसे कैथेड्रल का दर्ज दिया गया। यह चेन्नई में स्थित सबसे प्राचीन गिरिजाघरों में से एक है।

Image Courtesy:Bikashrd

बासिलिका ऑफ़ सेक्रेड हार्ट ऑफ़ जीसस, पांडिचेरी

बासिलिका ऑफ़ सेक्रेड हार्ट ऑफ़ जीसस, पांडिचेरी

बासिलिका ऑफ़ सेक्रेड हार्ट ऑफ़ जीसस का निर्माण गोथिक शैली में स्थानीय मिश्रण के साथ किया गया था। यह पांडिचेरी के सबसे प्रसिद्द गिरिजाघरों में से एक है।

Image Courtesy:Aravindaraja

द बसीलिका ऑफ़ आवर लेडी ऑफ़ रैनसम, केरल

द बसीलिका ऑफ़ आवर लेडी ऑफ़ रैनसम, केरल

बासिलिका, जिसे वल्लारपदम चर्च के नाम से भी जाना जाता है, ईसाई धर्म के लोगों के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। द बसीलिका ऑफ़ आवर लेडी ऑफ़ रैनसम, मदर मैरी को समर्पित है और इसे वल्लारपदाथाम्मा के नाम से भी जाना जाता है।

Image Courtesy:Bino Bose

सेंट पॉल'स कैथेड्रल, दीव

सेंट पॉल'स कैथेड्रल, दीव

सेंट पॉल'स कैथेड्रल पुर्तगालियों द्वारा ही निर्मित रचना है जो केंद्र शासित प्रदेश दीव का हिस्सा है। यह सेंट पॉल को समर्पित है, जो जीसस के प्रचारक थे। यह दीव के प्रमुख आकर्षणों में से एक है।

Image Courtesy:Shakti

आवर लेडी ऑफ़ रैनसम चर्च, कन्याकुमारी

आवर लेडी ऑफ़ रैनसम चर्च, कन्याकुमारी

आवर लेडी ऑफ़ रैनसम चर्च, कन्याकुमारी में स्थित ईसाई धर्म के लोगों का एक महत्वपूर्ण स्थान है। वहां पहले से ही 16 वीं शताब्दी का एक छोटा गिरिजाघर मौजूद था, 18 वीं शताब्दी में फिर से रोमन वास्तुशैली में एक नया चर्च बनवाया गया।

Image Courtesy:Alanbrindo

सेंट मैरी'स बासिलिका, बेंगलुरु

सेंट मैरी'स बासिलिका, बेंगलुरु

सेंट मैरी'स बासिलिका, बेंगलुरु में 17 वीं सदी में बनवाया गया। यह एक रोमन कैथोलिक चर्च है जिसका निर्माण गोथिक शैली में किया गया। सेंट मैरी'स बासिलिका बेंगलुरु के सबसे प्राचीन विरासतों में से एक है।

Image Courtesy:Johnchacks

वेलांकन्नी चर्च, नागापट्टिनम

वेलांकन्नी चर्च, नागापट्टिनम

भारत में सबसे ज़्यादा वेलांकन्नी चर्च की यात्रा की जाती है। बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित यह गिरिजाघर खासतौर पर बासिलिका के लिए प्रसिद्द है,'जो स्वास्थ्य की देवी' जिन्हें लेडी ऑफ़ वेलांकन्नी के नाम से जाना जाता है, को समर्पित है।

Image Courtesy:Koshy Koshy

सेंट थॉमस सायरो-मालाबार कैथोलिक चर्च, पालायूर

सेंट थॉमस सायरो-मालाबार कैथोलिक चर्च, पालायूर

सेंट थॉमस केरल में स्थित ईसाई धर्म का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। चर्च का नाम संत थॉमस के नाम पर पड़ा जो दक्षिण भारत में ईसाई धर्म के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले सबसे बड़े प्रचारक थे। यह भारत के उन प्राचीन चर्चों में से एक है जो हमें सीधे 52वें ईसा बाद के काल में सीधे ले जाते हैं।

