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निपाह वायरस- गलती से भी ना करें केरल की इन चार जगहों की सैर

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दक्षिण भारत में स्थित केरल के उत्तरी जिलों निपाह वायरस तेजी से फ़ैल रहा है, जिसके चलते केरल केरल सरकार ने पर्यटकों से अनुरोध करते हुए, राज्य के चार उत्तरी जिलों - कोझिकोड, मलप्पुरम, वायनाड और कन्नूर ना जाने की सलाह दी है।

केरल के स्वास्थ्य सचिव राजीव सदानंदन ने कहा है कि, केरल के अन्य हिस्सों में आसानी से घूमा जा सकता है, लेकिन इन क्षेत्रों में जाने से बचें, तो बेहतर ही होगा। हेल्थ सेक्रेट्री का कहना है कि, केरल के उत्तरी जिले में कोझिकोड में अब तक निपाह के 15 केस आ चुके हैं। इसलिए बेहतर होगा कि, पर्यटक इन जिलों की सैर ना करें। इसके अलावा सरकार ने अन्य राज्यों को भी सचेत किया है, जिनमे जम्मू-कश्मीर, गोवा, राजस्थान और तेलंगाना शामिल हैं।

Nipah Virus

क्या है निपाह वायरस?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों पर आक्रमण करता है। दो दशक पहले 1998 में मलेशिया के कामपुंग सुंगाई निपाह गांव के सुअरों में इस वायरस की पहली बार पहचान की गई थी। सुअरों से यह वायरस चमगादड़ के संपर्क में आया। इसके द्वारा पशुओं और उनसे इंसानों में फैला। यह एक जूनोटिक बीमारी है। मलेशिया में जब यह पहली बार पहचान में आया तो इससे संक्रमित करीब 50 प्रतिशत मरीजों की मौत हो गई। उसी दौरान यह संक्रामक बीमारी सिंगापुर में भी फैली। उसके बाद 2004 में बांग्‍लादेश में यह फैली। अब केरल में इस वायरस से जुड़े मामले देखने को मिल रहे है।

निपाह के लक्ष्ण

निपाह के लक्ष्ण

इस वायरस से प्रभावित शख्स को सांस लेने की दिक्कत होती है फिर दिमाग में जलन महसूस होती है। तेज बुखार आता है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने मरीज से की मौत भी हो सकती है।

अब तक नहीं बना वैक्सीन

अब तक नहीं बना वैक्सीन

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इस वायरस के ईलाज के लिए अभी तक इंसान या जानवरों के लिए किसी तरह के वैक्सीन ईजाद नहीं किया गया है।

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पेड़ों से गिरे फलों को बिल्कुल ना खायें

पेड़ों से गिरे फलों को बिल्कुल ना खायें

इस बीमारी से बचने के लिए खजूर, उसके पेड़ से निकले रस और पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए। बीमार सुअर, घोड़ों और दूसरे जानवरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। ये वायरस फैलने वाला संक्रमण है, इसलिए इस वायरस से संक्रमित व्‍यक्ति से दूरी बनाकर चलना चाहिए। इस खतरनाक वायरस से बचने के रिबावायरिन नामक दवाई का इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

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