देश के दूसरे हिस्सों में जहां अब मां दुर्गा के पूजा पंडालों के पट खुलने ही वाले हैं, वहीं कोलकाता में प्रथमा से ही उत्सव की शुरुआत हो चुकी है। महालया के अगले दिन यानी एकम् से ही पूजा पंडालों में दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ रही है। शाम होते ही दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ लोग घूमने निकल पड़ रहे हैं। महानगर के लगभग सभी दुर्गा पूजा पंडालों का उद्घाटन हो चुका है और सभी पंडालों को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है।

अब तक हमने आपको कोलकाता के कई दुर्गा पूजा पंडालों में मां दुर्गा की पहली झलक और वहां के थीम के बारे में विस्तार से बताया है। इस कड़ी में हम आपको कोलकाता के कुछ ऐसे दुर्गा पूजा पंडालों के बारे में बता रहे हैं, जिनकी Theme बहुत Unique है। इसके साथ ही कोलकाता के कुछ Best दुर्गा पूजा पंडाल और उनकी थीम के बारे में भी हम आपको जानकारी देने वाले हैं।
अगर आपको कोलकाता के Famous दुर्गा पूजा पंडालों के बारे में जानना है तो Native Planet का यह आर्टिकल जरूर पढ़ें।
1. चलती ट्राम में दुर्गा पूजा

कोलकाता में पहली बार चलती ट्राम में मां दुर्गा की पूजा की जा रही है। एक ट्राम को किसी जमींदार हवेली के तर्ज पर सजाया गया है। यह ट्राम धर्मतल्ला (एस्प्लेनेड) ट्राम डिपो से सियालदह के बीच चलेगी। लेकिन इस ट्राम में कोई यात्री सवार नहीं होगा, बल्कि चलती ट्राम में ही मां दुर्गा की परंपरागत रूप से पूजा की जाएगी। दुर्गा पूजा में हर रोज यह ट्राम धर्मतल्ला से सियालदह रूट पर चलेगी।
2. Pet Friendly दुर्गा पूजा पंडाल

त्योहारों का मतलब परिवार के हर सदस्य के साथ खुशियां मनाना होता है। जिन घरों में पालतू पशु-पक्षी होते हैं, वे भी परिवार का सदस्य ही बन जाते हैं। दुर्गा पूजा के समय सभी घुमने निकलेंगे लेकिन पालतू जानवर घरों में क्यों बंद रहेंगे? हर पूजा पंडाल का उद्घाटन फिल्मी सितारों या राजनेताओं के हाथों करवाया जाता है लेकिन पालतू जानवरों को भी यह मौका मिलना चाहिए। इसी सोच के लिए बेलघरिया आर्यनगर दुर्गा पूजा कमेटी ने पालतू पशु-पक्षियों द्वारा पंडाल का उद्घाटन करवाया।
3. फिल्म 'कांतारा' से प्रेरित थीम

केरल रहस्यमए जंगलों पर आधारित फिल्म 'कांतारा' याद है ना। अगर 'कांतारा' की भव्यता को अनुभव करना है तो उत्तर कोलकाता में स्थित जोड़ासांको साधारण दुर्गात्सव कमेटी की दुर्गा पूजा में पहुंच जाइए। लगभग 3500 वर्ग फूट के क्षेत्र में फैले इस पूजा पंडाल में देवी मां की मूर्ति के सामने खड़े होने मात्र से उसकी भव्यता का अहसास होगा। केरल के पारंपरिक नृत्यकला 'दैव कोला' के आधार पर ही मूर्ति को तैयार किया गया है। सिर्फ मूर्ति की भाव-भंगिमा ही नहीं बल्कि मां दुर्गा की मूर्ति को दैव कोला साड़ी भी पहनायी गयी है। इस पूजा पंडाल का थीम 'ईश्वरीय' रखा गया है।
4. सिलिकॉन से बनायी गयी प्रतिमाएं

दुर्गा पूजा पर अक्सर हमने मिट्टी से मां दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिकेय, गणेश, महिषासुर और इन सभी के वाहनों की प्रतिमाएं तैयार होने की बातें सुनी हैं। मूर्तिकार मिट्टी को रौंदकर बड़े ही सुन्दर तरीके से इन मूर्तियों को तैयार करते हुए देखा भी होगा लेकिन हरिदेवपुर 41 पल्ली दुर्गा पूजा पंडाल में सिलिकॉन से मां दुर्गा समेत सभी मूर्तियों को बनाया गया है। ये मूर्ति बहुत जीवंत लग रही हैं और किसी भी बड़े बजट के दुर्गा पूजा पंडाल को टक्कर दे सकती हैं। इस पूजा पंडाल को काशी के घाटों की थीम पर सजाया गया है।
5. न्यू अलिपुर सुरुचि संघ

