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यहां मौजूद शिवलिंग की पूजा मनुष्य नहीं, करते हैं नाग

सत्य ही शिव है...शिव ही सुन्दर है..देवों के देव 'महादेव' का हिन्दू धर्म में सर्वश्रेष्ठ स्थान है। शिव के अद्भुत रूपों की वजह से इन्हें कई नामों से जाना जाता है। जैसे नीलकंठ, रुद्र, शंकर, महाकाल, महेश आदि। भगवान शिव लंबे समय से मनुष्यों के पाप, दुख-दर्द हरते आ रहे हैं। शिव अपने सौम्य और रौद्र रूपों के लिए तीनों लोकों में जाने जाते हैं।

कहा जाता है कि जब-जब पृथ्वी पर संकट के बादल छाए, शिव ने अलग-अलग अवतारों में मनुष्यों की रक्षा की। और यही धार्मिक मान्यता हिन्दू धर्म में अब तक चली आ रही है। इसलिए इनकी पूजा-अर्चना बड़े ही उत्साह के साथ की जाती है।

15 वर्षों से नाग कर रहा है पूजा

15 वर्षों से नाग कर रहा है पूजा

भगवान शिव चारों दिशाओं में निवास करते हैं। भगवान शिव की पूजा शिवलिंग व मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। भारत में महादेव के कई प्राचीन शिवलिंग मौजूद हैं जो अब भव्य मंदिर में तब्दील हो चुके हैं। जिनकी पूजा सुबह - शाम मंदिरों के महंत-पंडितों द्वारा की जाती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी पूजा कोई पंडित नहीं बल्कि नाग करता है। नाग के द्वारा पूजा करने का सिलसिला लगभग 15 वर्षों से चला आ रहा है।

हर पांच घंटे शिव की पूजा

हर पांच घंटे शिव की पूजा

यह अद्भुत शिवलिंग उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित सलेमावाद नामक एक गांव में है। जहां एक नाग शिव की पूजा 5 वर्षों से करते आ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह नाग रोज पांच घंटे यहां रूकता है। और शिव की पूजा करता है। गांववालों के लिए यह आम घटना है पर जब भी कोई बाहरी व्यक्ति यह सब अपने आंखों से देखता है तो वह सच में चौक जाता है। यहां तक की वैज्ञानिक भी इसके पीछे छुपे रहस्य को नहीं समझ पाएं हैं।

आस्था का केंद्र

आस्था का केंद्र

यह प्राचीन शिव मंदिर हिन्दुओं के लिए मुख्य आस्था का केंद्र बनते जा रहा है। शिवलिंग के दर्शन के लिए रोजाना श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। और जब से लोगों को नाग की शिव भक्ति के बारे में पता चला है यहां पर्यटकों का आना जाना शुरू हो गया है। देखते ही देखते सलेमावाद गांव अपने अद्भुत शिव मंदिर के लिए का प्रसिद्ध हो गया है। जिन लोगों को इन सब बातों पर विश्वास नहीं वे एक बार शिव जी के इस मंदिर पर माथा जरूर टेकें।

पूरी होती है मनोकामनाएं

पूरी होती है मनोकामनाएं

स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां भगवान शिव जी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसलिए यहां सुबह से ही पूजा-पाठ का सिलसिला शुरू हो जाता है। यह मंदिर इतना लोकप्रिय हो चुका है कि अब तो दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा के लिए आते हैं। अपनी ढेरों इच्छाओं व दुख-दर्द को लिए रोजाना कई लोग यहां तक का सफर तय करते हैं।

नाग के आने का समय

नाग के आने का समय

स्थानीय लोगों का मानना है कि शिव जी की पूजा करने नाग सुबह के 10 बजे आता है, और 5 घंटे की अवधी पूरी कर 3 बजे चला जाता है। गौर करने वाली है कि यह नाग किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है, जिससे श्रद्धालुओं को भय की अनुभूती नहीं होती है। नाग बड़े ही शांत मुद्रा में शिवलिंग के पास बैठा रहता है।

मंदिर के द्वार हो जाते हैं बंद

मंदिर के द्वार हो जाते हैं बंद

जिस वक्त नाग मंदिर में प्रवेश करता है उस समय मंदिर के द्वारों को बंद कर दिया जाता है। इस दौरान किसी को भी मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होती । जब नाग 5 घंटे की अवधी पूरी कर लेता है, तब लोगों के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए जाते हैं। जिसके बाद भक्त भगवान शिव के दर्शन करते है। नाग के द्वारा शिव की पूजा को स्थानीय लोग श्रद्धा की नजर से देखते हैं। कोई भी नाग को छेड़ने व मारने की हिमाकत नहीं करता।

 कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

भगवान शिव का यह अद्भुत मंदिर आगरा के पास स्थित सलेमावाद गांव में हैं। जहां तक के लिए आप आगरा से प्राइवेट टैक्सी या स्थानीय परिवहन का सहारा ले सकते हैं। आगरा उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध ऐतिहासिक शहर है, जहां आप रेल या हवाई मार्ग से पहुंच सकते हैं। यहां का नजदीकी हवाई अड्डा 'खेरिया एयरपोर्ट' है। रेल मार्ग के लिए आप आगरा रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। आप चाहें तो आगरा सड़क मार्ग से भी पहुंच सकते हैं, दिल्ली व उत्तर प्रदेश के कई बड़े शहरों से आपको आगरा के लिए आसानी से बस सेवा उपलब्ध हो जाएगी।

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