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भारत की रहस्यमय गुफाएं, जिनमें शामिल है 'अंधी मछलियों' की अजीबो-गरीब दुनिया

Written By: Nripendra

भारत में आज भी कई ऐसी रहस्यमय गुफाएं मौजूद हैं, जिन्हे बनाने का सटीक उद्देश्य मात्र सवाल बनकर हमारे सामने है। घने जंगलों के बीच पहाड़ियों को काटकर बनाए गए ये एकांत निवास अपने कई सवालों के साथ मस्तिष्क पर कुठाराघात करते नजर आते हैं। पुरातात्विक सर्वेक्षण के दौरान प्रकाश में आईं अधिकांश गुफाओं का अस्तित्व पहाड़ों से जुड़ा है, जबकि कुछ गुफाएं जमीन के नीचे बनाई गईं हैं, जिनके अंतिम छोर की तलाश में निकले कई वैज्ञानिक मौत को गले लगा चुके हैं।

गुफाओं की दीवारों पर मिले अद्भुत शैलचित्रों व आकृतियों को लेकर भी भ्रम बना हुआ है, जिनके विषय में अलग-अलग मत प्रस्तुत किए गए हैं। 'नेटिव प्लानेट' के इस खास खंड में हमारे साथ जानिए भारत स्थित कुछ चुनिंदा प्राचीन गुफाओं के बारे में जिनकी मौजदूगी किसी रहस्य से कम नहीं।

भीमबेटका की गुफाएं

भीमबेटका की गुफाएं

PC-Suyash Dwivedi

भीमबेटका मध्यप्रदेश के रायसेन स्थित पुरापाषाण काल की गुफा है। जहां आज भी आदिमानव द्वारा बनाए गए रहस्यमय चित्र दीवारों पर अंकित हैं। यह प्राचीन गुफा नर्मदा नदी के किनारे स्थित है, जहां से सतपुड़ा की पहाड़ियों का सफर शुरू होता है। यह पूरा क्षेत्र आदिकालीन मनुष्यों का निवास स्थान हुआ करता था। यह वह समय था जब इंसान शारीरिक व मानसिक रूप से विकास की प्रकिया में था।

भीमबेटका - महाभारत काल से संबंध

भीमबेटका - महाभारत काल से संबंध

PC- Michael Gunther

गुफाओं में शैलचित्र इस बात के प्रमाण हैं कि उस समय का इंसान भी संचार के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल करता था। भीमबेटका गुफा अपने प्राचीनतम चित्रों की लिए प्रसिद्ध है, जिनकी खोज (1957-58) डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने की थी। इस गुफा को लेकर एक तर्क यह भी है कि इसका संबंध महाभारत काल से है। भीम के नाम पर इसका नाम भीमबेटका पड़ा है। अब इसमें कितनी सच्चाई है इस बात का कोई पुख्ता सबूत उपलब्ध नहीं है।

अजंता की गुफाएं

अजंता की गुफाएं

PC- Akshatha Inamdar

महाराष्ट्र स्थित अजंता-एलोरा की गुफाएं भारत की प्राचीन गुफाओं में शामिल हैं। विशालकाय चट्टानों की बीच उभरी हुईं प्राचीन मूर्तियां यहां का मुख्य आकर्षण हैं। कला प्रेमियों के मध्य यह स्थान लंबे समय से लोकप्रिय रहा है। अंजता की गुफाएं औरंगाबाद से लगभग 102 किमी की दूरी पर सह्याद्रि पहाड़ियों पर स्थित हैं। यह पूरा 30 गुफाओं का समूह है, जिनमें से पांच प्राथना भवन हैं जबकि 25 बौद्ध मठ हैं। इन गुफाओं की खोज आर्मी ऑफिसर जॉन स्मिथ ने 1819 में की थी। यह गुफा अपनी प्राचीन मूर्तियों और कलाकृतियों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध हैं।