इस दुर्गा पूजा पंडाल को चतुर्थी के दिन से आम भक्तों के लिए खोल दिया गया है। यह कोलकाता के प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में से एक है। इस बार सुरुचि संघ की दुर्गा पूजा पंडाल को 'मां तोर एक ई अंगे एतो रूप' (मां तेरे एक ही अंग में इतना रूप) की थीम पर सजाया गया है। सिर्फ दुर्गा पंडाल को ही नहीं बल्कि आसपास की इमारतों को भी बेहद आकर्षक तरीके से सजाया गया है।
6. मो. अलि पार्क

यहां मां दुर्गा के परंपारगत स्वरूप की पूजा ही इस पूजा पंडाल में की जा रही है। यहां की मूर्ति की खासियत मां दुर्गा की मूर्ति के पीछे भगवान शिव की प्रतिमा और वासुकी नाग के फन हैं, जो देवी दुर्गा की मूर्ति को और भी आकर्षक बना रहे हैं। देवी की मूर्ति को बनारसी साड़ी पहनायी गयी है। पंडाल को द्वादश ज्योतिर्लिंग की थीम पर सजाया गया है।
7. शोभाबाजार राजबाड़ी

कोलकाता के सबसे पुराने और पारंपरिक दुर्गा पूजा कमेटियों में शोभाबाजार राजबाड़ी का नाम प्रमुखता के साथ लिया जाता है। इस पूजा पंडाल में किसी भी साल किसी थीम के आधार पर नहीं बल्कि एक खास शैली की मूर्ति बनायी जाती है। देवी दुर्गा का श्रृंगार सोने के आभुषणों से किया जाता है जिसे देखने के लिए यहां हर साल लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। खास तौर पर अष्टमी और नवमी के बीच होने वाली संधि पूजा के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो जाती है।
8. बड़ानगर न'पाड़ा दादा-भाई संघ

इस साल उत्तर कोलकाता के बड़ानगर न'पाड़ा दादा-भाई संघ में मां दुर्गा की मूर्ति का खास स्वरूप दिखाई देने वाला है। यहां मां दुर्गा दशभुजा नहीं बल्कि दो भुजाओं में ही दिखाई देने वाली हैं। उनके हाथों में भगवान शिव का डमरू समेत त्रिशुल भी नजर आ रहा है। वहीं गणेश-कार्तिकेय, सरस्वती-लक्ष्मी वर (अभय) मुद्रा नहीं बल्कि नमस्कार मुद्रा में बैठे दिखाई देंगे। पूजा पंडाल को 'प्लेटफार्म' थीम के आधार पर सजाया गया है। लेकिन यह किसी ट्रेन का प्लेटफार्म नहीं बल्कि सोशल मीडिया का प्लेटफार्म है, जहां आज के समय में लोग अक्सर अपने सुख-दुःख की कहानियां शेयर किया करते हैं।
9. सोदपुर वर्मा शेल

सिर्फ कोलकाता ही नहीं बल्कि उपनगरीय क्षेत्रों की दुर्गा पूजा भी बड़े बजट वाले पंडालों को टक्कर देती नजर आ रही है। इसी क्रम में उपनगर सोदपुर में पेरिस के ओपेरा हाउस की थीम पर दुर्गा पूजा पंडाल को सजाया गया है। यह सजावट इतनी सुन्दर की गयी है कि यहां आने वाले दर्शनार्थियों को एक पल के लिए खुद को पेरिस के ओपेरा हाउस में ही मौजूद महसूस होगा। सिर्फ दुर्गा पूजा पंडाल ही नहीं बल्कि यहां मां दुर्गा की प्रतिमा भी फ्रांसिस शैली में ही तैयार की गयी है।
10. मानिकतल्ला चलताबगान लोहापट्टी

इस दुर्गा पूजा पंडाल में सूर्ख लाल रंग की साड़ी में सजी मां दुर्गा की प्रतिमा बहुत सुन्दर दिखाई दे रही है। वहीं महिषासुर देवी दुर्गा को नमस्कार करने की मुद्रा में बैठा दिखाई दे रहा है। इस साल दुर्गा पूजा पंडाल का थीम 'अजाना के जाना। गल्पो बोली सोनो' (अंजाना को जानना। कहानी सुनाता हूं, सुनो) रखा गया है। पूजा पंडाल को मुख्य रूप से बैलगाड़ी के पहिये से सजाया गया है। इसके अलावा बांस से बनी वस्तुओं से भी पूजा पंडाल को सजाया गया है। इस दुर्गा पूजा पंडाल में मुख्य रूप से कई चटख रंग दिखाई देंगे।



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