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रहस्य : इस किले में आज भी भटकती है नटिन की आत्मा

भारत का अतीत ऐसे ऐसे रहस्यमय स्थानों से भरा है जिनके बारे में सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। एक ऐसी ही दर्दनाक कहानी जुड़ी है मध्यप्रदेश के खंडहर में तब्दील गढ़पहरा के किले की। कहा जाता है यहां आज भी एक नटिन (करतब दिखाने वाली) की आत्मा भटकती है। यह किला भारत की उन चुनिंदा जगहों में शामिल है, जिनके बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते है।

किसी जमाने में अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध यह किला आज जमीन में दफन होने की कगार पर है। काली पड़ती किले की दीवारें आज भी अपने अंदर कई गहरे राज छुपाए बैठी हैं। जानकारों का मानना है कि यहां दर्द भरे गीत सुनाई देते हैं। रहस्य की पड़ताल में आज हमारे साथ जानिए भारत के ह्रदय राज्य मध्यप्रदेश के रहस्यमय गढ़ पहरा किले के बारे में।

एक ऐतिहासिक विरासत

एक ऐतिहासिक विरासत

यह एक ऐसे किले की कहानी है जिसका अतीत इतिहास के पन्नों में उतारा नहीं गया। इसलिए शायद इसके बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते। लेकिन अगर आप गढ़पहरा के आसपास पड़ताल करें, तो आपको इस किले की पीछे की अनकही बातों के बारे में पता चलेगा। गढ़पहरा की पूरी कहानी अब बस किवदंतियों तक ही सीमित रह गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां कभी किसी बूढ़े राजा का शासन था। उस दौरान बुंदेलखंड का गढ़ पहरा राजा की राजधानी हुआ करता था। कहा जाता है यह जगह मराठों और मुगलों के दौर में एक बड़ी रियासत के नाम से जानी जाती थी।

नट-नटिन का खतरनाक करतब

नट-नटिन का खतरनाक करतब

यह किले की कहानी तब ज्यादा दिलचस्प मोड़ लेती है जब इसका इतिहास करतब दिखाने वाले नट-नटिन से जुड़ता है। कहा जाता है कि एक बार बूढ़े राजा की इच्छा के अनुसार नट-नटिन को करतब दिखाने के लिए दरबार में हाजिर होने का संदेश भेजा गया। नट अपनी पत्नि के साथ राजा के दरबार में आया।
कहा जाता है कि उस नट की पत्नी बेहद खूबसूरत थी। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह उनका आखिरी करतब होने जा रहा है। निर्देशानुसार नटिन को किले की ऊंचे परकोटे से होते हुए पास की पहाड़ी तक पहुंचना था, जिसके लिए एक रस्सी बांधी गई थी। नटिन को रस्सी पर चलकर यह पूरा करतब दिखाना था।

राजा का बड़ा ऐलान

राजा का बड़ा ऐलान

जब यह प्रस्ताव नट-नटिन के समक्ष रखा गया तो वे बूरी तरह कांप गए। क्योंकि उन्होंने आज तक इतने खतरनाक करतब के बारे में सोचा भी नहीं था। लेकिन वो राजा को नाराज नहीं कर सकते थे। लिहाजा उन्हें इस खतरनाक करतब को करने के लिए तैयार होना पड़ा।
राजा ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अगर तुम यह करतब में सफल हो जाते है तो मैं तुम्हे पुरस्कार के रूप में अपना आधा राज्य दे दूंगा। जिसको लेकर बूढ़े राजा का बेटा चिंता में पड़ गया। और अपनी पिता की हत्या का साजिश में जुट गया। अगली सुबह नट-नटिन को वो खतरनाक करतब करना था।

जीवन की आखिरी रात

जीवन की आखिरी रात

किवदंतियों के अनुसार वो रात नट-नटिन ने जागकर बिताई थी। रात भर दोनो रोते हुए गाना गाते रहे। उस गीत के बोल थे....गई रात और पहर थोड़े.......। कहा जाता है उस गाने के बोल चारो तरफ जा रहे थे, जिसे सुनकर राजा के बेटे ने पिता की हत्या का मन भी बदल लिया था। उसने सोचा की पिता तोअब बूढ़े हो गए हैं कितने दिन और जीवित रहेंगे। लेकिन बेटे से अलग राजा की पत्नी को इस बात की चिंता थी, कि अगर नट-नटिन इस करतब को कर जाते हैं तो उसे अपने आधे राज्य से हाथ धोना पड़ेगा।

धोखे सी ली गई जान

धोखे सी ली गई जान

अगली सुबह करतब देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। क्योंकि यह अबतक का सबसे बड़ा करतब होना जा रहा था। लोग महल और पहाड़ी के बीच रस्सी और नीचे की खाई को देख डर रहे थे। नट के नगाड़ा बजाते ही नटिन रस्सी पर चलने लगी। नटिन का संतुलन देख रानी की चिंताएं और बढ़ गईं, उसके मन में अजीबोगरीब ख्याल आने लगे, कि कहीं नटिन ने यह करतब पूरा कर लिया तो?

कहीं राजा इस नटिन से विवाह न कर ले? रानी ने बड़ा फैसला लेते हुए उस रस्सी को कटवा दिया। और नटिन की खाई में गिरकर मौत हो गई। कहा जाता है कि पत्नी के वियोग में नट ने भी अपनी जान दे दी।

बर्बाद हुआ पूरा राज्य

बर्बाद हुआ पूरा राज्य

किवदंतियों के अनुसार नट-नटिन की मौत के बाद पूरा राज्य बर्बाद हो गया । कहा जाता है कि आज भी उस नटिन की आत्मा किले और आस पास के इलाको में भटकती है। यहां तक की स्थानीय निवासियों ने रात में दर्द भरे गीत सुनने का दावा भी किया है। इस बात में कितनी सच्चाई है इस बात का कोई सटीक प्रमाण नहीं मिलता है। लेकिन स्थानीय निवासियों के मुताबिक यह एक सत्य घटना है।

कैसे करे प्रवेश

कैसे करे प्रवेश

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वर्तमान में गढ़पहला मध्यप्रदेश के सागर जिले में है। जहां आप सड़क/रेल/हवाई मार्गों को द्वारा पहुंच सकते हैं। यहां का नजदीकी रेल स्टेशन 'सागर' है जबकि यहां से नजदीकी हवाई अड्डा जबलपुर एयरपोर्ट है। आप चाहें तो यहां सड़क मार्गों के द्वारा भी पहुंच सकते हैं। बेहतर सड़क मार्गों द्वारा सागर राज्य के बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

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