कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की विजय का जश्न और इस युद्ध में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए कारगिल वॉर मेमोरियल में जाने का प्लान बना रहे हैं? लद्दाख का एक बेहद सुन्दर पहाड़ी क्षेत्र जहां भारतीय सेना के जवानों ने घुसपैठियों को धुल चटाई थी। लेकिन सिर्फ कारगिल वॉर मेमोरियल ही क्यों, कारगिल में घूमने वाली कई जगहें और भी हैं।

इन्हें बिना देखे वापस लौटने का मतलब है आपकी कारगिल की ट्रिप का अधुरा रह जाना। विजय दिवस पर कारगिल वॉर मेमोरियल में शहीदों को नमन करने के बाद कारगिल में मौजूद इन पर्यटन स्थलों में जरूर घूमें।
कारगिल वॉर मेमोरियल
केंद्रशासीत प्रदेश लद्दाख के शहर कारगिल के पास ही मौजूद द्रास घाटी में यह वार मेमोरियल कारगिल युद्ध में शहीद भारतीय सेना के जवानों की याद में तैयार किया गया था। 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध में काफी संख्या में भारतीय सैनिक शहीद हो गये थे। इस वॉर मेमोरियल की गुलाबी शीलाओं पर 'ऑपरेशन विजय' में शहीद जवानों के नाम अंकित हैं।

मेमोरियल में एक प्वाएंट ऐसा भी है जहां से वह जगह भी साफ-साफ दिखायी देता है, जहां पर पाकिस्तानी जवानों ने अपना कब्जा जमा लिया था। वॉर मेमोरियल के अंदर एक अमर जवान ज्योति लगातार जलती रहती है। यहां एक थिएटर भी है, जिसमें अमिताभ बच्चन की आवाज में कारगिल युद्ध की पूरी कहानी सुनायी जाती है।
मशकोह घाटी

कारगिल का मशकोह घाटी ही वह जगह है जहां पाकिस्तानी सैनिकों ने अपना कब्जा जमा लिया था। इसी घाटी में बैठकर तत्कालिन पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ भारत के खिलाफ लड़ाई की रणनीतियां बनाते थे। इस जगह पर पाकिस्तानी सेना ने कई बंकर बनाए थे। बेहद खूबसूरत और शांत इस घाटी में एक बार जरूर जाना चाहिए। यह जगह कारगिल वॉर मेमोरियल से लगभग 2 घंटे की दूरी पर है।
द्रास घाटी

कारगिल युद्ध में यह जगह काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहीं वह जगह है, जहां पाकिस्तानी सेना के जवानों ने सबसे पहले गोले बरसाने शुरू किये थे। इसके बाद ही कारगिल का युद्ध शुरू हुआ था। भारतीय सेना ने जब इस जगह को पाकिस्तानी सेना से छिन लिया, उसके बाद ही यहां वॉर मेमोरियल बनाया गया, जहां शहीदों को श्रद्धांजलि देने और कारगिल युद्ध के बारे में जानने के लिए हर साल हजारों सैलानी पहुंचते हैं। ज़ोजिला पास के बाद से ही द्रास घाटी की शुरुआत हो जाती है, जो भारत के सबसे ठंडी जगहों में से एक है। इस जगह पर सर्दियों के समय तापमान -12° सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
टाइगर हिल

कारगिल युद्ध और टाइगर हिल की बातें एक-दूसरे से हमेशा जुड़ी रहती हैं। कारगिल युद्ध के दौरान यह प्रमुख चोटी थी, जहां पाकिस्तानी सेना का कब्जा हो गया था। पहाड़ी रणनीति के दृष्टिकोण से यह चोटी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण थी। यह कारगिल के सबसे ऊंचे स्थानों में से एक है, जहां से पूरे कारगिल पर नजर रखी जा सकती है। साथ ही यह दुनिया का सबसे ठंडा स्थान भी है, जहां सर्दियों का तापमान -60° तक पहुंच जाता है। कारगिल युद्ध के दौरान भारत के सैनिकों ने बड़ी ही वीरता के साथ इस चोटी पर फिर से हमारे देश का तिरंगा फहराया था।
हंडरमैन गांव
इस गांव की कहानी बड़ी ही अजीब है। यहीं वह गांव है, जिसके निवासी एक रात पहले तक पाकिस्तानी लेकिन अगली सुबह से ही भारतीय कहलाने लगे। दरअसल, 1965 में भारत-पाक युद्ध से पहले इस गांव पर पाकिस्तान का कब्जा था लेकिन इस लड़ाई के बाद इस गांव पर भारतीय सेना का अधिकार हो गया था। Line of Control (LoC) पर बसा यह गांव कारगिल युद्ध के दौरान भी काफी ज्यादा परेशानियां झेल चुका है।

32 परिवारों और 250 की आबादी वाले इस गांव ने कारगिल युद्ध के दौरान तबाही का वह मंजर अपनी आंखों से देखा था। इस छोटे से गांव हंडरमैन के लोगों ने भारत-पाकिस्तान के बीच हुए दोनों युद्धों के बाद तबाही के सभी सामानों को इकट्ठा कर एक संग्रहालय बना दिया जिसे देखने सैलानी यहां पहुंचते हैं।



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