ऐलोरा की गुफाएं

ऐलोरा की गुफाएं

PC- Vipula

औरंगाबाद से लगभग 30 किमी की दूरी पर स्थित ऐलोरा की गुफाओं का इतिहास भी काफी पुराना है, जो 350 व 700 ईसवी के बाद अस्तित्व में आईं। बेसाल्टिक की पहाड़ी पर मौजूद एलोरा 34 गुफाओं का समूह है। ये गुफाएं अलग-अलग धर्मों का प्रतिनिधित्व करती हैं। यहां की 12 गुफाएं भगवान बुद्ध को समर्पित हैं जबकि 17 गुफाएं हिंदू व 5 गुफाएं जैन धर्म पर आधारित हैं। प्राचीन काल की इन गुफाओं को देखकर लगता है कि उस समय का इंसान कला के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ गया था। ये गुफाएं अब प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र बन चुकी हैं, जिन्हें देखने के लिए देश-दुनिया से लोग आते हैं।

एलीफेंटा की गुफाएं

एलीफेंटा की गुफाएं

PC-~shuri~commonswiki

महाराष्ट्र की अजंता-एलोरा के बाद एलीफेंटा गुआएं भी अपने प्राचीन कलात्मकता के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। माना जाता है कि इन गुफाओं का निर्माण 5वीं से लेकर 7वीं शताब्दी के मध्य किया गया था। हालांकि इस रहस्यमयी गुफा में सिल्हारा वंश के सम्राटों द्वारा निर्मित प्रतिमाओं के भी साक्ष्य मिलते हैं। यहां की गुफाओं में भी विभिन्न धर्मों से जुड़े कई प्रमाण मिले हैं।

एलीफेंटा - गुफाओं में मूर्तियां

एलीफेंटा - गुफाओं में मूर्तियां

PC- Trakesht

यहां कि 5 बड़ी गुफाओं में हिन्दू धर्म से जुड़ी कई मूर्तियां स्थापित हैं जबकि दो गुफाओं में बौद्ध धर्म से जुड़े प्रमाण मिलते हैं। यहां कि मुख्य गुफा में 26 स्तंभ बने हुए हैं, जहां भगवान शिव के विभिन्न रूपों को अंकित किया गया है। यहां मौजूद हाथी की आकृतियों की वजह से इन गुफाओं का नाम ऐलीफेंटा रखा गया। बता दें कि इन गुफाओं को 1987 में यूनेस्कों द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया जा चुका है।

बाघ की गुफाएं

बाघ की गुफाएं

PC-Khalid Mahmood

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित बाघ की गुफाएं भारत की प्राचीन व रहस्यमयी गुफाओं में शामिल हैं। ये 9 गुफाओं का समूह है, जिनमें से 4 गुफाएं नष्ट होने की कगार पर हैं। यहां मौजूद गुफा संख्या 2 'पांडव गुफा' के नाम से जानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इन गुफाओं का निर्माण 5वीं-6वीं शताब्दी के मध्य हुआ होगा। ये गुफाएं राज्य के धार जिले से लगभग 97 किमी की दूरी पर विन्ध्याचल पर्वत के दक्षिण में स्थित हैं।

बाघ गुफाएं - जंगली बाघों का कब्जा

बाघ गुफाएं - जंगली बाघों का कब्जा

PC- Khalid Mahmood

इन गुफाओं में बौद्ध धर्म के ज्यादा प्रमाण मिलते हैं। यहां कई बौद्ध मठों को देखा जा सकता है। कहा जाता है इन गुफाओं से जब इंसानों ने पलायन शुरू हुआ तो इन गुफाओं पर जंगली बाघों का कब्जा हो गया। इसलिए इन गुफाओं का नाम बाघ की गुफाएं पड़ा। बाघ गुफा के कारण यहां के गांव और पास बहने वाली नदी को भी बाघ के नाम से जाना जाता है। गुफा के चैतन्य हॉल में बौद्ध स्तूफ मिले हैं, जहां बोद्ध भिक्षु रहा करते थे।

बोरा की गुफाएं

बोरा की गुफाएं

PC- Apy Seth

आंध्रप्रदेश की बोरा गुफाएं 10 लाख साल पुरानी बताई जाती हैं। जहां लंबे समय से भू-वैज्ञानिक शोध कार्य में लगे हुए हैं। यह रहस्यमय गुफाएं अंदर से लाइमस्टोन (स्टैलक्टाइट व स्टैलग्माइट) की बनी हुई हैं। जहां कि दुनिया कुछ अलग ही नजर आती है। कहीं संकरे रास्ते हैं तो कहीं लंबा अंधेरा रास्ता। कहा जाता है इस गुफा में प्राचीन शिवलिंग भी मौजूद है जिसकी पूजा यहां के आदिवासी लोग करते हैं।

