हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना है श्रावण। यह महीना भगवान शिव को समर्पित है। बता दें श्रावण का शुभ महीना 10 जुलाई से शुरू हो गया है और ये 7 अगस्त तक चलेगा।
कहा जाता है कि इस पवित्र महीने के दौरान पूजा करने और धार्मिक कार्य करने से भाग्य में खुशी आती है। इस माहीने के हर सोमवार को श्रावण सोमवार का व्रत किया जाता है।
यहां हमने श्रावण के दौरान भारत में घूमने की पवित्र जगहों की लिस्ट बनाई है।
1. बाबा बैद्यनाथ मंदिर, झारखंड

बाबा बैद्यनाथ धाम भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। श्रावण महीने के दौरान बैद्यनाथ मंदिर में एक मेला आयोजित किया जाता है जिसे श्रावण मेला कहा जाता है। इस मेले के दौरान हजारों भक्त पवित्र मंदिर में आते हैं। साथ ही कई श्रद्धालु नंगे पैर चलते हैं और देवता को गंगा जल अर्पित करते हैं।
2. त्र्यंबकेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र
इस पवित्र त्र्यंबकेश्वर मंदिर के तीन चेहरों में भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान रुद्र हैं। बता दें श्रावण महीने के दौरान, यहां बेहद प्रसिद्ध त्योहार मनाया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। वहीं नाग पंचमी और नारली पूनम के दिन देवताओं को विशेष आभूषणों से सजाया जाता है।
3. सोमनाथ मंदिर, गुजरात

श्रावण महीने में मंदिर सुबह 4 बजे खुलता है और रात 10 बजे मंदिर के कपाट बंद होते हैं। साथ ही श्रावण महीने में यहां महान सोमनाथ महोत्सव होता है, जिसे देखने के लिए पूरे भारत से भक्त आते हैं।
4. केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड

केदारनाथ पवित्र हिंदू मंदिर हिमालय में मंदाकिनी नदी के पास स्थित है। भारत में इस मंदिर के 4 प्रमुख स्थल हैं; यमुनोत्री, गंगोत्री, छोटा चार धाम और बद्रीनाथ। बता दें यह मंदिर अप्रैल के अंत से कार्तिक पूर्णिमा तक खुला रहता है। साथ ही ये भी बता दें की केदारनाथ मंदिर सड़कों के रास्ते सीधा नहीं पहुंचा जा सकता है। यहां पहुंचने के लिए गौरीकुंड से 14 किमी की चढ़ाई करनी पडती है। वहीं अगर आपको ज्यादा उंचाई वाली जगह पसंद है, तो आप दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर तुंगनाथ के दर्शन जरूर करें। तुंगनाथ 3,810 मीटर की दूरी पर स्थित है। यहां "बम बम भोले" का जाप करते हुए चढ़ाई करते जाएं।
5. काशी विश्वनाथ मंदिर, उत्तर प्रदेश

काशी विश्वनाथ मंदिर गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर ब्रह्मांड के शासक भगवान विश्वनाथ को समर्पित है। बता दें काशी विश्वनाथ मंदिर 3500 साल पुराने इतिहास से जुड़ा है। यह सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। श्रावण महीने के दौरान वाराणसी में एक भव्य उत्सव मनाया जाता है। साथ ही श्रावण महीने के हर सोमवार देवता को अलग-अलग आभूषण से सजाया जाता है।
6. लिंगराज मंदिर, उड़ीसा

लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर में स्थित सबसे बड़ा मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर में श्रावण महीने के दौरान महान समारोह का आयोजन होता है। समारोह के दौरान, तीर्थयात्री एक साथ इकट्ठा होते हैं और महानदी से मंदिर तक पानी ले जाते हैं।
7. ओंकारेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश

ओंकारेश्वर मंदिर शिवपुरी में स्थित है, जिसे पवित्र द्वीप के नाम से जाना जाता है जहां। यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। दरअसल यह द्वीप ओम के आकार का है, इसलिए इसे बहुत ही शुभ स्थान माना जाता है।
8. मल्लिकार्जुन मंदिर, आंध्र प्रदेश

मल्लिकार्जुन मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम जिले में स्थित है। यह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां आप श्रावण महीने के दौरान मेधावी त्योहार देख सकते हैं। यह मूर्तिकला मंदिर पहाड़ी में स्थित है और एक किले की तरह दिखता है। इसके दीवारों पर भगवान शिव के चित्र बने हुए हैं जो बेहद खूबसूरत हैं।
9. तारकनाथ मंदिर, पश्चिम बंगाल

तारकनाथ मंदिर अद्भुत है जो बंगाल वास्तुकला 1792 में बनाया गया था। यह मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित है। श्रावण महीने के दौरान हर सोमवार मंदिर में अलग-अलग रंग और तरह-तरह की सजावट देखने मिलती है।
10. सुकरेश्वर मंदिर, असम
सुकरेश्वर मंदिर का निर्माण अहोम राजा प्रमत्त सिंघा ने साल 1744 में किया था। यह असम में सबसे महत्वपूर्ण भगवान शिव मंदिर है। इस मंदिर में भी श्रावण महीने के दौरान श्रावण मेला का आयोजन किया जाता है, जहां लाखों भक्त लंबी दूरी से बोल बम का जाप करते हुए आते हैं।
11. महाकालेश्वर, मध्य प्रदेश

उज्जैन मध्य प्रदेश ही नहीं ब्लकी भारत के पवित्र और प्राचीन शहर के रूप में जाना जाता है। महाकालेश्वर शिव मंदिर उज्जैन के बीच रुद्र सागर झील के किनारे स्थित है। साथ ही महाकालेश्वर की मूर्ति का मुख दक्षिण दिशा की ओर है, जिस कारण इसे दक्षिणामूर्ति के नाम से जाना जाता है। बता दें भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में यह एकमात्र मंदिर है जिसका मुख दक्षिण दिशा की ओर है।
12. मुरुदेश्वर मंदिर, कर्नाटक

मुरुदेश्वर मंदिर कर्नाटक के उत्तरी हिस्से में अरब सागर के खूबसूरत किनारे पर स्थित है। बता दें मुरुदेश्वर मंदिर को 123 फीट ऊंची दूसरी सबसे ऊंची शिव प्रतिमा के रूप में जाना जाता है। अरब सागर के किनारे स्थित भगवान शिव की इस भव्य मूर्ति को 20 फीट के राजगौपराम से अच्छी तरह देखा जा सकता है।



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