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ये हैं भारत के आश्चर्य:कहीं हवा में झूलते है खंभे, तो कहीं आदमी बन जाता है जानवर

भारत में कई नायब अजूबे मौजूद है, जिन्हें सुनकर इओर देखकर लोग दांतों टेल उंगली दबा लेते हैं..अप भी जाने ऐसे ही कुछ खास अजूबो के बारे में

By Goldi

इन सब के अलावा भारत में कुछ ऐसे भी अजूबे हैं, जिन्हें देख वैज्ञानिक भी हैरान है जैसे 70 किलो के पत्थर को सिर्फ दस उँगलियों से उठा लेना, हवा में तैरते हुए खम्बे तो वहीं रामेश्वरम में तैरते हुए पत्थर आदि। भारत के नायाब अजूबे भारत के अलग लग हिस्सों में मौजूद है..आइये जानते हैं इन्हें विस्तार से

दस उंगलियों से उठने वाला पत्थर

दस उंगलियों से उठने वाला पत्थर

महाराष्ट्र में पुणे के पास एक छोटा सा गांव शिवापुर है, जहां पर हजरत कमर अली दरवेश का स्थान है। कहते हैं कि वर्तमान स्थल पर 800 वर्ष पूर्व एक व्यायाम शाला थी। कमर अली नाम के सूफी संत का वहां कुछ पहलवानों ने मजाक उड़ाया। संत ने बॉडी बिल्डिंग के लिए रखे पत्थरों पर अपना मंत्र फूंक दिया। यहां सत्तर किलो का वजनी पत्थर मात्र 11 अंगुलियों के छोरों के छूने और संत का नाम जोर से लेने भर से हवा में उठ जाता है। आज भी संत कमर अली का नाम लेने भर से पत्थर चमत्कारी दस उँगलियों की मदद से आसानी से उठ जाता है।

भारत का दुखी झरना

भारत का दुखी झरना

सुनकर थोड़ा अजीब जरुर लग सकता है लेकिन यह झरना मेघालय के चेरापूंजी में स्थित है। बता दें, यह झरना भारत का सबसे ऊपर से घिरने वाले झरनों में से एक है जो कि 1115 फीट की ऊंचाई से गिरता है।
बरसात के पानी से बनने वाले इस झरने का नामकरण एक महिला ‘का लीकाई' की दुखद कहानी पर आधारित है। अपने पति की मौत के बाद का लीकाई ने दोबारा विवाह किया, लेकिन उसका दूसरा पति उसकी सौतेली बेटी के प्रति मां के प्यार को लेकर बहुत ही ईर्ष्यालु था। जिस कारण उसने अपनी बेटी की हत्या कर दी,और निर्ममता से उसके अंगो का भोहं तैयार किया। का का लिकाई ने उस दिन अपनी बेटी को पूरे गांव में ढूंढा जब वह नहीं तो मिली तो थक हार घर वापस आई। घर वापस आने के बाद जब पति ने उस खाना परोसा तो उसे देख उसकी चीख निकल गयी..उसने बेटी की अंगुलियां सुपारी से भरी टोकरी में देख वह दुखी होकर झरने की ओर दौड़ पड़ी और वहां से कूदकर उसने अपने प्राण त्याग दिए। इस तरह इस झरने का नाम ‘का लिकाई का झरना' हो गया।PC:Dhwani Shree

काले जादू का देश, मायोंग

काले जादू का देश, मायोंग

असम राज्य में स्थित मायोंग को काले जादू की भूमि के रूप में जाना जाता है। पबित्रा वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी के पास स्थित यह गांव गुआहाटी शहर से 40 किमी दूर है। माना जाता है कि मायोंग का नाम संस्कृत शब्द माया या भ्रम से लिया गया है। कहा जाता है कि यहां लोग गायब हो जाते हैं, लोग जानवरों में बदल जाते हैं और जंगली जानवरों को पालतू बना लिया जाता है। यहां पर काला जादू और जादू टोना पीढ़ियों से किया जाता रहा है।PC:R4robin