बोरा की गुफाएं - भू-वैज्ञानिकों का मत

बोरा की गुफाएं - भू-वैज्ञानिकों का मत

PC- Roshith gopu

ये गुफाएं विशाखापट्टनम से लगभग 90 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां के अद्भुत नजारों को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि ये गुफाएं गोस्थनी नदी के तेज प्रवाह का परिणाम है। यहां कुरनूल में बेलम गुफाएं भी काफी प्रसिद्ध हैं, जिसे भारत की दूसरी सबसे बड़ी प्राकृतिक गुफा कहा जाता है। जिसकी खोज 1854 में एचबी फुटे ने की थी। बोरा गुफाएं पहाड़ी पर स्थित हैं जबकि बेलम सपाट समतल मैदान के नीचे स्थित हैं।

कुटुमसर की गुफाएं

कुटुमसर की गुफाएं

PC-Theasg sap

छत्तीसगढ़ के बस्तर की कुटुमसर गुफा को भी भारत की रहस्यमय गुफाओं में गिना जाता है। कहा जाता है यहां वनवास के दौरान भगवान राम ठहरे थे। जहां राम ने कई साधु-संतों से शिक्षा ग्रहण की थी। यह प्राचीन गुफा जमीन से 55 फुट नीचे है, जिसकी लंबाई लगभग 330 मीटर बताई जाती है। यहां कई प्राचीन कक्ष भी मौजूद हैं। इस गुफा पर निरंतर शोध जारी है, अध्ययन में पता चला है कि यहां कभी इंसान भी रहते थे।

कुटुमसर- अंधी मछलियों की दुनिया

कुटुमसर- अंधी मछलियों की दुनिया

PC - Theasg sap

कुटुमसर गुफा पूर्ण रूप से चुना पत्थर से बनी है। जिसके कारण यहां कई अद्भुत संरचनाएं उभरी हैं। यहां इतना अंधेरा रहता है, कि इंसान खुद को पूरी तरह अंधा महसूस करता है। यह गुफा अंधी मछलियों के लिए मशहूर है। यहां इतना अंधेरा है कि मछलियों की आखों पर एक अलग सी परत बन चुकी हैं, जो इन्हे दृष्टिहीन बना देती हैं।

बराबर गुफा

बराबर गुफा

PC-Photo Dharma

चट्टानों को काटकर बनाई गईं बराबर गुफाएं, भारत की प्राचीन गुफाओं में गिनी जाती हैं। इन गुफाओं में मौर्य व अशोक कालीन साक्ष्यों को देखा जा सकता है। जहां सम्राट अशोक से संबंधित कई शिलालेख भी मौजूद हैं। ये गुफाएं बिहार के गया से 24 किमी की दूरी पर स्थित हैं। ये सात गुफाओं का समूह है। जो बराबर और नागार्जुनी पहाड़ियों पर स्थित हैं। बताया जाता है कि इन गुफाओं में से 2 गुफाएं भिक्षुओं को दान में दी गईं थी।

बराबर गुफा- बाबा सिद्धेश्वर नाथ का मंदिर

बराबर गुफा- बाबा सिद्धेश्वर नाथ का मंदिर

PC- Photo Dharma

ये गुफाएं काफी ज्यादा ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व रखती हैं, जिन्हें देखने के लिए रोजाना सैलानियों की भीड़ लगती है। यहां पहाड़ी पर 'बाबा सिद्धेश्वर नाथ' का मंदिर भी है। जिनके दर्शन व जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगती है। भगवान भोलेनाथ के 9 रूपों में 'बाबा सिद्धनाथ' का स्थान सर्वोच्च है। बराबर गुफा दो कक्षों में विभक्त है, जिन्हें ग्रेनाईट को तराशकर बनाया गया है। इनमें से पहला कक्ष उपासकों के लिए था जबकि दूसरा कक्ष पूजा के लिए बनाया गया था।

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