मंदिरों के देश भारत में कई ऐसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर हैं जो आज भी अपनी भव्यता और महत्ता के लिए भक्तों और पर्यटकों के बीच प्रसिद्द हैं। इन्हीं में से एक बिहार का मुंडेश्वरी देवी मंदिर, दुनिया के सबसे प्राचीन कार्यशील मंदिरों में से एक है। यह बिहार के कैमूर जिले के कौरा क्षेत्र में स्थापित है। यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव जी और देवी शक्ति को समर्पित है।

मुंडेश्वरी देवी मंदिर
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कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण 3-4 ईसा पूर्व, पीठासीन देवता विष्णु के साथ किया गया था। ऐसा माना जाता है कि यहाँ स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा कई सदियों पहले लगभग 7वीं शताब्दी पहले यहाँ से गायब हो गई, जब शैव धर्म यहाँ एक लोकप्रिय धर्म बन कर उभरा और विनीतेश्वर जी मंदिर के इष्टदेव के रूप में उभरे। यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई)द्वारा संरक्षित स्मारक है।

मुंडेश्वरी देवी मंदिर
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मुंडेश्वरी मंदिर की वास्तुशैली
मंदिर को योजना अनुसार नागर शैली के अनुसरण के मुताबिक अष्टकोणीय आकर में बनाया गया है और यह बिहार में मंदिरों के निर्माण के लिए सबसे प्रसिद्द वास्तुशैली है।
मंदिर के चार कोनों में दरवाज़े और खिड़कियां बनी हुई हैं, और चार दीवारों पर छोटे इंचो की मूर्तियां बनी हुई हैं। मंदिर का शिखर ध्वस्त कर दिया गया था, जिसके फलस्वरूप मरम्मत के दौरान इसे छत के रूप में फिर से बनाया गया।

मंदिर में खोद कर की गई नक्काशी
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मंदिर की दीवारों में समृद्ध नक्काशियां और सजावट की गई हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार में गंगा, यमुना और अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां खोद कर बनाई गई हैं। मुख्य गर्भगृह के अंदर मुख्य देवी देवता, भगवान शिव जी और देवी मुंडेश्वरी की पूजा की जाती है। यहाँ अन्य देवताओं जैसे भगवान विष्णु जी, गणेश जी और सूर्य देवता की भी पूजा की जाती है। यहाँ स्थापित देवी मुंडेश्वरी के दस हाथ हैं जिनमें उन्होंने शक्ति के 10 प्रतीकों को थामा हुआ है और माँ भैंस पर सवार हैं।

मुंडेश्वरी देवी मंदिर
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मंदिर के त्यौहार
मुंडेश्वरी मंदिर में कुछ मुख्य त्यौहारों का जश्न मनाया जाता है; रामनवमी, शिवरात्रि और नवरात्री। सारे भक्तगण और पर्यटक इन प्रमुख त्यौहारों पर माँ मुंडेश्वरी के दर्शन कर आशीर्वाद पाने आते हैं।
मंदिर के शिलालेख
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा जो शिलालेख मंदिर में पाया गया है उससे यह ज्ञात होता है कि यह दुनिया के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। यहाँ कई ऐतिहासिक सबूत भी मिले हैं, जिनसे यह पता चलता है कि यह मंदिर साका युग के दौरान, जब गुप्त साम्राज्य का शासन था तबसे अस्तित्व में है।

मंदिर के परिसर में बंधे पवित्र धागे
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मुंडेश्वरी मंदिर पहुँचें कैसे?
मुंडेश्वरी मंदिर कई प्रसिद्द शहरों, जैसे पटना, गया और वाराणसी से सड़क मार्ग द्वारा आराम से पहुँचा सकता है। मंदिर का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है भबुआ रोड रेलवे स्टेशन जो मोहनिया में स्थित है और यह मंदिर से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप पूरे साल कभी भी मंदिर के दर्शन को आ सकते हैं।
दो अगली बार अपनी बिहार की यात्रा में आप देवी के इस आकर्षक रूप के दर्शन करना बिल्कुल भी मत भूलियेगा।
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