बिना दरवाजों का गांव शनि शिंगणापुर, महाराष्ट्र

बिना दरवाजों का गांव शनि शिंगणापुर, महाराष्ट्र

जी हां ऐसा गांव शिंगणापुर, महाराष्ट्र में स्थित है, जो पूरे देश में शनि मंदिर के लिए जाना जाता है। यह अहमदनगर से 35 किमी दूर है। इस गांव में कभी कोई अपराध नहीं हुआ और इसे शनिदेव का आशीर्वाद माना जाता है। गांव के लोगों को अपने देवता पर भरोसा है और उन्होंने गांव की रक्षा को उनके भरोसे छोड़ रखा है। इस कारण से गांव के घरों और कारोबारी इमारतों में न तो दरवाजे और न ही कोई डोर फ्रेम होता है। गांव की शून्य अपराध दर को ध्यान में रखते हुए यूको बैंक ने इस गांव में ‘लॉक-लेस' शाखा खोली है। यह भारत में अपने किस्म की पहली शाखा है।
PC:Booradleyp1

झूलता खम्बा, लेपाक्षी, आंध्रप्रदेश

झूलता खम्बा, लेपाक्षी, आंध्रप्रदेश

अभी तक तो आपने झूलो को ही झूलते हुए देखा होगा लेकिन आन्ध्रप्रदेश के मंदिर लेपाक्षी में आप मंदिर को खम्बो को झूलते हुए देख सकते हैं। मंदिर के सत्तर खम्बों में से एक बिना किसी सहारे के लटकता है। आगंतुक इस खम्बे के नीचे से बहुत सारी वस्तुओं को डालकर तय करते हैं कि इस खम्बे को लेकर किए जा रहे दावे सच हैं या नहीं। जबकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खम्बे के नीचे से विभिन्न वस्तुओं को निकालने से लोगों के जीवन में सम्पन्नता आती है।
PC:rajaraman sundaram

लिविंग रूट्स ब्रिज, चेरापूंजी

लिविंग रूट्स ब्रिज, चेरापूंजी

पूर्वोत्तर भारत भारत का एक बेहद ही खूबसूरत हिस्सा है जिसे देखने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं..यहां के लोगो ने प्रकृति को अपना मित्र बना लिया है और इसकी मदद से अपने लिए नए रास्ते भी बना लिए हैं। दुनिया में लोग पुल बनाते हैं लेकिन मेघालय में लोग पुल उगाते हैं। फिकस इलेस्टिका या रबर ट्री अपने तनों से मजबूत सेकंडरी (द्वितीयक) जड़ें पैदा करता है। यहां इन जड़ों को एक विशेष तरीके से बेटल-नट ट्रंक्स (सुपारी के पेड़ की जड़ों) की मदद से ऐसे पुल बनाए हैं जोकि मजबूत हैं और दशकों तक चलते हैं। इनमें से कुछ पुल सौ फीट से अधिक लम्बे हैं। उमशियांग का डबल डेकर पुल समूची दुनिया में अपनी किस्म का अकेला पुल है। कुछ पुराने रूट पुल तो 500 वर्षों से भी अधिक पुराने हैं।

वीजा देवता का मंदिर, बालाजी मंदिर, चिल्कुर

वीजा देवता का मंदिर, बालाजी मंदिर, चिल्कुर

क्या अप विदेश जाना चाहते हैं लेकिन आपका वीजा नहीं लग रहा है तो आप पहुंच जाइए चिलकुर के बालाजी,जो यकीनन आपका अमेरिका का वीजा लगवा देंगे।यह मंदिर हैदराबाद के बाहरी इलाके में स्थित है। इसे वीजा बालाजी मंदिर के नाम से जाना जाता है। डॉलरों का सपना देखने वाले बहुत से लोग, जोकि किसी भी धर्म और जाति के हो सकते हैं, अपने वीजा इंटरव्यू से पहले मंदिर में आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। यहां आने वाले लोगों को अगर वीजा मिल जाता है तो उन्हें अपनी प्रतिज्ञा पूरी करनी होती है और मंदिर के अंदर के हिस्से की 108 बार परिक्रमा करनी पड़ती है।

तैरते पत्थर, रामेश्वरम्

तैरते पत्थर, रामेश्वरम्

हम सबने रामायण में पढ़ा है कि, भगवान राम ने सीता को रावण के चंगुल से आजाद कराने के लिए समुद्र के ऊपर पुल बनाया था। इस पुल को बनाने के लिए जिन पत्थरों का उपयोग किया गया था उन पर राम का नाम लिखा था और ये पत्थर पानी में कभी नहीं डूबे। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि आज भी रामेश्वरम के आसपास ऐसे ‘तैरने वाले पत्थर' पाए जाते हैं।