Image Courtesy:Princebpaul0484

सांता क्रूज़ बासिलिका, कोच्ची

सांता क्रूज़ बासिलिका, कोच्ची

सांता क्रूज़ बासिलिका भी भारत के सबसे प्राचीन गिरिजाघरों में से एक है, जिसका निर्माण पुर्तगालियों ने सन् 1505 ईसवीं में किया था। सन् 1558 में इस चर्च को तब के पोप पॉल 4 द्वारा कैथेड्रल का दर्ज मिला। यह कोच्ची के महत्वपूर्ण लैंडमार्क में से एक है।

Image Courtesy: Praveenp

 परुमुला चर्च,तिरुवल्ला

परुमुला चर्च,तिरुवल्ला

परुमुला मलनकारा ऑर्थोडॉक्स सिरियाई चर्च का एक चर्च है, जो केरल के तिरुवल्ला जिले में स्थित है। यह संत ग्रेगोरियस गीवर्घेसे के मक़बरे के रूप में भी प्रसिद्द है।

Image Courtesy:Joe Ravi

 रोज़री चर्च, शेतीहल्ली, हसन

रोज़री चर्च, शेतीहल्ली, हसन

फ्रेंच मिशनरीज़ द्वारा सन् 1860 में बनवाया गया शेतीहल्ली का रोज़री चर्च हेमवती नदी के तट पर स्थित है। सन् 1960 में इसके पास ही बांध का निर्माण कर दिया गया, जिस वजह से मॉनसून के मौसम में यह आधा डूब जाता है।

Image Courtesy:Bikashrd

आवर लेडी ऑफ़ डोलोर्स चर्च, थ्रिसुर बसिलिया

आवर लेडी ऑफ़ डोलोर्स चर्च, थ्रिसुर बसिलिया

आवर लेडी ऑफ़ डोलोर्स चर्च एशिया का तीसरा सबसे बड़ा चर्च है और भारत का सबसे पहला। विश्व प्रसिद्ध इस महान रचना का निर्माण भी गोथिक शैली में किया गया।

Image Courtesy:Joseph Lazer

सेंट जॉर्ज'स सायरो-मालाबार कैथोलिक फॉरेन चर्च, कोच्ची

सेंट जॉर्ज'स सायरो-मालाबार कैथोलिक फॉरेन चर्च, कोच्ची

सेंट जॉर्ज'स सायरो-मालाबार कैथोलिक फॉरेन चर्च गैर ईसाई के लोगों में भी प्रसिद्द है। चर्च का निर्माण 594 ईसा बाद के समय में हमें ले जाता है।

Image Courtesy:Tachs

सेंट फ्रांसिस चर्च, कोच्ची

सेंट फ्रांसिस चर्च, कोच्ची

सेंट फ्रांसिस चर्च भारत में स्थित सबसे प्राचीन यूरोपीय चर्च है, जो केरल के कोच्ची शहर में स्थित है। सन् 1923 में इस गिरिजाघर को एक संरक्षित स्मारक के रूप में पहचान मिली।

Image Courtesy:Ranjith Siji

 इमैक्युलेट कॉन्सेप्शन कैथेड्रल, पुडुचेरी

इमैक्युलेट कॉन्सेप्शन कैथेड्रल, पुडुचेरी

पुडुचेरी के मिशन मार्ग में स्थित, इमैक्युलेट कॉन्सेप्शन कैथेड्रल को साम्बा कोविल के नाम से भी जाना जाता है। यह चर्च थोड़ा थोड़ा फ्रांस के चर्च की तरह प्रतीत होता है, जिसे सन् 1791 में पुराने चर्च के अवशेषों से ही बनाया गया था।

Image Courtesy:BishkekRocks

सेंट अलोयसिस चैपल, मंगलौर

सेंट अलोयसिस चैपल, मंगलौर

सन् 1885 में बनवाया गया सेंट अलोयसिस चैपल, रोम में स्थित विश्व प्रसिद्द सिस्टिन चैपल से मिलता जुलता है। इस गिरिजाघर में कुछ बेहतरीन चित्रकारी की गई है और खूबसूरत पेंटिंग्स लगे हुए हैं।

Image Courtesy:Vinay bhat

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