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इस मंदिर का रहस्य बना वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती

भारत के आंध्र प्रदेश स्थित लेपाक्षी मंदिर के सबसे बड़ा रहस्य जिसके सामने विज्ञान भी नतमस्तक है। India's mysterious temple lepakshi located anatapur Andhra Pradesh.

By Nripendra

भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जो अपने चमत्कार और रहस्यमयी शक्तियों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यहां मौजूद हजारों पौराणिक व ऐतिहासिक स्थल वैज्ञानिक शोध का हिस्सा रह चुके हैं। कई रहस्यों को सुलझाने में वैज्ञानिक कामयाब भी रहे हैं, पर कई ऐसे रहस्य आज भी मौजूद हैं जो वैज्ञानिक पकड़ में नहीं आ पाएं हैं। जिनके सामने विज्ञान घुटने टेक चुका है। 'नेटिव प्लानेट' के इस खास खंड में हमारे साथ जानिए भारत के आंध्र प्रदेश स्थित एक ऐसे मंदिर के बारे में जो पिछले साढ़े चार सौ साल से बना हुआ हैं सबसे बड़ा रहस्य।

खंभों में छिपा है रहस्य

खंभों में छिपा है रहस्य

PC- MADHURANTHAKAN JAGADEESAN

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर स्थित लेपाक्षी मंदिर पिछले कई सालों से वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। जिसके रहस्य को सुलझाने में विज्ञान घुटने टेकता नजर आ रहा है। इस चमत्कारी मंदिर में कई खंभे मौजद हैं, पर इसमें से एक खंभा ऐसा है जो हवा में झूलता नजर आता है। ऐसा क्यों होता है इस विषय में आजतक किसी को कुछ नहीं पता चल पाया है। यह मंदिर दक्षिण भारत का मुख्य आस्था का केंद्र है। जहां रोजाना हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं, पर जब वे इस झूलते हुए खंभे को देखते हैं तो दंग रह जाते हैं। इसके पीछे कौन सी चमत्कारी शक्ति काम कर रही है, इस बारे में किसी को भी कोई जानकारी नहीं।

खंभे से जुड़ी आस्था

खंभे से जुड़ी आस्था

PC- DRDAIVIK

लेपाक्षी मंदिर में कुल 70 खंभे मौजूद हैं, पर इनमें से बस एक ही है जो जमीन को नहीं छूता बल्कि हवा में लटकता है। इस झूलते हुए खंभे की वजह से इस मंदिर को 'हैंगिंग पिलर टेंपल' भी कहा जाता है। यहा आने वाले भक्तों का मानना है कि इस लटकते हुए खंभे के नीचे से कपड़ा निकालने से सुख-संपदा प्राप्त होती है। इसलिए यहां आपको श्रद्धालु ये धार्मिक गतिविधि करते दिखाई दे जाएंगे।

मंदिर का निर्माण

मंदिर का निर्माण

PC- Achyuta T. Madabushi

इस रहस्यमय मंदिर का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के काल (1518) में किया गया था। पहाड़ी पर होने के कारण इस मंदिर को कूर्म सैला भी कहा जाता है। लेकिन अगर पौराणिक मान्यता को मानें तो इस मंदिर का निर्माण ऋषि अगस्त्य ने करवाया था। बता दें कि यह मंदिर भगवान वीरभद्र को समर्पित है। यहां देवी को भद्रकाली कहा जाता है।

जुड़ा है पौराणिक महत्व

जुड़ा है पौराणिक महत्व

PC- Ashwin Kumar

पौराणिक मान्यता के अनुसार इस स्थल का संबंध रामायण काल से है। कहा जाता है, जब रावण ने माता सीता का अपहरण किया था, तो वो इसी जगह से होकर गुजरा था, जहां जटायु ने रावण का रास्ता रोका था। यहीं रावण और जटायु के मध्य भयंकर युद्ध हुआ था। कहा जाता है माता सीता के पैर के निशान आज भी इस जगह में मौजूद हैं। बता दें कि यहां मिले पैरों के निशान को लेकर इतिहासकारों ने अलग-अलग मत प्रस्तुत किए हैं।

अद्भुत राम लिंगेश्वर शिवलिंग

अद्भुत राम लिंगेश्वर शिवलिंग

PC- Ashwin Kumar

यहां राम लिंगेश्वर नाम का एक अद्भुत शिवलिंग भी मौजूद है। कहा जाता है कि जटायु के दाह संस्कार के बाद भगवान राम ने स्वयं इस शिवलिंग की स्थापना की थी। यहा पास में एक और शिवलिंग स्थापित है, जिसकी स्थापना हनुमान ने की थी। इस शिवलिंग को हनुमालिंगेश्वर के नाम से जाना जाता है। यहां आपको शेषनाग की एक अद्भुत प्रतिमा भी नजर आएगी। जिसका निर्माण कई साल पहले किसी शिल्पकार द्वारा किया गया था।

स्वयंभू शिवलिंग

स्वयंभू शिवलिंग

PC- Nandini

इस पौराणिक स्थल पर स्वयंभू शिवलिंग भी मौजूद है जिसे भगवान वीरभद्र (शिव का रौद्र रूप) का अवतार माना जाता है। कई सालों तक शिवलिंग खुले आकाश के तले विराजमान थे, बाद में विजयनगर साम्राज्य के काल में यहां मंदिर का निर्माण करवाया गया। कहा जाता है किसी अद्भुत चमत्कार के बाद इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था।

 रहस्यमय हिस्सा नृत्य मंडप

रहस्यमय हिस्सा नृत्य मंडप

PC- rajaraman sundaram

इस स्थल पर एक नृत्य मंडप स्थित है, जिसे शिव-पार्वती से जोड़ कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी जगह हुआ था। इसलिए विजयनगर के राजाओं ने यहां एक विवाह मंडप का निर्माण करवाया। इस विवाह मंडप को एक ऐसा अद्भुत रूप दिया गया, जैसे यहां देवी-देवता नृत्य कर रहे हों। यहां स्थित कमल में अजब की ग्रेविटी पाई गई है, जो वैज्ञानिकों के लिए एक सवाल बन गया है।

कैसे पहुंचे लेपाक्षी मंदिर

कैसे पहुंचे लेपाक्षी मंदिर

PC- Chandan Amarnath

लेपाक्षी मंदिर आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित हैं। यहां तक के लिए सबसे नजदीकी बैंगलोर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (केम्पेगौड़ा एयरपोर्ट) है, जो लगभग 100 किमी की दूरी पर स्थित है। रेल मार्ग के लिए आप हिंदपुर रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। आप चाहें तो सड़क मार्ग के द्वारा भी यहां तक पहुंच सकते हैं। अनंतपुर सड़क मार्गों द्वारा आंध्र प्रदेश व बैंगलोर से जुड़ा हुआ है।

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