श्वान मंदिर

श्वान मंदिर

अभी तक आपने विष्णु मंदिर, शिव मंदिर, हनुमान मंदिर के बारे में सुना होगा, लेकिन दक्षिण भारत के कर्नाटक में एक श्वान मंदिर स्थित है। रामनगर जिले के चन्नापाटना में एक समुदाय है जिसने श्वान के सम्मान में एक असामान्य मंदिर बनाया है। श्वान देवता का आशीर्वाद पाने के लिए यहां लोग पूजा करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुत्ते को स्वामीभक्त और अच्छे स्वभाव वाला माना जाता है, लेकिन समय-समय पर वह दुर्जेय भी साबित होते हैं। कहा जाता है कि श्वान देवता गांव के देवता के साथ मिलकर अपने काम करते हैं।

विश्व का सबसे ऊंचा चाय बागान

विश्व का सबसे ऊंचा चाय बागान

मुन्नार से करीब डेढ़ घंटे की ड्राइव पर स्थित मोलुक्कुमालाई चाय बागान समुद्र तल की ऊंचाई से आठ हजार फीट ऊंचाई पर है। यह तमिलनाडु के मैदानी इलाकों में पाए जाने वाला सबसे ऊंचा है जो कि चारों ओर से ऊंची-नीची पहाडि़यों से घिरा है। यहां यह तय करना मुश्किल है कि कौन अधिक सुंदर है- प्राकृतिक दृश्य या यहां पर पैदा होने वाली सुगंधित चाय।

संघा तेनजिंग की प्राकृतिक ममी

संघा तेनजिंग की प्राकृतिक ममी

अगर आप सोचते हैं कि ममीज केवल मिस्र में ही पाई जाती हैं तो आप गलत हैं। हिमाचल प्रदेश के स्पी‍ति जिले के गुए गांव में तिब्बत के एक बौद्ध भिक्षु संघा तेनजिंग की ममी रखी हुई है जो‍ कि पांच सौ वर्ष पुरानी है। यह ममी बैठी हुई अवस्था में है और इसकी त्वचा और बाल पूरी तरह सुरक्षित हैं। संभवत: ऐसा इसलिए है कि भिक्षु ने खुद को जीवित रहते हुए ही ममी बनाने का काम किया होगा। रासायनिक लेपों के जरिए शरीर को सुरक्षित बनाने की तुलना में प्राकृतिक तौर पर ममी बनाने की प्रक्रिया बहुत ही जटिल और अत्यधिक दुर्लभ है। इस ममी का पता 1975 में एक भूकम्प के बाद लगा था और तब से इसे गुए के मंदिर में दर्शनार्थ रखा गया है।

छोटा ताजमहल

छोटा ताजमहल

जी हां देश में एक छोटा ताजमहल भी है और उसे किसी और ने नहीं मुमताज़ महल के पोते ने ही बनवाया है। लेकिन एक बड़ा फर्क इन दोनों रचनाओं के बीच यह है कि ताजमहल को शाहजहां ने अपनी पत्नी की याद में बनवाया था, पर इस छोटे ताजमहल को आज़मशाह ने अपनी माता की याद में बनवाया था।PC: Sandypharma007

तालकाड़ में मिनी डिजर्ट,कर्नाटक

तालकाड़ में मिनी डिजर्ट,कर्नाटक

यह स्थान कावेरी नदी पर स्थित है| कर्नाटक के चामराजनगर जिले के रेत में दफ़न है।यहाँ पहले 30 से भी ज्यादा मंदिर थे|30 मे से पांच मंदिरों में लिंगम व शिव के 5 चहरे प्रतिनिधित्व कर रहे थे ।माना जाता है कि भगवान शिव कि विधवा भक्त ने इस जगह को शाप दिया था| कर्नाटक में स्थित इस जगह पर कभी 30 मंदिर हुआ करते थे।आज यह रेगिस्तान में तब्दील हो गया है।PC:రవిచంద్ర

मैग्नेटिक पहाड़

मैग्नेटिक पहाड़

लेह-लद्दाख की खूबसूरती किसी से छिपी नहीं है। सैलानी हर साल हजारों की तादाद में यहां घूमने जाते हैं। अगर आप लेह लद्दाख घूमने जा रहे हैं, तो आपको रास्ते में चुम्बकीय ताकत वाला पहाड़ मिलेगा जो कि समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर है। समझा जाता है कि इस पहाड़ में चुम्बकीय ताकत है जो कि लोहे की चीजों को अपनी ओर खींचता है। जब कारों का इग्नीशन बंद कर दिया जाता है तब भी कारें इसकी ओर खिंची चली आती हैं। यह एक वास्तविक रोमांचक अनुभव है। इसे दुनिया की ग्रेविटी हिल्स में गिना जाता है।

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